फ़ार्स खाड़ी के ईरानी द्वीप – पार्ट 3

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फ़ार्स की खाड़ी में स्थित सुन्दर ईरानी द्वीपों में से एक का नाम क़िश्म है।

क़िश्म शांत व सुन्दर द्वीप है जिसके सुन्दर तट तथा उसकी नर्म और साफ़ रेत पर घंटों नंगे पैर चला जा सकता है और इससे वास्तविक शांति प्राप्त होती है। यही प्राकृतिक सुन्दरता और अंछूते माहौल ने क़िश्म को यात्रा करने, घूमने फिरने और जीवन व्यतीत करने के सबसे अच्छे क्षेत्र में बदल दिया है। आइये मिलकर क़िश्म की एक सैर करते हैं।

क़िश्म द्वीप 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैला हुआ है जो फ़ार्स की खाड़ी के दूसरे सबसे बड़े द्वीप बहरैन से लगभग ढाई गुना बड़ा है। क़िश्म द्वीप हुर्मुज़ जलडमरु मध्य की लंबाई में स्थित है। आपके लिए यह जानना रोचक होगा कि हुर्मुज़ जलडमरु मध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में है इसकी चौड़ाई 55 किलोमीटर है। यह जलडमरु मध्य फ़ार्सी की खाड़ी के तटवर्ती इलाक़ों में दक्षिणी ईरान के 900 किलोमीटर मार्ग को ओमान सागर के माध्यम से विश्व के स्वतंत्र जलक्षेत्र से जोड़ता है। क़िश्म द्वीप लगभग 120 किलोमीटर लंबा है और इसकी चौड़ाई 10 से 35 किलोमीटर तक है अर्थात इसकी सबसे कम चौड़ाई 10 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई 35 किलोमीटर है। इस द्वीप में कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां और घिसे-पिटे टीले हैं। क़िश्म में सबसे ऊंची पहाड़ी 350 मीटर है। इस द्वीप का मौसम आर्द्र रहता है और कुछ महीनों में आर्द्रता बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

सासानियों के काल में इस द्वीप का नाम अब्र कावान था। क़िश्म शहर, हुर्मुज़गान प्रांत का भाग है। क़िश्म का इतिहास, इस्लाम से पहले की ओर पलटता है और क़िश्म के नाम, किश्म, कीश, तुंबे और सीरी है और यह इस क्षेत्र में ईसा मसीह से पहले की शताब्दियों में एलामी शासन श्रंखला के जीवन का चिन्ह है। बूशहर, ख़ारक और क़िश्म सहित फ़ार्स की खाड़ी के तट पर एलामी सभ्यता के बहुत से चिन्ह तथा क़िश्म में ज़रतुश्तियों के अग्निकुंड के अवशेषों से पता चलता है कि अतीत में भी इस द्वीप में इस धर्म के अनुयायी जीवन व्यतीत किया करते थे।

क़िश्म द्वीप के लोगों की भाषा ईरान के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्रों और बंदरगाहों पर रहने वालों की भांति फ़ारसी है जो इस द्वीप की यात्रा करने वालों को समझ में आती है। क़िश्म द्वीप के नगरों और गावों के निवासियों का लेहजा एक है केवल अंतर यह है कि क़िश्म के शहरों और दरगहान के निवासी बंदर अब्बास, लंगे बंदरगाह सहित अन्य बंदरगाह के लोगों से मिलने-जुलने एवं उनके साथ लेन-देन के कारण बंदरगाही लहजे में बात करते हैं जबकि क़िश्म के सुदूर गावों के निवासी फ़ार्सी खाड़ी के देशों और भारत की यात्रा करने के कारण हिन्दी और अरबी भाषा परिचित हैं या इन भाषाओं के शब्द उनकी बोली में शामिल हो गए हैं कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि क़िश्म की स्थानीय भाषा फ़ारसी, हिन्दी, अरबी और अंग्रेज़ी भाषा का मिश्रण है किन्तु लहजा बंदरगाही है।

यह द्वीप उत्तर से बंदर अब्बास शहर से, पूर्वोत्तर से हुर्मुज़ द्वीप से, पूरब से लार्क द्वीप से दक्षिणी से हंगाम और दक्षिण पश्चिम से तुंबे कूचिक, बुज़ुर्ग और अबू मूसा से मिलता है। क़िश्म द्वीप से बंदर अब्बास तक की 20 किलोमीटर है। रणनैतिक दृष्टि के अलावा व्यापारिक दृष्टि से भी इस द्वीप का बहुत महत्व रहा है। बताया जाता है कि दियालमा और आले बूए शासन काल में इस द्वीप से चीन, भारत और अफ़्रीक़ा के तटों पर व्यापारिक नौकाएं आती जाती रही हैं।

