पढ़िये…बहुत ही दिलचस्प कहानी : सेहतमंद कुत्ते की ख़िदमत

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Sikander Khanjada Khan
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एक हाजी साहब की गारमेंट्स की फैक्ट्री थी , हाजी साहब सुबह सुबह फैक्ट्री चले जाते और देर रात तक काम करते थे.
एक दिन वो फैक्ट्री पहुंचे तो उन्होंने ने देखा एक दरमियांने कद का कुत्ता घिसट घिसट इनके गोदाम में दाखिल हो रहा है, हाजी साहब ने गौर किया तो पता चला कुत्ता शायद जख्मी है, शायद वो किसी गाड़ी के नीचे आ गया था जिसकी वजह से इसकी तीन टांगे टूट गयी थी और वह सिर्फ एक टांग के ज़रिये अपने जिस्म को घसीट कर इनके गोदाम तक पहुचना था, हाजी साहब को उसपर बड़ा रहम आया, उन्होंने सोचा कुत्ते को किसी जानवरो के डॉ के पास ले जाते है, और इसका इलाज करते है और जब कुत्ता ठीक हो जायेगा तो इसे गली में छोड़ देंगे, हाजी साहब ने डॉ से राब्ता के लिए फोन उठाया लेकिन नंबर मिलाने से पहले इनके दिल में एक अनोखा ख्याल आया और हाजी साहब ने फोन वापिस रख दिया , हाजी साहब ने सोचा कुत्ता शदीद जख्मी है,उसकी तीन टांगे टूट चुकी है , इसका जबड़ा जख्मी है और पेट पर भी चोट का निशान है चुनांचा कुत्ता रोटी रोज़ी का बंदोबस्त नहीं कर सकता, हाजी साहब ने सोचा अब देखना यह है क़ुदरत इस कुत्ते की खुराक का बंदोबस्त कैसे करती है ? हाजी साहब ने मुशाहदे का फैसला किया और चुप चाप बैठ गए । वो कुत्ता सारा दिन गोदाम में बेहोश पड़ा रहा, शाम को जब अंधेरा फैलने लगा तो हाजी साहब ने देखा इनकी फैक्ट्री के गेट के नीचे से एक दूसरा कुत्ता दाखिल हुआ, कुत्ते के मुंह में एक लंबी सी बोटी थी, कुत्ता छिपता छुपाता गोदाम तक पहुंचा, ज़ख़्मी कुत्ते के क़रीब आया, उसने पाओ से उस कुत्ते को जगाया और बोटी उसके मुंह में दे दी,ज़ख़्मी कुत्ते का जबड़ा हरकत नहीं कर पा रहा था चुनांचा जिसने बोटी वापिस उगल दी, सेहतमंद कुत्ते ने बोटी उठाकर अपने मुंह में डाली, बोटी चबाई, जब वो अच्छी तरह नरम हो गयी तो इसने बोटी का लुकमा सा बनाकर ज़ख़्मी कुत्ते के मुंह में दे दिया, ज़ख़्मी कुत्ता बोटी निगल गया, इसके बाद वो कुत्ता गोदाम से बाहर आया,इसने पानी के हौज़ में अपनी दूम गीली की, वापिस गया और दूम ज़ख़्मी कुत्ते के मुंह में दे दी, ज़ख़्मी कुत्ते ने दूम चूस ली। सेहतमंद कुत्ता ऐसा करने के बाद इतमीनान से वापिस चला गया । हाजी साहब मुस्कुरा पड़े । इसके बाद यह खेल रोज़ाना होने लावा। रोज़ कुत्ता आता ज़ख़्मी कुत्ते को बोटी खिलाता,पानी पिलाता और चला जाता । हाजी साहब कई दिनों तक यह खेल देखते रहे ।
