नेतनयाहू के दोनों हाथ फ़िलिस्तीनियों के ख़ून में डूबे हुए हैं : रजब तैयब अर्दोग़ान

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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने कहा है कि फ़िलिस्तीन की वर्तमान स्थिति पर ओआईसी के शिखर सम्मेलन से इस्राईल को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए।

अर्दोग़ान ने मंगलवार को कहा कि शुक्रवार को ओआईसी की शिखर बैठक इस्राईल को जिसके सैनिकों ने दर्जनों फ़िलिस्तीनियों को ग़ज़्ज़ा की सीमा पर मौत के घाट उतार दिया है कड़ा संदेश देगी।

लंदन में एक पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए अर्दोगान ने कहा कि यह अपात बैठक है जो इस्तांबूल में आयोजित होगी और इसके लिए सभी 57 सदस्य देशों को निमंत्रण भेज दिया गया है।

पत्रकार सम्मेलन में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा कि फ़िलिस्तीनियों की जानें जाना बड़ी दुखद घटना है और इस हिंसा से शांति के प्रयासों को धचका पहुंचेगा।

तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेततयाहू की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस्राईल की सरकार एक नस्ल परस्त सरकार है और नेतनयाहू के दोनों हाथ फ़िलिस्तीनियों के ख़ून में डूबे हुए हैं।

इसी तरह अर्दोगान ने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा कि नेतनयाहू एक नस्ल परस्त सरकार के प्रधानमंत्री हैं जिसने साठ साल से फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की धरती पर क़ब्ज़ा कर रखा है, जो संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों का उल्लंघन करती आ रही है।
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इस्राईली दरिंदगी की सारी दुनिया में निंदा
ग़ज़्ज़ा में इस्राईली सेना की दरिंदगी का निशाना बनकर 60 से अधिक फ़िलिस्तीनियों की शहादत के बाद मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र संघ में फ़िलिस्तीन और इस्राईल के राजदूतों के बीच जमकर नोक झोंक हुई।

फ़िलिस्तीन के राजदूत ने कहा कि इस्राईन ने मानवता के ख़िलाफ़ अपराध किया है और इस्राईली राजदूत ने बड़ी बेशर्मी के साथ यह जवाब दिया कि हमास ने अपने लोगों को क़ैद कर रखा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की अपात बैठक में परिषद की पोलिश अध्यक्षा ज्वाना रोनीका ने ग़ज़्ज़ा में इस्राईली सैनिकों के हाथों फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार पर एक मिनट का मौन धारण करने की अपील की। बैठक में कई देशों ने ग़ज़्ज़ा वासियों पर इस्राईल के हिंसक हमलों पर अपनी चिंता जताई और इसकी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

फ़िलिस्तीन के राजदूत रियाज़ मंसूर ने इस्राईल के हाथों हस घृणात्मक नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने इस्राईल की सैनिक कार्यवाहियों पर तुरंत अंकुश लगाने और मामले की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की। रियाज़ मंसूर ने संयुक्त राष्ट्र संघ को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र संघ ने इससे पहले होने वाली हत्याओं की कोई जांच नहीं करवाई। फ़िलिस्तीनी राजदूत ने बड़े दर्द भरे स्वर में कहा कि कितने फ़िलिस्तीनियों के मारे जाने के बाद आप कुछ करेंगे? क्या मौत उनका नसीब थी? क्या उन बच्चों कों उनके माता पिता से छीन लिया जाना सही था?

इस्राईली राजदूत डैनी डेनन ने फ़िलिस्तीनियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर बड़ी निर्लज्जता के साथ हिंसक प्रदर्शन होने का आरोप लगाया।

जर्मनी, ब्रिटेन, आयरलैंड और बेल्जियम ने भी ग़ज़्जा की घटनाओं पर गहरा दुख जताते हुए स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की।

फ़िलिस्तीनी धरती पर ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़ा करके इस्राईल की स्थापना के दिन को फ़िलिस्तीन की जनता नकबह दिवस या दुर्भाग्य के दिन के रूप में मनाती है जबकि इस बार 70 साल पूरे होने के अवसर पर अमरीका ने अपना दूतावास तेल अबीब से बैतुल मुक़द्दस स्थानान्नरित किया। इन घटनाओं के कारण फ़िलिस्तीनियों में गहरा आक्रोश है।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रीका मोग्रीनी ने एक बयान में कहा कि ग़ज़्जा की बाड़ के क़रीब जारी प्रदर्शनों में दर्जनों फ़िलिस्तीनी जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, इस्राईली फ़ायरिंग में मारे जा चुके हैं, हम और जिंदगियां जाने से रोकने के लिए सबसे संयम बरतने की अपील करते हैं।

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकक्रां ने भी इस्राईली सेना की बर्बरता की निंदा की।

संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार संस्था के प्रमुख ज़ैद रअद अलहुसैन ने इस्राईली हमले की कड़ी आलोचना की।