क़िश्म द्वीप में बहुत से पर्यटन स्थल हैं। अछूती सुदंर प्रकृति और ऐतिहासिक प्राचीन अवशेषों ने क़िश्म के भ्रमण आकर्षण में चार चांद लगा दिए हैं। पानी के विशाल जलाशन बांधों और उपासना स्थलों के अवशेष से पता चलता है कि यह द्वीप इस्लाम से पूर्व सासानी शासन काल में आबाद था और उस समय इस द्वीप में बहुत चहल-पहल रहती थी। हालिया शताब्दियों में क़िश्म द्वीप के आबाद होने का काल इस द्पीप पर पुर्तगालियों को निकालू जाने से शुरु हुआ जो इस द्वीप पर ब्रिटेन के क़ब्ज़े के बाद समाप्त हो गया।

क़िश्म आज क़िश्म द्वीप और द्वीप बंदरगाही शहर के नाम से प्रसिद्ध है जो फ़रास की खाड़ी में स्थित है। हुदूदुल आलम नामक पुस्तक के लेखक ने इस द्वीप को लाफ़्त के नाम से याद किया है। लेखक लिखते हैं कि यहां पर एक क्षेत्र है जिसे लाफ़्त कहा जाता है। क़िश्म द्वीप फ़ार्स की खाड़ी में प्राचीन काल से ही लोगों का रहना रहा है। भूमध्य सागर के वातावरण से प्रभावित होने के कारण क़िश्म द्वीप में वर्षा होती है। इसका अर्थ यह है कि बारिश का मौसम, वर्ष का सबसे ठंडा मौसम होता है और शुष्क मौसम, गर्मियों के मौसम से मिला हुआ होता है। इसके बावजूद भारतीय महाद्वीप के मौसम के प्रभाव के कारण कभी कभी अगस्त के महीने में भी हल्की फुलकी बारिश होने लगती है। क़िश्म में हवा का दबाव 1015 से 1018 मिली बार है जबकि गर्मी के मौसम में अधिक तापमान के कारण हवा का दबाव 1000 मिलीमीटर से कम हो जाता है।

कुछ समाचारो के विपरीत, कीश द्वीप से कम संभावनाओं के बावजूद क़िश्म द्वीप में अब भी पहले नंबर पर पर्यटक जाते हैं और पार्गमन आंकड़ों पर नज़र डालने से पता चलता है कि बहुत ही चुपके से एक प्रतिस्पर्धी, दूसरे स्थानों से पर्यटकों का दिल चुराने और अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहा।

क़िश्म द्वीप में 1989 में ईरान की दूसरी स्वतंत्र बंदरगाह बनी और 1990 में इस बंदरगाह ने अपना काम शुरु किया और इस प्रकार यह फ़ार्स की खाड़ी और ओमान सागर में सबसे सक्रिय व्यापारिक एवं औद्योगिक बंदरगाह में गिनी जाने लगी। इस बंदरगाह के शुरु होने से पड़ोसी सहित क्षेत्रीय देशों के साथ ईरान की व्यापारिक गतिविधियां विस्तृत हुयी और हालिया वर्षों में विकास संबंधी विशाल योजनाओं ने इस द्वीप की शक्ल ही बदल दी है।

स्थानीय लोगों के अलावा क़िश्म द्वीप पर बाहर से आकर बहुत से लोग बसे हैं जो व्यापार, उद्योग, खान, सरकारी और बैंक के कार्यालयों तथा क़िश्म के स्वतंत्र क्षेत्र के संगठनों और सेवा क्षेत्र के अन्य विभागों में मुख्य रूप से कार्यरत हैं।

क़िश्म की स्थानीय आबादी एक लाख से अधिक की है और यह लोग 60 बस्तियों और पांच छोटे बड़े शहरों में रहते हैं। क़िश्म की जनता मछली और झींगे के शिकार तथा खजूर, नौका निर्माण इत्यादि पर निर्भर होती है।

किश्म द्वीप में प्राकृतिक सीमित्ताओं के कारण इस द्वीप में कृषि का विकास सीमित है। कम वर्षा और पर्याप्त मात्रा में मीठे पानी की कमी के कारण कृषि बहुत सीमित स्तर पर ज़्यादातर मौसमी वर्षा के सहारे की जाती है। अलबत्ता क़िश्म द्वीप में पशुपालन की संभावना मौजूद है और पारंपरिक शैली में पशुपालन अभी भी जारी है। नौका निर्माण क़िश्म द्वीप में शताब्दियों पुराना उद्योग है जो अभी भी प्राचीन शैली में प्रचलित है। यह उद्योग ईरान के दक्षिणी द्वीपों और तटवर्ती इलाक़ों में सबसे पुराने उद्योगों में है।

क़िश्म द्वीप के सबसे पूर्वी क्षेत्र में क़िश्म शहर स्थित है। यह शहर पूरे द्वीप की तुलना में केन्द्रीयता तो नहीं रखता किन्तु इसके महत्वपूर्ण रणनीति स्थिति के कारण प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण रहा है और क़िश्म द्वीप में रहने का सबसे महत्वपूर्ण स्थान समझा जाता है। फ़्री ज़ोन क्षेत्र के व्यापारिक और आद्योगिक विकास के मुख्य स्थान के रूप में क़िश्म के चयन ने इस शहर के महत्व को बढ़ा दिया है।