पूर्व हाईकोर्ट जज और हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर सदाशिव कोकजे VHP के नए अध्यक्ष बने हैं!

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Parvez Iqbal
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पूर्व हाईकोर्ट जज और हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर सदाशिव कोकजे विश्व हिंदू परिषद के नए अध्यक्ष बन गए हैं…इतने महत्वपूर्ण और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का यूँ किसी साम्प्रदायिक संघठन का मुखिया चुना जाना अपने आप मे कई सवाल पैदा करता है…देश मे साम्प्रदायिकता के लिए ज़िम्मेदार समझी जाने वाली विचारधारा से जुड़े किसी व्यक्ति ने न्यायधीश या संवैधानिक पद पर बैठ कर विचारधारा से प्रेरित होकर फैसले नहीं किये होंगे इसकी क्या ग्यारंटी है ? होना तो ये चाहिए कि संवैधानिक या खास तौर पर न्यायधीश जैसे पद के लिए पद छोड़ने के बाद भी किसी भी संघठन या राजनैतिक दल से जुड़ना प्रतिबंधित होना चाहिए वरना वो व्यक्ति अपने राजनैतिक भविष्य के लिए किसी राजनैतिक पार्टी या संघठन की विचारधारा से प्रभावित होकर जो फैसले करेगा जुसमे पूर्वाग्रह के समावेश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विदित रहे कि कोकजे 1990 में म.प्र. हाईकोर्ट और 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट के जज रहे, 2003 से 2008 तक कोकजे हिमाचल प्रदेश के गवर्नर भी रह चुके हैं । कोकजे RSS से जुड़ी संस्था भारत विकास परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं।
सम्पादक
साप्ताहिक ‘इंडिया-Now’
राष्ट्रीय मासिक ‘जनमत

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Atul K Mehta
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बाबासाहब अपने अन्तिम दिनोँ मेँ अकेले रोते हुऐ पाये गये। जब वे सोने कोशिश करते थे, तो उन्हें नीँद नहीँ आती थी।अत्यधिक परेशान रहते थे। परेशान होकर ऊनके स्टेनो नानकचंद रत्तु ने बाबासाहब से सवाल पुछा कि, आप ईतना परेशान क्योँ रहते है? ऊनका जवाब था, “नानकचंद, ये जो तुम दिल्ली देख रहो हो; ईस अकेली दिल्ली मेँ 10,000 कर्मचारी, अधिकारी यह केवल अनुसूचित जाति के है; जो कुछ साल पहले शून्य थे। मैँने अपनी जिन्दगी का सब कुछ दांव पर लगा दिया, अपने लोगोँ मेँ पढे लिखे लोग पैदा करने के लिए।क्योँकि, मैँ समझता था कि, मैँ अकेल पढकर ईतना काम कर सकता हुँ, अगर हमारे हजारो लोग पढ लिख जायेगेँ, तो ईस समाज मेँ कितना बङा परिवर्तन आयेगा। मगर नानकचंद, मैँ जब पुरे देश की तरफ निगाह डालता हुँ, तो मुझे कोई ऐसा नौजवान नजर नहीँ आता है, जो मेरे कारवाँ को आगे ले जा सके। नानकचंद, मेरा शरीर मेरा साथ नहीँ दे रहा हैँ। जब मैँ मेरे मिशन के बारे मेँ सोचता हुँ, तो मेरा सीना दर्द से फटने लगता है।