बत्तख मियां ने बचाई थी गांधी जी की जान

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जान अब्दुल्लाह
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गांधीजी की बत्तख मियां ने बचाई थी जान दरअसल जब नील किसानों की बदहाली देख गांधी जी 1917 में चंपारण गए थे। तब उनके मूवमेंट से अंग्रेज सरकार डर गई थी। हुकूमत ने तय किया कि गांधी जी की हत्या करा दी जाए। ताकि किसान उनके प्रभाव में न आएं। तब वहां नील प्लांटेशन के मैनेजर इरविन को ब्रितानी हुकूमत ने गांधी जी की हत्या के लिए आदेश दिया। इस पर इरविन ने साजिश के तहत गांधी जी को डिनर पर बुलाया। अंग्रेज इरविन के रसोइया तब बत्तख मियां थे। इरविन ने बत्तख मियां को जहर की पुड़िया देते हुए कहा कि इसे दूध में मिलाकर डिनर के बाद गांधी जी को ग्लास दे देना। उस वक्त तो बत्तख मियां ने तो हामी भर दी। जब दूध देने की बारी आई तो बत्तख मियां ने गांधी जी को इशारा कर बता दिया कि दाल में काला है। दूध पीना खतरे से खाली नहीं है। जिस पर गांधी जी ने दूध नहीं पीया।

भेद खुलने पर जुल्म का शिकार हुआ बत्तख मियां का परिवार जब गांधी सही-सलामत बच गए और अगले दिन भेद खुला तो इरविन ने बत्तख मियां को न केवल नौकरी से निकाल दिया, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत से गद्दारी के आरोप में कई फर्जी मुकदमे भी लदवा दिए। यही नहीं बत्तख मियां की गांव की पूरी जमीन छीन ली गई। वहीं परिवार को भी मोतिहारी के सिसवा अजगरी पैतृक गांव को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया