नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के तौर पर नहीं मनाया जाना चाहिए : बीजेपी सांसद

Posted by

जब से भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में आयी है शायद ही कोई दिन ऐसा हो कि बीजेपी, आरएसएस या इनके अन्य सगठनों के लोग कोई न कोई विवाद या विवादित बयान ने देते हों, सत्ता प्राप्ति के बाद से ही आरएसएस और बीजेपीविपक्षी पार्टियों, दलित, अल्पसंखयकों को लेकर ओछी राजनीती करती आ रही है

दिल्ली वेस्ट से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने 14 नवंबर को मनाए जाने वाले बाल दिवस पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन(14 नवंबर) को बाल दिवस के तौर पर नहीं मनाया जाना चाहिए।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि बाल दिवस 26 दिसंबर को मनाया जाना चाहिए क्योंकि इस दिन गुरू गोबिंद सिंह के चार बेटों की मुगलों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इन बेटों की शहादत बच्चोंं को प्रेरित करेगी।प्रवेश ने यह भी कहा कि उन्होंने एक ज्ञापन में 60 सांसदों से समर्थन प्राप्त कर लिया है और इसे वह पीएम मोदी को सौंपेंगे।

ज्ञापन में यह भी लिखा है कि 14 नवंबर को चाचा दिवस के तौर पर मनाया जा सकता है।आपको बता दें कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर को हुआ था। उन्हें बच्चों से बहुत लगाव और प्रेम था। इसलिए उन्हें जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

========

Tejaswi yadav

@YadavTejaswi

जिसकी ख़ुद की हस्ती अकेले दम पर सरकार बनाने की नहीं। जो ख़ुद दूसरों की ग़लतियों से बार-बार मुख्यमंत्री बनता हो वह दूसरों को क्या बनायेगा और क्या ग़लती करेगा?

अपनी बेचारगी और लाचारगी छिपाने के लिए क्या-क्या नहीं बोलना पड़ता, किस-किसकी आड़ नहीं लेनी पड़ती!

इंडीड, हाउ पुअर?

Translate from Hindi
3 replies 10 retweets 29 likes
Reply 3 Retweet 10 Liked 29 Direct message

kiran patnaik

@kiran_patniak
चश्मदीद गवाह हैं, पर दो मुस्लिमों को फाँसी देने वाले गौरक्षकों को बचा रही है झारखंड पुलिस!!~ सांप्रदायिक-जातिवादी हत्यारों की ही रक्षक है आरएसएस की सरकार!!

Arvind Kejriwal 🇮🇳

@JantaKaArvind
पॉवर तुम्हारी और सरकार की जिम्मेदारी

हमे भी शीला सरकार जैसी पॉवर मिलनी चाहिए

एलजी और उनके अधिकारी चुनी हुई सरकार के कामकाज को ठप कर देना चाहते है
जिस तरह से दिल्ली सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है , उसी तरह से एलजी को भी जनता के प्रति जवाबदेह बनना होगा : @ArvindKejriwal

Pankhuri Pathak

Verified account

@pankhuripathak
भाषा की मर्यादा की उम्मीद तो गोडसे के अनुयायियों से हमें थी नहीं .. लेकिन ऐसी टिप्पणी इनका डर और बौखलाहट दिखाती है ।
अभी तो इनकी भाषा और गिरेगी । और जितना ये गिरेंगे, जनता उतना इन्हें आने वाले चुनाव में गिराएगी ।2019 में जवाब फिर भी अच्छे दिन, रोज़गार, विकास पर ही देना पड़ेगा…