बुलंदशहर हिंसा_गाय काटे ‘कुंदन’ और इलज़ाम आये ‘जुम्मन’ पर : ये है ‘सबका साथ -सबका विकास’ : देखें वीडियो

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बुलंदशहर की हिंसा में जैसे जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं उन्हें देखने के बाद बहुत आसानी से समझा जा सकता है कि घटना की पूरी तैयारी पहले से की गयी थी, वारदात को अंजाम देने के लिए भगवाधारी संगठनो के लोगों ने कई दिन पहले से ही कार्यवाही शुरू कर रखी थी, गौकशी के नाम पर जिस घटना को अंजाम दिया गया, वह जानवर आये कहाँ से थे, आसपास के किसी भी गॉव से कोई गाय या अन्य मवेशी कम नहीं हुआ तब वहां गाय के अवशेष कैसे आये, सूत्रों के मुताबिक घटना वाले दिन सरकारी स्कूलों के बच्चों के समय से पहले ही मिड डे मील वितरण कर उनकी छुट्टी कर दी गयी थी, क्यों?

अब बहुत कुछ कहने को बचा नहीं, समझने वाले सारा मामला समझ चुके हैं अब देखना यह है कि भगवाधारियों को सरकार और प्रशासन कैसे बचता है, क्यूंकि फ़र्ज़ी गौकशी की रिपोर्ट में मुस्लिम्स के फ़र्ज़ी नाम लिखवाये गए हैं,

किस तरह खूं के बदले उतारे गए
की खता एक ने चार मारे गए
जिनके चेहरे न देखे कभी ग़ैर ने
उनके जिस्मों से कपडे उतारे गए

ये ज़ुल्म जो हो रहा है वह रुकेगा ज़रूर, हर रात की सुबह होती है,,,,अभी अँधेरा ही सही, रौशनी होगी और ज़रूर होगी,,,,परवेज़

Riyazul Khan
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ये उसी शिखर अग्रवाल की पोस्ट है जिसने तीन दिसंबर की सुबह को खेतों में गाय कटी हुई देखी। दो दिसंबर की सुबह में इसने सभी स्वयंसेवकों की मीटिंग रखी और अगले दिन गाय कटी हुई प्राप्त हुईं। यदि सही और ईमानदारी से जांच हो तो पता चलेगा कि गाय किन लोगों ने काटी और उनका मकसद क्या था?

महत्वपूर्ण सवाल –
1- आखिर दो दिसंबर की मीटिंग क्यों रखी गई?

2- बुलंदशहर में आयोजित इज्तिमा में देश भर से लाखों मुसलमान आए थे, कहीं इज्तिमा को डिस्टर्ब करने के लिए इस मीटिंग में कोई योजना बनाई गई?

3- आखिर मुसलमान खेतों में पंद्रह से बीस की संख्या में गाय क्यों काटेगा? क्या स्थानीय मुसलमानों को नहीं पता कि इससे कितना बड़ा बवाल होगा और नुकसान उठाना पड़ेगा। अपने पैरों पर कोई कुल्हाड़ी क्यों मारेगा?

4- कटी हुई गायों का इतने बड़े पैमाने पर मिलना और फिर तुरंत ही सैकड़ों की संख्या में लोगों का जुटना और कोतवाली पर हमला करना, क्या सुनियोजित नहीं था?

5- बजरंगदल संयोजक योगेश राज तथा भाजपा युवा मोर्चा स्याना अध्यक्ष शिखर अग्रवाल ने कटी हुई गायों को सबसे पहले देखा। आखिर ये दोनों एक साथ खेतों की तरफ क्यों और किस मकसद से गए?

6- पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने गुस्साई भीड़ को शांत कर दिया था, लेकिन योगेश राज एवं शिखर अग्रवाल ने ट्रैक्टर पर कटी गायों को रख मुख्य मार्ग जाम कर दिया। इसी वक्त इज्तिमा से लौट रहे लोग उस मार्ग से गुजर रहे थे। इनकी योजना थी रास्ता रोक कर इज्तिमा से लौट रहे लोगों पर हमला करने की, जबकि इंस्पेक्टर सुबोध ने लाठीचार्ज करवा कर रोड खाली करवानी चाही ताकि अप्रिय घटना न घटे।

7- पुलिस ने जब बजरंगदल और भाजयुमों के पदाधिकारियों के मंसूबे फेल कर दिए तो कोतवाली और चौकी पर हमला बोला गया। इंस्पेक्टर के आँख में गोली मारी गई तथा पुलिसवालों को चौकी के कमरे में बंद कर आग लगा दी गई। खिड़की तोड़ कर पुलिसवाले बगल के कॉलेज में घुस गए जिससे उनकी जान बची।

8- पुलिसवालों ने दंगा भड़काने की कोशिश कर रहे शिखर एवं योगेश का प्लान चौपट कर दिया, क्या इस कारण से इंस्पेक्टर को मारा गया?

रियाजुल हक
पत्रकार तथा सोशल मीडिया विशेषज्ञ