#भारतीय उप महाद्वीप और इस्लाम : पार्ट 71 से पार्ट 75 तक एक साथ

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Khan Junaidullah
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भारतीय उप महाद्वीप और इस्लाम:
( पार्ट #71 से पार्ट # 75 एक साथ)
पार्ट – 71
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इस्लामिक सेना का मुहम्मद बिन क़ासिम के नेतृत्व में राजा चिच से युद्ध:

सन् 94 हिजरी ( 713 ईस्वी) में जब मुहम्मद बिन कासिम को भारतीय उप महाद्वीप में प्रवेश किये हुए पूरा साल हो गया था और दूसरे साल का प्रारंभ था , इस साल इनका युद्ध राजा दाहिर के बेटे राजा चिच से हुआ, और राजा चिच भी युद्ध में पराजित हुऐ और उनकी भी मृत्यु हुई, इसके अतिरिक्त इस साल और कई युद्ध हुऐ जिसमें इस्लामिक सेना की विजय हुई,

इसके बाद यह सेना पंजाब की ओर बढी और मुल्तान फतह किया,

पार्ट – 72
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मुहम्मद बिन क़ासिम द्वारा पंजाब प्रांत की ओर कूच और मुल्तान का विजय करना:

मुहम्मद बिन क़ासिम को भारतीय महाद्वीप में आये हुए अब तक दो साल हो चुके थे, और तीसरा वर्ष प्रारम्भ हो रहा था, यह सन् 95 हिजरी का आरंभ था, अब भारत में मुहम्मद बिन क़ासिम की सेना द्वारा लगभग पूरा सिंध क्षेत्र जीता जा चुका था, और इसके अतिरिक्त सिंध के आगे के रण कच्छ के कुछ इलाके भी इस्लामिक सेना के अधीन आ चुके थे, अब मुहम्मद बिन क़ासिम ने पंजाब प्रांत की ओर कूच किया और मुल्तान की ओर बढ़े, व्यास नदी को पार किया गया और कुछ छोटे शहरों पर अधिकार करने के बाद मुल्तान शहर के दरवाज़े पर पहुंचे, वहां के लोगों ने युद्ध स्वीकार किया और इधर से इस्लामिक फौज के नायक ज़ायदा बिन उमैर ताइ ने बहुत वीरता के साथ शत्रु सेना का मुकाबला किया, कुछ समय बाद इस्लामिक सेना के ताबड़तोड़ हमलों के कारण स्थानीय सेना मैदान छोड़ कर भागने लगी, और इसी समय मुहम्मद बिन क़ासिम के निर्देश पर बाहरी सेना को तेज़ी से शहर के चारों ओर फैला दिया गया, परंतु इस घेरा बंदी को इतना लंबा समय लगा कि मुहम्मद बिन कासिम की फौज को जंगी सामान और राशन की किल्लत हो गई,

पार्ट – 73
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मुहम्मद बिन क़ासिम द्वारा पंजाब प्रांत की ओर कूच और मुल्तान का विजय करना:

जब मुल्तान शहर की इस्लामिक सेना द्वारा चारों ओर से सेना बंदी कर ली गई तो यह घेरा बंदी बहुत लंबे समय तक चली जिसके कारण फौज को परेशानी होने लगी और खाने पीने का सामान कम होने लगा , ऐसा लगा कि यह घेरा बंदी खत्म हो जाएगी, परंतु उसी समय शहर से एक व्यक्ति मुहम्मद बिन क़ासिम के पास आया और उस जगह के बारे में बताया जहां से पानी शहर के अंदर जा रहा था, इस्लामिक फौज ने तुरंत उस जगह पर कब्ज़ा कर लिया, जिसके कारण शहर वासियों को शहर से बाहर निकल कर युद्ध करना पडा, और इस युद्ध को मुहम्मद बिन क़ासिम की सेना के द्वारा बहुत आसानी से जीत लिया गया,
बात यह थी वहां एक नदी का पानी एक नहर से होकर एक तालाब में इकट्ठा होता था जिससे पूरा शहर पानी लेता था, इस व्यक्ति के यह बताने पर मुहम्मद बिन क़ासिम की सेना ने नहर को बहुत गहरा कर दिया और पानी वहीं रूक गया और शहर में पानी का जाना रूक गया, जिसके कारण शहर में पानी की कमी हो गई, और नगर वासियों ने खुद ही शहर के दरवाज़े खोल दिए,

पार्ट – 74
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मुहम्मद बिन क़ासिम द्वारा पंजाब प्रांत की ओर कूच और मुल्तान का विजय करना:

मुहम्मद बिन क़ासिम की सेना के द्वारा नहर का पानी बंद करने के बाद मुल्तान शहर के निवासियों ने शहर के दरवाज़े स्वंय खोल दिए और इस्लामिक सेना के द्वारा शहर को बहुत आसानी से जीत लिया गया, बाहरी सेना ने शहर में घुस कर जो सैनिक युद्ध कर रहे थे उनको पराजित किया और उनकी हत्या की, जो सैनिक युद्ध नहीं कर रहे थे उनको बंदी बना लिया,
मुलतान शहर में एक बहुत बडा मंदिर था जिसमें 6 हजार महंत और पुजारी हर समय रहते थे, इस मंदिर में दस गज लंबी और आठ गज़ चौड़ी कोठरी थी, जिसकी छत में छेद कर दिया गया था, जिसमें से मंदिर में आने वाला चढावा कोठरी में जमा होता था, इस मंदिर में सिंध और हिंदुस्तान के अनगिनत लोग पूजा करने के लिए आते थे और बहुत संख्या में सोना चांदी और रूपया मंदिर में भेंट चढ़ाते थे, मुहम्मद बिन क़ासिम ने सभी पुजारियों को गिरफ्तार कर लिया और सोने चांदी के ढेर को सरकारी खजाने में जमा करवा दिया,

भारतीय उप महाद्वीप और इस्लाम:
पार्ट – 75
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मुहम्मद बिन क़ासिम के नेतृत्व में भारतीय उप महाद्वीप में की गई जंगो का खर्च और आमदनी:

मुहम्मद बिन क़ासिम के नेतृत्व में इस्लामिक सेना को भारतीय उप महाद्वीप में 2 वर्ष का समय हो चुका था, इस समय में सिंध पर पूर्ण विजय हो चुकी थी, रण के भी काफी हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया गया था, मुल्तान पर विजय हो चुकी थी, और राजा दाहिर की मृत्यु हो चुकी थी, ऐसे में इराक के गवर्नर हजाज बिन यूसुफ ने मुहम्मद बिन क़ासिम से खत लिखकर बताया कि हिंद की मुहिम शुरू होने से पहले खलीफा वलीद को लिखित गारंटी दी थी कि हिंदुस्तान की जंगो पर जितना भी धन खर्च होगा वह बाद में सरकारी खजाने में जमा करवा दिया जायेगा, और मुहम्मद बिन क़ासिम से पूंछा गया था कि कुल खर्च और आमदनी का हिसाब केंद्रीय शासन को भिजवाया जाये, इसके जवाब में मुहम्मद बिन क़ासिम ने बहुत सा धन रवाना किया जिसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया,
हजाज बिन यूसुफ ने इस पूरे धन का हिसाब लगाया तो पता चला कि अब तक कुल 60 लाख दिरहम सरकार के खर्च हुए थे और 1 करोड़ 20 लाख दिरहम की आमदनी हुई थी, यह देख कर हजाज बिन यूसुफ ने कहा था कि:
इस तरह हमने
अरब के बच्चो और औरतों की मौत और बेइज्ज़ती का बदला लिया, अपने गुस्से को ठंडा किया और 60 लाख दिरहम और राजा दाहिर का सर हमने लाभ में कमाया,