फांसी से नहीं संगसार से रुकेंगे ब्लातकार के मामले : मो. तारिक़

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Mohammed Tarique
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“पाश्चात्य देश षणयन्त्र शेली से महिलाओं का शौषण !” फांसी से नहीं संगसार से रुकेंगे ब्लातकार के मामले : मो. तारिक

भोपाल/नई दिल्ली ! विश्व सहित पूरे देश को शर्मसार और झकझोर देने वाले दुष्कर्म के मामले में आज देश की शीर्ष अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए चारों दोषियों की फांसी की सजा को यथावत रखा ! सभी दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने का पीड़िता के परिजनों ने स्वागत किया है ! पीड़िता की माता ने कहा उनकी बेटी को इंसाफ मिला है ! लेकिन बेटी को खोने का मलाल हमेशा रहेगा ! गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 की रात चलती बस में पांच बालिग और एक नाबालिग ने पैरामेडिकल की छात्रा 23 वर्षीय निर्भया के साथ दुष्कर्म किया था ! जिस मामले में 6 लोगो को आरोपी बनाया गया था। इनमे पेशे से ड्रायवर रामसिंह, बस क्लीनर मुकेश सिंह, फिटनेस ट्रेनर विनय शर्मा, बिहार निवासी अक्षय ठाकुर, फल विक्रेता पवन गुप्ता और एक नाबालिग शामिल था ! जिसे तीन साल की सजा के साथ बाल सुधार गृह भेज दिया गया था ! इसमें रामसिंह ने 13 मार्च 13 को तिहाड़ जेल में ख़ुदकुशी कर ली थी ! 13 सितम्बर 2013 को फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट ने चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी ! 2014 में हाईकोर्ट ने भी सजा को बरक़रार रखा था ! जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी ! लेकिन शीर्ष अदालत ने भी आज अहम् फैसले में मौत की सजा को यथावत रख एक नजीर पेश कर दी है !
हम माननिय न्यायलायों के निर्णय व भारतिया न्याय प्रणाली का सम्मान व आदर करते हैं ! परंतु माननिया न्यायालायों को विविकाधिकार हैं कि वह अपने विधिक विविकों का प्रयौग करते हुये केन्द्र व राज्य सरकारों को निर्देशित करें कि अब आगे से ऐसी कोई घटना घटित अथवा कारित न हों उसके लिये सरकारों ने क्या यौजना बनाई हैं या माननिया न्यायालाय केन्द्र व राज्य सरकारों को सीधे निर्देशित आदेश पारित किया जाता कि खेल अकादमियों में ही नहीं शासकिय कन्या माध्यमिक शालाओ में बालिकाओं को एक विषय साहस-आत्मरक्षा का व उसके साथ नि:शुल्क बॉक्सिंग, जूडो, कराटे, वूशु, ताईकवानडों खेल प्रशिक्षण केन्द्र सहित ज़िला, संभागीय, प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सम्मिलित होने से न सिर्फ बलात्कार कि घटनायें रुकेंगीं बलकि जो भय और असुरक्षा के कारण उनका शिक्षा का स्तर पुरूष वर्ग के अपितु आधा भी नहीं रहता अब वह कुछ और आगे बढ़ जायेंगी कुछ बहुत कुछ पढ़ जायेंगी !
तो यह भी माननीय न्यायालय संस्कृति सभ्यता के विरुद्ध नग्न वेशभूषा, पोर्न मूवी, विवाह पूर्व सार्वजनिक स्थल पर प्रेम विलाप, लिव इन रिलेशनशिप ?
विचारनीय आग्रह है की जहां केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना क्रियावंटित है परंतु उनकी सुरक्षा के लिए ? ज्ञात रहे हमारी सामाजिक संगठन जो विश्व शांति और मानव अधिकार पर गठित संस्था ने मध्यप्रदेश शासन को एक ज्ञापन पत्र सौंप कर मांग की है कि यह कड़वा सच ही नहीं हकीकत है ! देश प्रदेश में मुख्यत: बालिकाओं और महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार से बलात्कार की घटनाएं चिंतनीय है ! यह जो मामले उजागर होते हैं वह तो घटित हुई घटनाओं का 05% ही है क्योंकि कहीं अपमान दृष्टि, तो कहीं धनबल, कहीं दबंगयाई, तो कहीं न्याय न मिल पाने जैसी संभावनाओं से प्रदर्शित नहीं हो पाते हैं ! साथ ही यह भी दुर्भाग्य हमारा जिस देश में नारी पूजी जाती है, संस्कार सभ्यता की बात की जाती हो वहां देश की स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी देश की आबादी का एक बड़ा तबका गरीब परिवार, नारी और महिलाओं के प्रति हालात बद से बदतर ! क्योंकि केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा खेल व खेलों का अवसर उच्चस्तरीय संपन्न परिवारों को अधिक लाभ जबकि मध्यम व निचले गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार सदस्यों का एक मात्र शासकीय शिक्षा केंद्र और यही मध्यम व गरीबी रेखा के नीचे यापन करने वाले ही बनते हैं दुर्भ-व्यवहार बलात्कार के शिकार हमारी संस्था की ओर से मांग है कि प्रदेश के समस्त जिलों के अंदर बड़े शा. कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में बॉक्सिंग, जुडो, कराटे, एवं ताइक्वांडो के एक-एक प्रक्षिक्षण केंद्र खोलने एवं सामग्री उपलब्ध करवाने के लिए राज्य शासन से आग्रह किया ताकि बालिकाएं उसमें प्रशिक्षण करके आत्मरक्षा के लिए तैयार हो सकें !

“अब तो वैचारिक द्वंद हैं “
@मो. तारिक (स्वतंत्र लेखक)