भाजपा नेता परेशान कर रहे हैं, मुझे कुछ हुआ तो शिवराज होंगे ज़िम्मेदार : कंप्यूटर बाबा

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पिछले कुछ दिनों से शिवराज सरकार में कभी मंत्री का दर्जा प्राप्त कंप्यूटर बाबा इन दिनों प्रदेश सरकार के लिए गले की फांस बने हुए है। कंप्यूटर बाबा ने अपनी सुरक्षा को लेकर उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका भी दायर की है।

बाबा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है। पुनर्विचार याचिका में गृह विभाग के प्रमुख, सचिव, आईजी, डीआईजी, कमिश्नर कलेक्टर को पार्टी बनाया है और उन्हें विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से कंप्यूटर बाबा की तबीयत खराब थी वह अस्पताल से डिस्चार्ज होकर सीधे अपने आश्रम पहुंचे।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि जब से उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन किया है, तभी से लगातार उन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के फोन आ रहे हैं। उनके समर्थकों को भी फोन कर परेशान किया जा रहा है। कंप्यूटर बाबा ने कहा कि सरकार ने उनसे उनकी सुरक्षा में तैनात गनमैन भी ले लिया है, जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जब पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था तो इस पर कई सवाल उठे थे। अब उनका यही फैसला उनके लिए मुसीबत बनता दिख रहा है। इन्हीं में से एक नामदेव शास्त्री उर्फ कंप्यूटर बाबा शिवराज से नाराज हो गए हैं और राज्य सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। आज वह इंदौर में मन की बात करने जा रहे हैं।

कंप्यूटर बाबा ने पिछले दिनों राज्यमंत्री के दर्जे से इस्तीफा दे दिया था अब वह खुलकर विधानसभा चुनाव से ऐन पहले शिवराज सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा सरकार में संतों का सम्मान नहीं होता है।

एक तरह से इंदौर में कंप्यूटर बाबा के आश्रम पर मिनी कुंभ लग चुका है । संत समागम में 5 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक संत शामिल होंगे। अभय प्रशाल में संत समागम होगा। यहां कंप्यूटर बाबा मन की बात करेंगे। इस दौरान वह शिवराज सरकार पर निशाना साधेंगे। बताया जा रहा है कि भाजपा उन्हें मनाने की पुरजोर कोशिश में है।

बताया जा रहा है कि इसके बाद कंप्यूटर बाबा ग्वालियर में 30 अक्तूबर, खांडवा में 4 नवंबर, 11 नवंबर को रीवा और 23 नवंबर को जबलपुर में संतों से मुलाकात करेंगे।

कंप्यूटर बाबा ने राज्य सरकार पर धर्म और संत समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राज्यमंत्री का दर्जा छोड़ दिया था। उन्होंने सरकार की ओर से गो मंत्रालय बनाए जाने की घोषणा पर भी सवाल उठाए थे। इसके अलावा सरकार से अलग नर्मदा मंत्रालय बनाने की मांग की थी।