धर्म के नाम पर जोश में बाबरी मस्जिद गिराने वालों में शामिल ‘अचल सिंह मीणा’ 26 साल से बिस्तर पर पड़ा है

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कहते हैं ऊपर वाले की लाठी बेआवाज़ है, उसके घर न देर है न अंधेर, ये दुनियां वाले खुद को कितना भी खुदा बनाने की कोशिश क्यों न करें उनकी साड़ी ताकात उसके सामने धरी रह जाती है, इंसान को अपने किये का अंजाम भुगतना ज़रूर पड़ता है|

6 दिसम्बर 1992 के दिन भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला करते हुए लाखों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था,कारसेवकों की भीड़ ने लगभग 5 घण्टे में मस्जिद को गिरा दिया था, जिसके बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुए और कई बेगुनाह मारे गए ।

बाबरी मस्जिद को गिराने वाले कारसेवकों में से कई सारों ने अपने गुनाह से तौबा करते हुए इस्लाम धर्म क़ुबूल कर लिया है, जिनमें बलबीर सिंह मोहम्मद आमिर और जोगिंदर सिंह मोहम्मद उमर के नाम काफी चर्चाओं में रहते हैं।

धर्म के नाम पर जोश और जज्बे में आकर हज़ारों नोजवानों ने बाबरी मस्जिद को गिराने में अपनी जान दांव पर लगाई थी लेकिन काम पूरा होने के बाद उनका कोई पूछने वाला नही है, एक ऐसी ही दस्तान अचल सिंह मीणा नाम के उस कारसेवक की जो 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराते हुए ऐसा जख्मी हुआ कि अब जिंदगी भर के लिए दूसरों की मदद के बिना बिस्तर तक नहीं छोड़ सकता. अयोध्या में भव्य राम मंदिर की चाह रखने वाला ये कारसेवक भोपाल के नजदीक एक गांव में 10 बाई 10 के एक छोटे से अंधेरे कमरे में रहने को मजबूर है।

कहानी शुरू होती है 3 दिसंबर 1992 से. अचल तब 30 साल के थे और भोपाल से पुष्पक एक्सप्रेस में बैठकर लखनऊ और फिर वहां से फैजाबाद पहुंचे थे. 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस के दौरान गुंबद के एक हिस्से का मलबा अचल की पीठ पर गिरा और कमर के नीचे का पूरा हिस्सा काम करना बंद हो गया. अब अचल 56 साल के हैं. पूछने पर बताते हैं कि ‘6 दिसंबर को हम लोग गुंबद पर चढ़े और जब गुंबद गिरी तो मैं भी उसके साथ गिर गया. मेरे सिर और हाथ-पैर में चोट लगी और कमर चली गई. मुझे पहले फैजाबाद में भर्ती करवाया और उसके बाद गांधी मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले गए जहां मुझे होश आया. तब से मैं चल नहीं सकता, घर में ही पड़ा रहता हूं इसी तरह’।

अचल बताते हैं कि 1992 के बाद से कई नेता भोपाल आए लेकिन किसी ने भी उसकी खैर खबर नहीं ली. अचल अपने सिर पर लगी चोट दिखाते हैं और दिन के हर पहर इसी तरह जमीन पर पड़े रहते हैं. अचल ये बताते हुए खुद की भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और फूटफूट कर रोए. रोते हुए अचलने कहा कि ‘भगवान बताते हैं कि जिसे जितना दुख मिलता है उसको भगवान ही सहयोग करता है ये बात सत्य है. कोई नेता ये नहीं बोल सकता कि एक गिलास पानी भी पिलाया हो लेकिन मैं जिस राम के नाम से गया उस पर विश्वास है कि वो पूरा करेगा’।