#मदरसे_की_तालीम_मै_इंसानियत_अव्वल : 20 बच्चों की जान बचाकर खुद हो गया शहीद!

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Sikander Kaymkhani
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मदरसे में पढने वाला अशफाक़ – गाँव के 20 बच्चों की जान बचाकर खुद हो गया शहीद.

हादसे होते हैं और जिंदगियां लील जाते हैं, नन्ही नन्ही और मासूम जिंदगियां, हादसे किसी का सप्रदाय या धर्म नहीं देखकर आते, उनका तो मकसद तबाही होता है, लेकिन हादसों से जो नहीं घबराते हो वो हीरो बन जाते हैं, आपने मेरठ के विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का नाम सुना होगा, उसमे एक लड़का था जावेद, जावेद भी अपनी जान की परवाह न करते हुए आग में कूद गया था.

उसे आग नहीं दीख रही थी उसे किसी का सम्प्रदाय नहीं दीख रहा था, बल्कि उसे मासूम बच्चों की चीखें सुनाई दे रहीं थी, उसे औरतों की भयनक चीखें सुनाई दे रहीं थी, जावेद उस आग के गोले में घुसा और फंसे हुए लोगो को तबतक निकालता रहा जबतक पूरी तरह से जल न गया, दो दिन बाद उसने अस्पताल में दम तोडा, लेकिन देश को एक खूबसूरत सन्देश दे गया.

आज विक्टोरिया पार्क के उस भीषण अग्निकांड को 12 वर्ष हो चुके हैं. इतने साल बाद भी हम जावेद को याद रखते हैं तो सिर्फ इसलिए क्योंकि, वो जांबाज़ था, जो दूसरों की जान बचाने के चक्कर में अपनी जान बचाना भूल गया था वरना रोजाना दुनिया में हजारों लोग मरते हैं कोई किसी को याद नहीं रखता, आइये हम एक और इसे ही जावेद से मिलाते हैं जिसका नाम था अशफाक़.

15-16 बरस का था अशफाक. कोई पूछता कि बड़े होकर क्या बनोगे, तो कहता- मौलवी. इस उम्र के बाकी लड़के जाने क्या सपने देखते होंगे. लेकिन अशफाक सोचता था कि एक दिन मस्जिद की मीनार से उसकी आवाज गूंजेगी. अशफाक का ये सपना अधूरा ही रहेगा. पिछले हफ्ते शुक्रवार को आई तेज आंधी में उसके मदरसे की मीनार टूटकर नीचे गिर गई. अशफाक उसके नीचे दबकर मर गया. लेकिन मरने से पहले उसने 20 लोगों की जान बचाई.

जिनकी उसने जान बचाई, वो ताउम्र उसको याद रखेंगे. अशफाक उनका हीरो रहेगा. हमेशा.ये 6 अप्रैल की बात है. हरियाणा के मेवात में एक बमबाहेरी गांव है. यहीं के मदरसे की घटना है ये.स दिन शाम के वक्त अशफाक कुरान पढ़ने मदरसा पहुंचा. इसी दौरान तेज आंधी-तूफान आया. इतनी तेज कि एक मीनार हिलने लगी. अशफाक की नजर गई. उसे लगा कि खतरा है. उसने चिल्लाकर औरों को बताया

अपनी जान बचा सकता था अशफाक, लेकिन वो औरों को बचाता रहा

उस दिन शाम के वक्त अशफाक कुरान पढ़ने मदरसा पहुंचा. इसी दौरान तेज आंधी-तूफान आया. इतनी तेज कि एक मीनार हिलने लगी. अशफाक की नजर गई. उसे लगा कि खतरा है. उसने चिल्लाकर औरों को बताया. बच्चे बाहर भागने लगे. लेकिन अशफाक नहीं भागा. वो बाकी बच्चों को बाहर निकालने में जुटा था. इसी दौरान मीनार टूटकर छत पर गिर गई. अशफाक और उसके साथ एक और बच्चा उसके नीचे दब गए. बाद में गांववालों ने उन्हें निकाला. तब तक उसमें जान बाकी थी.

उसे अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने कहा कि हालत काफी खराब है. दिल्ली लेकर जाएं, तो बचने की उम्मीद हो सकती है. अशफाक को दिल्ली लाया गया. मगर बचाया नहीं जा सका. हरियाणा वक्फ बोर्ड को भी इस हादसे की खबर मिली. बोर्ड ने मदरसे की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया. कहा कि दो लाख रुपये की मदद अशफाक के परिवार को भी मिलेगी. उधर अशफाक के अब्बू दीन मुहम्मद ने कहा कि वो अपने हिस्से के रुपये भी मदरसे को ही दे देंगे.

16 साल का बच्चा इतना निडर कैसे हुआ होगा?

ये मेवात की घटना है. अशफाक ने देख लिया था कि मदरसे की छत हिल रही है. हरियाणा वक्फ बोर्ड ने अशफाक के परिवार को दो लाख की मदद देने का ऐलान किया. मगर अशफाक का परिवार वो पैसा भी मदरसे को दे देगा.