मर्दाना कमज़ोरी का शिकार कहीं आप भी तो नही???

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Sikander Kaymkhani
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मर्दाना कमजोरी का शिकार कहीं आप भी तो इस कमजोरी के शिकार नही अगर है तो ये पोस्ट पढ़े अपना इलाज करे

हकीम साहब मेरी बीवी मुझसे कहती हैं

तुम मर्दाना कमजोरी के शिकार हो ???
मर्दाना तौर पर तुम कमजोर हो??
तुम में मर्दाना सिफ़ात नही है??

ओर ना तुम इस काबिल हो मै उसकी बात सुनकर हैरान रह गया
में उसे केबिन में ले गया और कुछ जरूरी टेस्ट से फारिग हुआ
तो देखा वो तो बिल्कुल ठीक है सेहतमंद है लिहाज से मर्दाना कमजोरी भी बिल्कुल नही ओर ऊपर से हैरान कर देने वाली बात ये की तीन बच्चों का बाप था पुलिस में नोकरी थी अब सोचने की बारी मेरी थी में बिलकुल हैरान था माजरा समझ से परे था ,

अजीब मरीज़ था जो तीन बच्चों का पिता था और अच्छी उत्तरप्रदेश पुलिस में जॉब इलाहाबाद जैसे बड़े शहर में नोकरी ऊपर की कमाई मेरा भी कारोबार मन्दा ही चल रहा था सो में इस मरीज़ को अपने हाथ से जाने नही देना चाहता था
तो मैने उसे दो तीन दवाइया लिख दी और 15 दिन के इस्तिमाल की सलाह देके भेज दिया ,
वो मरीज 15 दिन बाद वापस आया तो जहनी तौर पर बहुत अधिक बीमार परेशान लग रहा था ,
मेने जब दरयाफ़्त किया तो उसने कहा कि उसकी बीवी का अब भी उसकी सेहत से इनकार है

कहने लगा हकीम साहब कुछ कीजिये वरना में घुटु घुट के मर जाऊँगा
इस इस बार मैंने उसे 15 दिन की दवाई और दे दी और कहा कि अगर तुम्हारी बीवी को फिर से शिकायत हो मर्दाना कमजोरी की तो तुम अपनी बीवी को भी अपने साथ लेकर आना क्यो की मेरी दवाइयों से मुर्दे भी जिंदा हो जाते है मिसाल के तौर पर नाअहल भी कामयाब शोहर बन जाते है और मेरी दवाइयों से कितने ही लोग अच्छी शादी शुदा जिंदगी गुजार रहे है ,,

अब वह चला गया और मैं सोच विचार में लग गया दस 12 दिन बाद मैंने उसका हाल-चाल जानने के लिए फोन किया

मगर अब भी उसकी बीवी का यही रोना था कि तुम नामर्द हो नामर्द हो कमजोर हो

मैंने उससे कहा कि तुम अगले दिन अपनी बीवी को भी अपने साथ लेकर लेकर दवाखाने पर आ जाओ

अगले दिन वह मियां बीवी मेरे सामने बैठे थे मैंने उसकी बीवी से पूछा अभी भी तुम्हें अपने शौहर से क्या शिकायत है

उसकी उसकी बीवी बोली हकीम साहब यह मर्दाना तौर पर बिल्कुल कमजोर है मैं उसकी इस बेबाक राय पर बिल्कुल हैरान हो गया और उसका शौहर एक नजर उसकी शिकायत ही चेहरे की तरफ देख कर दूसरी तरफ मेरी ओर इमदाद तलब की नजर से देखने लगा

मैं थोड़ा सा झल्ला गया कैसी औरत है शर्म हया नहीं है बिल्कुल भी मैंने भी शर्म को एक तरफ रख कर जल्दी जल्दी सवाल करने लगा
अब मैंने उससे कहा कि किस तरह तुम्हारा अपने मर्द से गुजारा नहीं होता जबकि वह तुम्हारे तीन बच्चों का बाप है

