नीदरलैंड में पैग़म्बरे इस्लाम के अपमानजनक कार्टूनों की प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा

Posted by

नीदरलैंड के दक्षिण पंथी इस्लाम विरोधी राजनीतिज्ञ ग्रीत विल्डर्स ने एक बार फिर अंतिम ईश्वरीय दूत पैग़म्बरे इस्लाम के अपमानजनक कार्टून बनाने की विवादित प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा की है।

नीदरलैंड की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी फ़्रीडम पार्टी के विवादित नेता विल्डर्स ने मंगलवार को ट्वीट करके इस प्रतियोगिता की ख़बर दी।

विल्डर्स का कहना था कि नीदरलैंड की आतंकवाद निरोधक एजेंसी एनसीटीवी ने उन्हें संसद में उनके कार्यालय में महीने के आख़िर में इस प्रतियोगिता के आयोजन के लिए अनुमति दे दी है।

फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच या अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले विल्डर्स इससे पहले भी इस तरह के कई विवादित क़दम उठा चुके हैं।

विवादित डच नेता ने एक बार कहा था कि नीदरलैंड में क़ुरान पर प्रतिबंध लगना चाहिए और इस्लाम एक अधिनायकवादी धर्म है।

उन्होंने ऐसे कई कार्यक्रमों में भी भाग लिया है, जिसमें इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स) का मज़ाक़ उड़ाया गया और अपमान किया गया। आम तौर पर ऐसे कार्यक्रमों पर अभिव्यक्ति की आज़ादी का लेबल चिपका दिया जाता है।

इस्लाम विरोधी विचारों के लिए अपनी पहचान बनाने वाले विल्डर्स ने 2008 में इस्लाम को हिंसक धर्म बताने वाली विवादित फ़िल्म को इंटरनेट के ज़रिए रिलीज़ किया था।

2015 में उन्होंने अमरीका के टेक्सास में एक इस्लाम विरोधी रूढ़िवादी संगठन द्वारा आयोजित पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के कार्टून बनाने की एक विवादित प्रतियोगिता में भाग लिया था।

डालास के गार्लैंड में कर्टिस कलवेल सेंटर के बाहर गोलीबारी की घटना भी हुई थी।

यहां ग़ौरतलब बात यह है कि पश्चिमी देश जो अभिव्यक्ति की आज़ादी का नारा लगाते हैं, वह इस्लाम के संदेश के प्रसार से इतना भयभीत क्यों हैं?

पश्चिमी देशों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी हो या मानवाधिकारों का विषय, दोहरा रवैया अपना रखा है।

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर 2001 में न्यूयॉर्क की नाइन इलेवन की घटना के बाद से लगातार मुसलमानों के धार्मिक विश्वासों का अपमान किया है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स) के विवादित कार्टून पहली बार वर्ष 2005 में डेनमार्क के एक अख़बार में छपे थे। इसके बाद यूरोप के कई और पत्र-पत्रिकाओं में इस तरह के कार्टून प्रकाशित किए गए, जिसके ख़िलाफ़ दुनिया भर के मुसलमानों ने अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया।

दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो गई, लेकिन इसके बावजूद यूरोप यही खेल फिर से शुरू करना चाहता है।