मंदिर में आरती या रेप की चीखें, देश को क्या चाहिये और हम क्या ढूंढ रहे हैं!

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Sagar_parvez
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जयपुर : एक छोटी सी बच्ची। स्कूल जाने का मन नहीं होता है उसका। तो उसकी पापा उसे मनाने लगते हैं। बेटा स्कूल चले जाओ। पढ़ाई करके आगे बढ़ना है तुमको। ज़िंदगी में कुछ करना है तुमको। लेकिन मां-बाप की दुलारी बेटी अपनी ज़िद्द पर अड़ी रहती है।

उसे स्कूल जाने का मन नहीं होता है। अब उसके पापा थोड़ा गुस्सा हो जाते हैं। डांटने लगते हैं, और एक छोटा सा थप्पड़ भी मार देते हैं। अब बच्ची रोने लगती है, बड़ी मासूमियत के साथ। उसका रोना बहुत अच्छा भी लगता है। पापा और उसकी मां उसकी इस मासूमियत पर बहुत सहम जाते हैं और फिर उसकी बात मान लेते हैं।

हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? क्योंकि ऐसी ही किसी बच्ची का जो कि 8 साल की ही थी, उसका लगातार कई दिनों ने हवस के जानवरों ने शिकार किया। उसे नशे की दवा खिलाई और जब मन भर गया तो उसे पत्थरों से मार दिया। उसकी तस्वीर देख के अगर आपका दिल नहीं सिहरता फिर आपको अभी के अभी इस दुनिया को छोड़कर चले जाने की ज़रुरत है।

लेकिन हम क्या करें? 2012 में जो दिल्ली के अंदर गैंगरेप हुआ था, बस के अंदर में। क्या हुआ था तब। एक अच्छी खासी फिजियो थेरेपिस्ट जो कि आज़ाद रहना चाहती थी, के साथ लोगों ने क्या किया। उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड भी तो डाल दिया था ना। 6 साल गुज़र गए उस घटना को। जिस विरोधी पार्टी ने उस समय इस गैंगरेप को लेकर सड़क जाम कर दिया था, वो आज सरकार में है। सज़ा मिल गई क्या उनको?

पहले 8 साल की आसिफा के साथ क्या हुआ ये जानिये..
बात है 10 जनवरी की। एक 8 साल की लड़की जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 90 किलोमीटर दूर कठुआ के रासना गांव के जंगलों में बने अपने घर से गायब हो गई थी। लड़की बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखती थी।

एक सप्ताह पुलिस की छानबीन में बच्ची का शव पास के इलाके से मिल गया था और मेडीकल जांच में पाया गया कि 8 साल की बच्ची के साथ रेप किया गया था।

9 अप्रैल को पुलिस ने इस मामल में करीब 8 आरोपियों पर चार्जशीट दायर किया। इन आरोपियों के वकीलों ने पुलिस को चार्जीशीट दायर करने से रोकने की कोशिश की और दो पक्षों के बीच में इस मामले को लेकर झड़पें भी हुईं।

लेकिन जो पुलिस ने चार्जशीट दायर की है, वो पढ़ने के बाद इंसानियत से भरोसा उठ जाना लाज़िमी सा लगने लगता है।

पुलिस की चार्जीशीट के अनुसार..
रासना गांव में 10 जनवरी को मोहम्मद यसुफ की 8 साल की बच्ची घोड़ों के लिए चारा लाने के लिए जंगल गई थी। जब वो जंगल गई थी, तब दोपहर के 12.30 हो रहे थे। 10 जनवरी को ही बच्ची को अपहरण करके एक मंदिर में रख लिया गया था। 12 जनवरी को विशाल जंगोत्रा, जो कि मुख्य आरोपी है ने लड़की को मंदिर में ही भूखे पेट नशे की टेबलेट दी। इसके बाद आरोपी ने बच्ची के साथ कई बार रेप किया। विशाल के साथ उसके कई और भी साथी थे। इस गैंगरेप के बाद सभी ने बच्ची की हत्या करने का सोच लिया था।

