भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ”अगर फ़ायदे में हो तो झूठ भी फैलाओ”

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मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ आज कल भारत के कई राज्यों में होने वाले अगामी विधान सभा के चुनावों को लेकर गहमागही दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और नेता इन चुनावों को जीतने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारत के केंद्र में सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह पर चुनावों में जीत को लेकर जनून इतना अधिक बढ़ता जा रहा है कि वह अब अपनी पार्टी के युवा कार्यक्रताओं को झूठ बोलने और उसे फैलाने के लिए उकसा रहे हैं। भारत के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि जब उन्होंने अमित शाह को इस तरह का भाषण देते हुए सुना तो उन्हें केवल ग़ुस्सा ही नहीं बल्कि हैरत भी हुई कि भारतीय राजनीति अब कितने निचले स्तर पर पहुंच चुकी है और देश का मीडिया इतना डरा हुआ है कि सच दिखाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है।

ख़बरों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कोटा में अपने सोशल मीडिया वॉलेंटियरों को संबोधित करते हुए जो बात कही है वह बहुत ही गंभीर है और अगर यही बात बीजेपी के अलावा किसी और भारतीय रानजीतिक पार्टी के किसी भी नेता ने कही होती तो अब तक इस देश के मीडिया सहित भारत के कोने-कोने में इस पर चर्चा हो रही होती। कोटा में अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि ” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स अधिकतर विदेशी हैं, भाड़े के टट्टुओं से डरो मत, सोशल मीडिया के ही ज़रिए प्रदेश और देश में सरकार बनानी है, मैसेज वायरल करते रहो, यूपी में 32 लाख लोगों का वाट्सअप ग्रूप बना रखा है रोज सुबह 8 बजे मैसेज मिल जाता है”। उन्होंने एक कहानी सुनाया और कहा कि ” हमारे एक वॉलेंटियर ने ग़लत मैसेज वायरल कर दिया कि अखिलेश ने अपने पिता मुलायम को चांटा मारा है, कुछ ही देर में पूरे देश में यह मैसेज फैल गया, मेरे पास भी सूचना आई, मामला ग़लत निकला, इस तरह के काम करने जैसा है, लेकिन करना मत, समझ गए न मेरा इशारा, मैसेज वायरल करते रहना चाहिए, सच्चा हो या झूठा।

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह आए दिन कोई न कोई विवादित बयान देते रहते हैं। अभी हाल ही में उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था कि बांग्लादेशी दीमक को हम देश से निकाल फेकेंगे। जिसको लेकर बहुत ज़्यादा बवाल मचा था स्वयं बांग्लादेश की सरकार ने अमित शाह के इस बयान पर आपत्ति जताई थी। टीकाकारों का कहना है कि क्योंकि अमित शाह देश में सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं इसलिए भारतीय मीडिया उनके ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानों को लेकर ज़्यादा चर्चा करने से बचती है।