भारत में मुस्लिमों और दलितों पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं : राष्ट्रसंघ की रिपोर्ट

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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहे हैं जिसके कारण मुस्लिमों और दलितों पर लगातार हमले बढ़ते जा रहे हैं।

अपने रिपोर्ट में एच्यूमी ने कहा कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की जीत को दलितों, मुस्लिमों, आदिवासियों और ईसाई समाज के खिलाफ हिंसा से जोड़ा जाता है। भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बीजेपी नेताओं की ओर से लगातार भड़काऊ बयान दिए जाते रहे हैं जिनमें मुस्लिम और दलितों को निशाना बनाया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि असहिष्णुता को बढ़ावा देने तथा भेदभाव को आगे बढ़ाने से नस्ली भेदभाव बढ़ता है और लोगों का बहिष्कार होता है।

आजतक के अनुसार मुस्लिमों और दलितों पर हमलों के अतिरिक्त राष्ट्रसंघ की इस रिपोर्ट में विवादित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स, एनआरसी का जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया है कि कई देशों में राष्ट्रवादी दल अवैध अप्रवासन मामले में प्रशासनिक सुधार लेकर आए जिसमें आधिकारिक नागरिक रजिस्टर से अल्पसंख्यक ग्रुपों को बाहर कर दिया गया। स्पेशल रिपोर्टर ने यह भी उल्लेख किया कि इस साल मई में उन्होंने भारत सरकार को पत्र लिखा था जिसमें एनआरसी मामले को उठाया था। रिपोर्ट में उन्होंने असम में रहने वाले ‘बंगाली मुस्लिम अल्पसंख्यकों’ की समस्या का जिक्र किया जिन्हें ऐतिहासिक रूप में ‘विदेशी’ क़रार दिया जाता रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग की मतदाता सूची में इनके नाम शामिल हैं लेकिन एनआरसी से गायब है यह वास्तव में बहुत ही निराशाजनक है। साथ ही यह भी कहा गया कि 1997 में भी इस प्रक्रिया को अपनाया गया था, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में असम में बंगाली मुसलमानों के अधिकार चले गए थे। स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यह आशंका जताई गई कि उसने कई मुस्लिम लोगों और बंगाली बोलने वाले लोगों को जानबूझकर दूर रखा जिससे उन्हें अपडेट एनआरसी रजिस्टर से बाहर रखा जा सके।

इस रिपोर्ट को तेंदायी एच्यूमी ने तैयार किया है, जो यूएन में बतौर स्पेशल रिपोर्टर ऑन कंटेमपरोरी फॉर्म्स ऑफ रेसिज्म, रेसियल डिसक्रिमिशन, जेनफोबिया एंड रिलेटेड इनटोलरेंस हैं।