पहलू ख़ान के हत्यारे को पुलिस नहीं ढूंढ़ पायी, रवीश की टीम ने उसे खोजकर स्टिंग अॉपरेशन कर दिया..ज़रूर देखें ये रिपोर्ट

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Muhammad Shaheen
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सबसे पहले NDTV की कल रात प्राइम टाइम की यह रिपोर्ट देखिये फिर इस तहरीर को पढिये और ज़रूरत समझें तो 18 जून के बाद हमारी टाइमलाइन देख लीजिए कि किस तरह इस मामले के एक एक पहलू को आपके सामने आइने की तरह साफ करके पेश करता आ रहा हूं। इस स्टिंग में मुल्ज़िमो का साफ इकरार है कि मौका ए वारदात पर न सिर्फ वो मौजूद थे बल्कि हत्यारी भीड़ को लीड भी कर रहे थे। जबकि इन्टरनेशनल क्रांतिवीर नदीम खान का पहले ही दिन से यही कहना है कि जो मुल्ज़िम पकड़े गये हैं वो बेगुनाह हैं पुलिस असली गुनहगारों को नहीं पकड़ रही, क्रांतिवीर ने विक्टिम परिवारों से इसी तरह के बयानात के हलफनामे बनवाकर पुलिस और कोर्ट में भेजे हैं यह बात खुद क्रांतिवीर भी तसलीम कर चुका है, इन्हीं हलफनामों को बुनियाद बनाकर पकड़े गए मुल्ज़िम ज़मानत हासिल करते जा रहे हैं, इतना ही नहीं विक्टिम की तरफ से पहले अपोज़ किये गये लोअर कोर्ट वकील अकबर बेग को भी पहली ज़मानत सुनवाई पर गैर हाज़िर रहने की हिदायत विक्टिम की मारफत क्रांतिवीर दे चुका था लिहाज़ा मुल्ज़िम को ज़मानत मिलने में कोई दुशवारी नहीं हुई।

आप हज़रात पिछली कई तहरीरों में जान चुके हैं कि इन्टरनेशनल क्रांतिवीर नदीम खान ने किस तरह सही ट्रैक पर चलते हुए केस में टांग फंसाई और विक्टिम परिवारों में से एक परिवार को जमाते इस्लामी कनेक्शन के ज़रिए तोड़ने में कामयाब हुआ, दूसरा विक्टिम परिवार जो कि असल विक्टिम है टेक्निकल प्रॉब्लम की वजह से फिलहाल इनके साथ चलने के लिए मजबूर है क्योंकि रिपोर्ट उसकी तरफ से दर्ज नहीं हुई थी। क्रांतिवीर अपने हर एक्शन का ठीकरा विक्टिम परिवार के सर फोड़ दे रहा है ताकि मुस्तकबिल में होने वाले किसी फेलियोर की ज़िम्मेदारी से खुद को बचा सके, जबकि हक़ीकत ये है कि इसके झांसे में आया हुआ एक विक्टिम परिवार हर काम क्रांतिवीर के मशवरे पर ही अंजाम दे रहा है।

क्रांतिवीर ने हापुड़ लोअर कोर्ट में अच्छे खासे चल रहे मुकदमे को बीच मझधार में छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में अरज़ी लगाने का प्लान बनाया हुआ है और यह प्लान डेढ़ महीने पहले तब शुरू हुआ जब जमीअत ने मामले को अपने अंडर लेकर चार बड़े वकीलों का पैनल बनाया और केस का पूरा खर्च उठाने का ज़िम्मेदारी ली, क्रांतिवीर जमीअत की कारकर्दगी को बर्दाश्त न कर सका और अन्दर खाने खूफिया प्लान पर काम करता रहा, इस खूफिया प्लान को उस दिन मंज़रेआम किया गया जब दिल्ली में क्रांतिवीर की वकील वृंदा ग्रोवर ने प्रैस कांफ्रैंस की और बताया कि ये लोग सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर जाने वाले हैं। याद रहे इस प्रैस कांफ्रैंस के पहले पिलखुआ के किसी लोकल एक्टिविस्ट को एतमाद में नहीं लिया गया था, ना ही लोअर कोर्ट में केस देख रहे वकीलों को कोई जानकारी दी गई, सबसे बढ़कर ये कि दूसरे विक्टिम परिवार कासिम के भाइयों को भी इस प्रैस कांफ्रैंस में नहीं बुलाया गया था। क्रांतिवीर के एक चेले की पोस्ट पर जब हमने क्रांतिवीर की कापी पेस्ट तहरीर पर एतराज़ात की झड़ी लगाई तब जाकर दूसरे विक्टिम परिवार को इस कार्रवाई में शामिल करके दिल्ली बुलाया जाने लगा।

अगर मान भी लिया जाए कि पकड़े गए मुल्ज़िमो के अलावा भी और मुल्ज़िम हैं तो उनके नाम इन्वेस्टिगेशन में बढ़वाये जो सकते थे क्योंकि FIR में 30 नामालूम मुल्ज़िमो का तज़किरा है जिनमें दस बारह लोग बाद में नामज़द किये गये थे। पकड़े गए मुल्ज़िमो को बेगुनाह बताकर हलफनामे लगवाने की क्या तुक थी.? सिर्फ इसी बेहूदा बुनियाद पर केस को लोअर कोर्ट में बरबाद करके सुप्रीम कोर्ट में अरज़ी लगाना कौनसी अक्लमंदी हुई..?

इस तमाम बेहूदगियों को लेकर क्रांतिवीर सुप्रीम कोर्ट जाने वाला है डेढ महीना हो गया लेकिन अभी तक क्रांतिवीर एंड कंपनी की फाइल ही तैयार नहीं है फाइल के सुप्रीम कोर्ट पंहुचने के बाद भी दस पन्द्रह दिन और लगेंगे, दस पन्द्रह दिन बाद सुप्रीम कोर्ट अगर मुनासिब समझोगी तो एक्सैप्ट कर लेगी वरना खारिज भी कर सकती है। अगर एक्सैप्ट कर भी ली तो उम्मीद है केस वापस फिर से हापुड़ लोअर कोर्ट भेज दिया जाएगा। यहां फिर से वही कोर्ट सामने होगी जहां पर क्रांतिवीर की क्रांति की बदौलत पिछली FIR और बयानात से मुकरा जा चुका है। यहां दूसरी पार्टी के वकील इनके दलायल की इसी बुनियाद पर धज्जियां उड़ा कर रख देंगे कि इनके पहले बयानात को सच्चा माना जाए या अब नयी स्टोरी को सच्चा माना जाए। कुल मिलाकर यह केस पूरी तरह बरबाद हो चुका है और इस बरबादी का वाहिद ज़िम्मेदार क्रांतिवीर है।

सबसे बड़ी हैरानी मुझे सोशल मीडिया की मेन स्ट्रीम के रवैये पर हो रही है। सारी बातें जानने के बावजूद कोई इस क्रांतिवीर से सवाल करने को तैयार नहीं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। मेन स्ट्रीम के बहुत से बड़े बड़े क्रांतिकारी जो दिन रात ज़मीनी लड़ाई की दुहाई देते नहीं थकते, इत्तेहाद नामी घंटे को बजाना नहीं भूलते वो भी इस मैटर पर गूंगी का गुड़ खाकर बैठे हुए हैं।