धरती को समतल करने वाले, अटल बिहारी वाजपेयी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच पंचतत्व में विलीन हो गए!

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भाषा, नई दिल्ली।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच आज शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया और बंदूकों की सलामी के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान यमुना के किनारे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर हजारों लोग मौजूद थे।
उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य ने जब उनकी पार्थिव देह को मुखाग्नि दी तो हल्की बूंदाबांदी के बीच माहौल ‘अटल बिहारी अमर रहें’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए उनके अंतिम संस्कार में देशभर से जुटे नेताओं के साथ ही कई अन्य देशों के नेता भी पहुंचे और अत्यंत लोकप्रिय रहे वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंत्येष्टि स्थल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उपराष्ट्रपति एम वैंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित तमाम हस्तियां वाजपेयी को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद थीं।

केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इस अवसर पर मौजूद थे। राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के भी स्मारक हैं।

सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
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भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली और पाकिस्तान के कार्यवाहक कानून मंत्री अली जाफर सहित कई विदेशी हस्तियां वाजपेयी के अंतिम संस्कार के समय मौजूद थीं।

जिस तिरंगे ध्वज में वाजपेयी का पार्थिव शरीर लिपटा था, वह ध्वज पूर्व प्रधानमंत्री की नातिन निहारिका को सौंप दिया गया। वाजपेयी का कल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वह 93 साल के थे।

उनके अंतिम संस्कार में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बहुत से लोगों ने सफेद कपड़े पहन रखे थे और बहुत से लोग समावेशी भारत की वकालत करने वाले इस नेता की याद में रो रहे थे।

गम और गर्मी के चलते कई लोग बेहोश भी हो गए जिनमें कुश चतुर्वेदी भी शामिल थे।

बिहार के सीवान से ताल्लुक रखने वाले 27 वर्षीय युवक ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है, लेकिन मैं एक बार (पूर्व राष्ट्रपति) कलाम तथा वाजपेयी से मिलना चाहता था। जब वे जीवित थे, मैं उनसे नहीं मिल पाया, लेकिन आज मैं यहां आ गया।’’

वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनके घर से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय ले जाया गया और फिर अंतिम यात्रा राष्ट्रीय स्मृति स्थल के लिए रवाना हुई। इस दौरान दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा जो खामोशी से लेटे अपने नेता की अंतिम झलक पाने को आतुर थे।

सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब

 

पूर्व प्रधानमंत्री का शव फूलों से सजी तोपगाड़ी में रखा था और हजारों लोग उसके पीछे-पीछे चल रहे थे। इनमें से कुछ धीरे-धीरे चल रहे थे तो कुछ दौड़ रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी तोपगाड़ी के साथ लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी तक पूरे रास्ते पैदल चले।

मोदी ने बाद में कहा कि देश के हर कोने और समाज के हर तबके से लोग राष्ट्र को असाधारण योगदान देने वाले असाधारण व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने आए।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘भारत आपको नमन करता है अटल जी।’’ भाजपा मुख्यालय से लेकर राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक सड़कों पर हर जगह जनसैलाब था। इस दौरान सुरक्षाकर्मी कड़ी निगाह रखे हुए थे जिससे कि कोई अप्रिय घटना न हो पाए।

यह असाधारण दृश्य था जो इससे पहले मई 1991 में कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के अंतिम संस्कार के समय देखा गया था।

तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर भीड़ बीती रात से ही जुटनी शुरू हो गई थी। पहले भीड़ अस्पताल में एकत्र हुई, फिर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके घर पर और फिर भाजपा मुख्यालय में।