देश ख़तरे में है : जज का इस्तीफ़ा, क्या सरकारी दख़ल ने बदलवाया मक्का मस्जिद केस का फ़ैसला!

Posted by

हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस का आज फैसला सुनाया गया है जिसमे सभी आरोपियों को बारी कर दिया गया और फैसला सुंनाने के चन्द घंटे के बाद ही जज ने इस्तीफा दे दिया है, जज के इस्तीफे के बाद अनेक सवाल उठना शुरू हो गए हैं, यह कोई मामूली घटना नहीं है, अदालतों के अंदर के हालत अच्छे नहीं हैं, यह बात सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस वार्ता के बाद इस्पस्ट हो चुके हैं, अब सिर्फ यही कहा जा सकता है कि देश ख़तरे में है| अदालतों में सरकारी दख़ल हद से ज़ियादा बढ़ चुका है जस्टिस चमलेश्वर के हालिया परता से यह साबित हो जाता है|

हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस का फैसला सुनाने वाले एनआईए के जज ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि जज रवींद्र रेड्डी ने कहा कि उन्होंने निजी कारणों के चलते इस्तीफा दिया है।

बता दें कि कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में असीमानंद मुख्य आरोपी थे। इस मामले में एनआईए ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले को पढ़ेंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

आपको बता दें कि इस धमाके में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे। मामले में 10 आरोपियों में से आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी जिसमें नबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं। एक आरोपी सुनील जोशी की जांच के दौरान हत्या कर दी गई थी।

दो और आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंग्रा के बारे में मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया है कि उनकी भी हत्या कर दी गई है। ब्लास्ट मामले में सीबीआई ने सबसे पहले 2010 में असीमानंद को गिरफ्तार किया था लेकिन 2017 में उन्हें सशर्त जमानत मिल गई थी। उन्हें 2014 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में भी जमानत मिल गई थी।

आपको बता दें कि जांच के दौरान असीमानंद ने कई बार अपने बयान बदले थे। उन्होंने पहले आरोपों को स्वीकार किया था और बाद में साजिश रचने की भूमिका में शामिल होने से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि 18 मई 2007 को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट पर प्रार्थना के दौरान धमाका हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, बाद में ये चारों लोग भी जिंदगी से जंग हार गये थे।

मस्जिद में धमाके के समय वहां 10 हजार लोग मौजूद थे। वहां दो जिंदा बम भी बरामद हुए थे जिसे हैदराबाद पुलिस ने निष्क्रिय कर दिया था। बाद में इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन फिर यह मामला NIA के पास चला गया। एजेंसी ने 226 अभियोजन पक्ष के गवाहों को सूचीबद्ध किया था जिसमें से 64 बदल गए थे।