नरभक्षक : आतंकी सोच ने मारा है, आगे का काम पुलिस का था

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Suraj Kumar Bauddh
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नरभक्षक !

वह बाजार निकला था
मीट खरीदने के खातिर
वह बाजार निकला था
गाय बेचने के खातिर
पर घात लगाए बैठे नरभक्षक
उस पर टूट पड़े हथियारबद्ध।

बेशक भीड़ बेनाम होती है,
बेशक भीड़ बेशक्ल होती है।
पर भीड़ इतनी क्रूर नहीं होती।
हिंसक निर्दयी बर्बर नहीं होती।
वह भीड़ को भड़काते रहे,
धर्म हां धर्म खतरे में है।
इसी शोरगुल के बीच
डरे हुए आंखों से भयभीत
वह जीवन की भीख मांगता रहा।
पर वह अब भीड़ में अधमरा पड़ा था
बाकी आगे का काम पुलिस का था।
अधूरा काम पुलिस ने पूरा किया।

नतीजन,
हर बार की तरह इस बार भी,
उस मजलूम को भीड़ ने नहीं
आतंकी सोच ने मारा है।
पुलिसिया रौब ने मारा है।

– सूरज कुमार बौद्ध,
(रचनाकार भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)