इसके लिए आरोपियों ने शामिल किया एक पुलिस अधिकारी को ताकि वो उन सभी को इस आरोप से बचा सके। आरोपी पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया ने बाकियों से कहा कि वो थोड़ा रुके क्योंकि वो भी हवस मिटाना चाहता है। इसके बाद फिर से बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। इसके बाद रोती बिलखती बच्ची को सभी बलात्कारियों ने ईंट और पत्थर से कई वार करके हत्या कर दी और जंगल में बच्ची की लाश को फेंक दिया। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी की मां से डेढ़ लाख रुपये घूस के तौर पर भी लिये थे।

उसके बाद क्या हुआ। अभी 10-11 अप्रैल को जब ये मामला समाने आया तो क्या हुआ। लगा था कि 2012 के जैसा जिस तरह निर्भया के लिए लोगों ने कैंडल मार्च किया था, वैसा ही कुछ होगा, तिरंगा झंडा दिखेगा, लोग आसिफा को इंसाफ दिलाने के लिए जमकर नारेबाज़ी करंगे।

ऐसा हुआ भी। जम्मू में हुआ। लेकिन आसिफा के लिए नहीं। उन बलात्कारियों के लिए। उनके ऊपर से चार्जशीट हटाने के लिए। ये सबके समाने हो हुआ और अब भी हो रहा है। लगातार हो रहा है, मीडिया के सामने हो रहा है। 282 सीट वाली भाजपा के दो मंत्रियों ने भी इन बलात्कारियों के समर्थन में आवाज़ें उठाई। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा लगाने वाली सरकार को क्या ये पता नहीं है कि आसिफा को उसके मां-बाप डॉक्टर बनाना चाहते थे। क्या उनको ये पता नहीं है कि अगर एक गरीब की बेटी डॉक्टर बन जाती तो क्या होता। कितना नाम होता प्रधान सेवक का।

आसिफा के घरवालों के ज़ुबानी..
आसिफा अपने घर पर अकेली थी। उसके मौजूदा मां बाप उसके असली मां बाप नहीं थे। उसके अब्बू ने उसे अपनी बहन से गोद लिया था। वो चाहते थे कि बच्ची के पढ़ा लिखाकर डॉक्टर या टीचर बनाएंगे। आसिफा के अब्बू बताते हैं कि 14 जनवरी को उनके रिश्तेदार की शादी थी। उसके लिए कपड़े भी सिलवा रही थी आसिफा। लेकिन वो 10 जनवरी को बाहर गई थी तो फिर 17 जनवरी को बेटी की लाश ही मिली।

इन सबके बीच जो आसिफा के अब्बू ने बताया, वो दिल दहला देने वाला है और ऐसे दो टुकड़ों में बंट रहे भारत के लिए सोच में पड़ जाने वाली बात है। आसिफा के अब्बू जू बच्ची के गुम हो जाने के बाद उसकी तलाशी ले रहे थे तो मंदिर के आसपास से भी गुज़रे। उन्हें ये नहीं पता था कि उनकी बेटी मंदिर के अंदर है। उन्होंने खुद कहा कि उन्हें लगा कि मंदिर तो पवित्र जगह है, यहां पर ऐसा कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने मंदिर के बाहर आरोपी एसपीओ दीपक खजूरिया को भी देखा था।

अपने देश में जिस पार्टी की सरकार है, वो जो राम मंदिर बनाने का दावा करती है, उसे क्या ये पता है कि उस 8 साल की छोटी बच्ची का रेप लगातार कई दिनों तक देवी मां के मंदिर में होता रहा। सवाल तो यही है कि जिस देश में देवी के मंदिर में उसकी देवी जैसी बेटी ही सुरक्षित नहीं है, उसकी देवी जैसी बेटी को नपुंसक लोग हवस का शिकार बनाते हैं, उस देश में सीता के राम की मंदिर को बना देने का ढोंग पिछले 25 सालों से क्यों किया जा रहा है।