एक दिन हाजी साहब ने अपने आप से पुछा” वो क़ुदरत जो इस ज़ख़्मी कुत्ते को रिज़्क़ फ़राहम कर रही है क्या मुझे दो वक़्त की रोटी नहीं देगी ? “सवाल बहुत दिलचस्प था , हाजी साहब रात तक इस सवाल का जवाब तलाश करते रहे यहाँ तक के वह तवक्कल की हकीक़त भाँप गये । उन्होंने फैक्ट्री अपने भाई के हवाले की और दुनिया को तर्क दिया । वह महीने में 30 दिन रोज़े रखते और सुबह सादिक़ से अगली सुबह काज़िब तक रुकू व सुजूद करते ,वो बरसो अल्लाह के दरबार में खड़े रहे,इस अरसे में अल्लाह उन्हें रिज़्क़ भी देता रहा और इनकी दुआओ को कुबूलियत भी । यहाँ तक के वह सूफी बाबा के नाम से मशहूर हो गये और लोग इनके पाओं की ख़ाक का तावीज़ बनाकर गले में डालने लगे लेकिन फिर एक दूसरा वाकिया पेश आया और सूफी बाबा वापिस हाजी साहब हो गये ।
सूफी बाबा की बैठक में दर्ज़नो अकीदतमंद बैठे थे ,सूफी बाबा इनके साथ रूहानियत के उन्वान पे बात चीत कर रहे थे । बातो ही बातों में सूफी बाबा ने कुत्ते का किस्सा छेड दिया और इस किस्से के आखिर में हाज़रीन को बताया “रिज़्क़ हमेशा इंसान का पीछा करता है लेकिन हम बेवक़ूफ़ इंसानो ने रिज़्क़ का पीछा शुरू कर दिया । अगर इंसान की तवक्कल ज़िंदा होतो रिज़्क़ इंसान तक ज़रूर पहुचता है बिलकुल उस कुत्ते की तरह जो ज़ख़्मी हुआ तो दूसरा कुत्ता इसके हिस्से का रिज़्क़ ले कर इसके पास आ गया । मेने इस ज़ख़्मी कुत्ते से तावक़्क़ल सीखी । मेने दुनियादारी तर्क की और अल्लाह की राह में निकल आया ।आज इस राह का इनाम है में आप सबके बीच बैठा हूँ । इन तीस बरसो में कोई ऐसा दिन नहीं गुज़रा जब अल्लाह ने किसी किसी वसीले से मुझे रिज़्क़ न दिया या में किसी रात भूका सोया हु । मेे हमेशा उस ज़ख़्मी कुत्ते का शुक्रिया अदा करता रहता हूं जिसने मुझे तावक़्क़ल का सबक सिखाया था ।
सूफी बाबा की महफ़िल में एक नौजवान प्रोफेसर भी बैठा था, प्रोफेसर ने जीन्स पहन रखी थी और इनके कान में एअर फोन लगा था । प्रोफेसर ने एअर फोन उतारा और क़हक़हा लगा कर बोला ” सूफी बाबा इन दोनों कुत्तो में अफ़ज़ल ज़ख़्मी कुत्ता नहीं था बल्कि वो कुत्ता था जो रोज़ शाम को ज़ख़्मी कुत्ते को बोटी चबाकर खिलाता था और अपनी गीली दूम से इसकी पियास बुझाता था । काश आपने ज़ख्मो कुत्ते के तावक़्क़ल की बजाये सेहतमंद कुत्ते की खिदमत, क़ुरबानी और ईसार पर तावज़्ज़ह दी होती तो आज आपके फैक्ट्री पाँच, छे सो लागो का चूल्हा जला रही होती ।” सूफी बाबा को पसीना आ गया नौजवान प्रोफेसर बोला ” सूफी बाबा ऊपर वाला हाथ नीचे वाले हाथ से अफ़ज़ल होता है, वो सेहतमंद कुत्ता ऊपर वाला हाथ था जबके ज़ख़्मी कुत्ता नीचे वाला । अफ़सोस आपने नीचे वाला हाथ तो देख लिया लेकिन आपको ऊपर वाला हाथ नज़र न आया । मेरा ख्याल है आपका यह सारा तसव्वुफ़ और सारा तावक़्क़ल खुदगर्ज़ी पर मबनी है कियुंकी एक सखी बिजनेसमैन दस हज़ार निकम्मे और बे हुनर दरवेशों से बेहतर होता है ”
नौजवान उठा इसने सलाम किया और बैठक से निकल गया । हाजी साहब ने 2 नफिल पढ़ी,बैठक को ताला लगाया और फैक्ट्री खोल ली, अब वह इबादत भी करते है और कारोबार भी ।।

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