देखें किस तरह मुस्लिम लड़कियों को पुलिस वाले धौस देकर हिंदू लड़को से शादी करने को मजबूर कर रहे है : वीडियो

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Mohammad Aamir
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किस तरह से मुस्लिम लड़कियों को पुलिस वाले कानुन की धौस देकर हिंदू लड़को से शादी करने को मजबूर कर रहे है, 3 दिन के अंदर ये हाथ जोड़कर रोता हुआ नज़र आएगा अगर अच्छे से वायरल हुआ तो सारे ग्रुप में शेयर कीजिए

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लखनऊ : मुस्लिम लड़कियों की हिंदू लड़कों के साथ करवाई गयी हिंदू रीति-रिवाज़ से शादी

लखनऊ। भारत में सामाजिक, धार्मिक, वैचारिक युद्ध चल रहा है, यहाँ सत्ता पर संघ परिवार का क़ब्ज़ा है जिसके कारण संघ परिवार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगा हुआ, अल्पसंखयकों विशेष कर मुस्लिम समुदाय संघ के निशाने पर, मुस्लिम समुदाय से सम्बंधित नगरों के नाम मिटाने की बात हो या फिर अन्य तरीकों से हानि पूंछना हो, संघ अपने काम में लगा हुआ है, इस उदेश में उसे सरकारों, प्रशाषन का पूरा सहयोग प्राप्त होता है|

चार अनाथ मुस्लिम लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों के साथ हिंदू रीति रिवाज से की गई। ये शादियां लखनऊ के महानगर स्थित कल्याण भवन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में सपन्न हुईं जिसका आयोजन समाज कल्याण विभाग ने किया था। इस सामूहिक विवाह समारोह में 27 हिंदू जोड़ों की शादियां हुईं। सामूहिक विवाह समारोह के एक दिन पहले सभी जोड़ों का स्पेशल मैरेज ऐक्ट के तहत कोर्ट में विवाह कराया गया। महिला कल्याण विभाग और समाज कल्याण विभाग ने मिलकर इस समारोह का आयोजन किया था।

समारोह में 31 अनाथ लड़कियों की शादी की गई। इनमें से 27 लड़कियां हिंदू और चार लड़कियां मुस्लिम थीं। मुस्लिम नामों वाली लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों से हिंदू रीति-रिवाज से की गई। सभी जोड़ों ने सात फेरे लिए, एक दूसरे को माला पहनाई और कसमें खाईं। पंडितों ने मंत्र पढ़े और विवाह सम्पन्न हुआ।

जिन चार मुस्लिम लड़कियों की हिंदू लड़कों से शादी हुई उनके नाम रिजवाना, नूरी, सीमा और सबा थे। रिजवाना की शादी शाहजहांपुर के राजकुमार से, नूरी की शादी अलीगढ़ के बबलू से, सीमा की शादी उमेश कुमार दीक्षित और सबा की शादी हरदोई के विजय सिंह के साथ हुई।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार डीपीओ सुधाकर पाण्डेय ने बताया कि शेल्टर होम में इन लड़कियों को 6-10 साल की उम्र में लाया गया था। इतने वर्षों तक शेल्टर होम में रहने के दौरान अब उन्हें अनाथ घोषित कर दिया गया। बालिग होने के बाद उनकी उम्र विवाह योग्य हो गई।

प्रशासन ने उनके लिए योग्य वर खोजने के लिए अखबारों में विज्ञापन दिया। सैकड़ों लड़कों ने शादी के लिए आवेदन किया। उनमें से कुछ लड़कों को शादी के लिए चयनित किया गया।

मुस्लिम लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों से हिंदू रीति-रिवाज से कराए जाने के बारे में पूछे जाने पर सीडीओ मनीष बंसल ने कहा कि लड़कियों के नाम मुस्लिम हैं लेकिन बचपन से वे शेल्टर होम में रह रही हैं, किसी ने उनकी जाति या धर्म नहीं पूछा। वे मुस्लिम धर्म के कोई भी रीति-रिवाज नहीं मानती हैं। शादी के बाद वे अपने पति का धर्म मानेंगी।

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