बलात्कार हो जाते हैं, लोग बोल देते हैं कि फांसी की सज़ा हो जानी चाहिये। लेकिन बात यहीं खत्म हो गई ना। एक छोटा सा सवाल ये भी है कि इस देश में किसी का मर्डर कर दो तो फांसी की सज़ा हो जाती है। रेप करने पर फांसी की सज़ा दे देने से क्या हो जाएगा। रेप रुक जाएगा क्या। कभी नहीं। लोगों को बदलना होगा लेकिन पहले जनता को चलाने वाली इन सरकारों को। 21 राज्यों में राज करने वाली ये पार्टी दंभ भरती रहती है। लेकिन क्या इनको हमें ये बताना ज़रुरी नहीं है कि सबसे ज़्यादा रेप उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश में ही हो रहे हैं।

एक आखिरी सवाल तो उन सभी आम जनता से भी है जिन्होंने बेटी का बलात्कार होने से पहले उसका नाम जान लेना सही समझा। खुद की 8 साल की बच्ची से कभी वो पूछ के देख लें तो पता चलेगा उनकी बेटी को कितनी पता है, हिंदु और मुसलमान का। हैवानियत का कोई धर्म होता है क्या। जैसे हम कहते हैं कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। खैर! हम वो लोग हैं जो तभी सुनते हैं, जब तक खुद के साथ कुछ ना हो जाए। तब तक के लिए करते रहिये हिंदु-मुस्लिम। अभी तो और भी करेंगे, क्योंकि चुनाव आने वाला है ना।

जयपुर। एक छोटी सी बच्ची। स्कूल जाने का मन नहीं होता है उसका। तो उसकी पापा उसे मनाने लगते हैं। बेटा स्कूल चले जाओ। पढ़ाई करके आगे बढ़ना है तुमको। ज़िंदगी में कुछ करना है तुमको। लेकिन मां-बाप की दुलारी बेटी अपनी ज़िद्द पर अड़ी रहती है।

उसे स्कूल जाने का मन नहीं होता है। अब उसके पापा थोड़ा गुस्सा हो जाते हैं। डांटने लगते हैं, और एक छोटा सा थप्पड़ भी मार देते हैं। अब बच्ची रोने लगती है, बड़ी मासूमियत के साथ। उसका रोना बहुत अच्छा भी लगता है। पापा और उसकी मां उसकी इस मासूमियत पर बहुत सहम जाते हैं और फिर उसकी बात मान लेते हैं।

आसिफा अपने घर पर अकेली थी। उसके मौजूदा मां बाप उसके असली मां बाप नहीं थे। उसके अब्बू ने उसे अपनी बहन से गोद लिया था। वो चाहते थे कि बच्ची के पढ़ा लिखाकर डॉक्टर या टीचर बनाएंगे। आसिफा के अब्बू बताते हैं कि 14 जनवरी को उनके रिश्तेदार की शादी थी। उसके लिए कपड़े भी सिलवा रही थी आसिफा। लेकिन वो 10 जनवरी को बाहर गई थी तो फिर 17 जनवरी को बेटी की लाश ही मिली।

इन सबके बीच जो आसिफा के अब्बू ने बताया, वो दिल दहला देने वाला है और ऐसे दो टुकड़ों में बंट रहे भारत के लिए सोच में पड़ जाने वाली बात है। आसिफा के अब्बू जू बच्ची के गुम हो जाने के बाद उसकी तलाशी ले रहे थे तो मंदिर के आसपास से भी गुज़रे। उन्हें ये नहीं पता था कि उनकी बेटी मंदिर के अंदर है। उन्होंने खुद कहा कि उन्हें लगा कि मंदिर तो पवित्र जगह है, यहां पर ऐसा कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने मंदिर के बाहर आरोपी एसपीओ दीपक खजूरिया को भी देखा था।