बाप की शफक़क़त : तेरी जवानी के देखने के लिए मैंने दिन रात मेहनत की के मेंरी हडडियाँ भी सोख़ता हो गईं!

बाप की शफक़क़त : तेरी जवानी के देखने के लिए मैंने दिन रात मेहनत की के मेंरी हडडियाँ भी सोख़ता हो गईं!

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Sikander Khanjada Khan
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बाप की शफक़क़त
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इक साहब ने रसूलुललाह सल्लाहो अल्लेही व् सल्ल्म से अपने बाप की शिकायत की क या रसूलुललाह सललललाहू अलयही वसललम मेरा बाप मुझसे पूृ़छता नहीं और मैरा सारा माल ख़रच कर दैता है
आप सललललाहू अलयही वसललम ने फरमाया इनके वालिद को बुलाऔ जब इनके वालिद को पता चला कि मैरे बैटे ने रसूलुललाह सललललाहू अलयही वसललम से मैरी शिकायत की है तो दिल मैं रंजीदा हुए और रसूलुललाह सललललाहू अलयही वसललम की ख़िदमत मैं हाज़िरी कै लिए चलै..कयूंकि अरबों की घुटटी मै शायरी थी तो रासते मै कुछ अशआर ज़हन मै हवा कै झौंके की तरह आए और चलै गए..उधर बारगाहै रिसालत मै पहुुँचने से पहले हज़रत जिबरील आप सललललाहू अलयही वसललम की ख़िदमत मै हाज़िर हुए और फरमाया कि अललाह सुबहाना व तआला ने फरमाया है कि आप इनका कैस बाद मै सुनिएगा पहलै वो अशआर सुनें जो वो सोचतै हुए आ रहे हैं जब वो हाज़िर हुए तो आप सललललाहू अलयही वसललम ने फरमाया कि आपका मसला बादमे सुना जाएगा पहलै वो अशआर सुनाएँ जो आप सोचतै हुए आए हैं वो मुख़लिस सहाबी थै यह सुनकर रोने लगे कि जो अशआर अभी मैरी ज़बान सै अदा नहीं हुए मैरे कानों ने नहीं सुने आपके रब ने वो भी सुन लिए
और आप सललललाहू अलयही वसललम को बता भी दिया आप सललललाहू अलयही वसललम ने फरमाया वो कया अशआर थे मुझे सुनाएं इन सहाबी ने अशआर पड़ना शुरू किए( आपको इनका तरजुमा बतलाता हूं )
ऐ मेरे बैटे जिस दिन तू पैदा हुआ
हमारी कमबख़ती के दिन तभी से शुरू हो गए थे
तू रोता था, हम सौ नहीं सकते थै
तू नहीं खाता तो हम खा नहीं सकते थै
तू बीमार हो जाता तो तुझे लिए लिए कभी किस तबीब के पास कभी किसी दम करने वाले के पास भागता कि कहीं मर ना जाए कहीं मर ना जाए
हांलाकि मौत अलग चीज़ है और बीमारी अलग चीज़ है
फिर तुझे गरमी से बचाने के लिए मैं दिन रात काम करता रहा कि मैरे लख़ते जिगर को ठंडी छाँव मिल जाए
ठंड सै बचाने के लिए मैंने पतथर तोड़े तग़ारियाँ उठाईं कि मैरे बचचै को गरमी मिल जाए, जो कमाया तैरे लिए
जो बचाया तैरे लिए
तैरी जवानी के ख़ाब दैखने के लिए मैंने दिन रात इतनी महनत की क मैरी हडडियाँ भी सोख़ता हो गईं
फिर मुझ पर ख़िज़ाँ ने ड़ेरे डाल लिए तुझ पर बहार आ गई मैं झुक गया तू सीधा हो गया अब मुझे उममीद हुई
कि तू अब हरा भरा हो गया है
चल अब ज़िनदगी कि आख़रि साँसे तैरी छाँव मै बैठ कर गुज़ारुँगा
मगर यह कया क जवानी आते ही तैरे तेवर बदल गए
तैरी आँखें माथे पर चढ़ गईं
तू एैसे बात करता क मैरा सीना फाड़ के रख दैता
तू एैसे बात करता क कोई नोकर से भी एैसे नहीं बोलता
फिर
मैंने अपनी तीस साल की मेहनत को झुठला दिया कि मैं तैरा बाप नहीं नौकर हूँ नौकर को भी कोई एक वक़त की रोटी दे दैता है
तू नौकर समझ कर ही मुझे रोटी दे दिया कर
यह अशआर सुनाते सुनाते इन की नज़र अललाह के रसूल पर पड़ गई आप सललललाहू अलयही वसललम इतना रोए क आप सललललाहू अलयही वसललम की दाड़ी मुबारक तर हो गई आप सललललाहू अलयही वसललम ग़ुससै मै अपनी जगह से उठे और बैटे से फरमाया कि आईंदा मैरी नज़रो क सामने मत आना और सुन लौ

तू और तैरा सबकुछ तैरे बाप का है
तू और तैरा सबकुछ तैरे बाप का है
तू और तैरा सबकुछ तैरे बाप का है

अललाह पाक हमें वालीदैन की क़दर करने की तौफीक़ अता फरमाय

आमीन

-कॉपी पोस्ट है कोई हवाला नही है मेरे पास हदीस का इसलिये इसे इबरत समझे बस