मर्दाना तोर पर कमज़ोर कैसे हुए बीबी

अब उस औरत ने बोलना शुरू किया कहा हकीम साहब मेरी बात को गौर से सुनो ध्यान से सुने मेरे बाबा गांव में जमीदारी करते हैं हम दो बहने हैं एक बहन ऐसे ही नामर्द की वजह से खुदकुशी कर चुकी है

अब मेरे पिताजी जमीदार होते हुए भी कभी भी हमें रानी राजकुमारी मेरी पुत्र इस तरह से पुकारते थे जबकि मेरा सोहर मुझे कुटिया कहकर पुकारता है क्या यह मर्दाना सिफत है आप इस बात को मर्दाना सिफात कह सकते हैं

मुझसे कोई गलती हो जाए तो यह मेरे मायके वालों को इतनी गंदी गंदी गालियों से नवाजते हैं क्या ये मर्दाना सिफ़ात है?/???

बताइए हक़ीम साहब इसमें क्या मरदानासिफ़ात की बात है कि दूसरों की गलती पर उसके घर वालों को बुरा भला कहना????

हकीम साहब मेरे बाबा मुझे गुस्से में भी शहजादी कहते हैं और यह मुझे कजरी कहते हैं क्या यह मर्दाना सिफात है????

जबकि मर्द तो वह होता है जो कंजरी को भी इतनी इज्जत दे कि वह कंजरी भी कंजरी ना रहे,

अब अब आप बताइए हकीम कि कोई ऐसा भी शोहर होता है जो अपनई बीवी को कभी कंजरी कभी कुत्तिया कहकर पुकारते हैं क्या यह मर्दाना कमजोरी नही है क्या??????

अब आप बताइये मर्दाना तौर पर कमजोर नही है क्या??

हकीम साहब का सर भी शर्म से झुक गया

दिल मे आया कि जमीन फट जाए और उसमें समा जाऊं उसका शोहर भी हकीम साहब की तरफ फटी फटी आंखों से देखता रहा बिल्कुल हैरान और अब अफसोस में अपनी बीवी की तरफ देखता रहा और बोला अगर यही मसला था तो मुझे बोल नहीं सकती थी
मुझको इतना यह नहीं तौर पर टॉर्चर करने की क्या जरूरत थी
अब औरत बोलने लगी कि इतने सालों से मुझे जो जो हनी तौर पर टॉर्चर करते हो क्या वह बातें मुझे अच्छी लगती थी मेरी बहन मां बहन बेटी मेरी मां बहन के साथ गलत रिश्ते जोड़ देते गलत बातें उनके बारे में करते थे गालियां देते थे क्या इन बातों से मैं खुश होती थी क्या मैं इतने सालों से जैहनी तोर पर टॉर्चर ना हुई????

इतने सालों से आपका दिया जहनी टॉर्चर बर्दाश्त करती रही या हकीम साहब के पास पैसे जाया करने से पहले अगर तुम मुझसे बात कर लेते तो यह पैसे जाया ना होते हैं

अब हक़ीम साहब सोच में गिर गए ओर जब और जब हकीम साहब बाहर निकले तो उनके शागिर्द ने कहा कि वह मियां बीवी बाहर निकली तो मैंने उनके लिए 15 दिन की दवाई और पैक कर दी

पर उस मरीज की बीवी तो बड़ी बेकार और घटिया ने के लिए उसने दवाई मेरे मुंह पर मार दी और कहा तुम खा लेना या तुम्हारे नामर्द हक़ीम को खिला देना

क्या कहा???? हकीम साहब के मुंह से गाली निकलते निकलते बची

हकीम साहब सोचने लगे क्या मैं भी मर्दाना कमजोरी का शिकार हूं मैं भी इसी बीमारी का मरीज हूं

दोस्तों कहीं आप भी इस बीमारी के शिकार तो नहीं इसका एक बेहतरीन और सस्ता और सरल उपाय है

बरदाश्त और मोहब्बत एक एक घूंट सुबह शाम दोपहर लीजिए देखिए फिर ये बीमारी कैसे दूर होती है

दुआ में याद रखे sk