पुराने दर्द के कारण कहीं आप मानसिक दुर्बलता के शिकार तो नहीं??

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प्रत्येक मनुष्य को जीवन में कभी न कभी बुरी से लेकर बहुत बुरी परिस्थियों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग मानसिक रूप से इतने सक्षम होते हैं कि इनसे सरलता से निपट लेते हैं। पर कुछ लोग परिस्थियों को स्वीकार करके सहज नहीं रह पाते। डर, चिंता, तनाव, अवसाद उन पर भारी पड़ जाते हैं।जब हमारे मस्तिष्क को यह लगने लगता है कि कोई भावना इतनी तीव्र है कि आप उसे सह नहीं पाएँगे, तो मस्तिष्क डिफेंस मेकेनिज़्म ऑन कर देता है। इसे विस्तार से समझते हैं। अक़्सर मसाज थेरैपी देने वालों के सामने एक बात होती है कि वे दुःखती हुई मसल्स की मालिश करते हैं और रोगी फफककर रोने लगता है।उसकी आँखों में आंसू आ जाते हैं।वह पुराने समय में चला जाता है। ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे वजह है हमारी भावनाओं का फिज़िकल कंपोनेंट ( भौतिक पहलू)। अर्थात जब हमारे सामने कोई नकारात्मक घटना घटती है तो हमारी मसल्स उसके भावनात्मक संवेगों को स्टोर कर लेती हैं और वह वहाँ पर तब तक स्टोर्ड रहती है जब तक कि हम उसे प्रवाहित न कर दें या उससे मुक्ति न पा लें। हमारा मस्तिष्क उन भावनाओं को मसल्स में लॉक कर देता है और मसल्स का वह हिस्सा टाइट हो जाता है। बहुत समय तक मसल्स का टाइट रहना लम्बे समय तक बने रहने वाले दर्द का सबब बन जाता है और हम दर्द की समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। यही वजह है कि जब मसाज थेरेपिस्ट उन भावनाओं को समेटे हुए पॉइंट्स पर मसाज करता है तो हमारी भावनाएं फिर से ताज़ी हो जाती है और हम रोने या सिसकने लगते हैं।

एक पहलू यह भी है कि जब हम पर कोई बहुत ज्यादा नकारात्मक विचारों की बारिश होती है तो हमारा मस्तिष्क उनसे हमारा ध्यान हटाने के लिए एक विशेष भाग की मसल्स, जॉइंट्स और नर्व के ब्लड सर्कुलेशन को धीमा कर देता है और जिससे वह स्थान सख्त होकर दर्द करने लगता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के डॉ जॉन सरनो इसे टेंशन मायोसाईटिस सिंड्रोम ( TMS) कहते हैं। ऐसा करने से हमारे शरीर में दर्द होने लगता है और हम उन नकारात्मक बातों पर कम ध्यान दे पाते हैं। यह शरीर का हमारी सुरक्षा करने का निराला अंदाज़ है।

यदि आपको बिना किसी चोट के ही किसी खास मसल्स में दर्द है तो आप शांति से बैठकर अपने मस्तिष्क को समझाएं कि अब आप सक्षम है किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इसलिए अब वह दबी हुई भावना मस्तिष्क निकाल दे या प्रवाहित करदे। ऐसा कह कर आप 15 मिनट ध्यान में बैठ जाएं। आप पाएंगे कि आपके दर्द और जकड़न में चमत्कारिक रूप से कमी आ रही है… और कुछ दिन के अभ्यास से आप उस दर्द और जकड़न से हमेशा के लिए मुक्ति पा लेंगे।…तो खोल दीजिये अपने दर्द की गांठ…हाँ, अभी।

~डॉ अबरार मुल्तानी Abrar Multani
लेखक सोचिये और स्वस्थ रहिये (बेस्ट सेलर)