मलेशिया ने सऊदी अरब को दिया बड़ा झटका!

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मलेशिया में जब से महातीर मुहम्मद की सरकार बनी है उस समय से वहां होने वाले परिवर्तन न तो सऊदी अरब को भा रहे हैं और न सऊदी अरब के घटकों को पसंद आ रहे हैं।

मलेशिया ने यमन युद्ध से पूरी तरह बाहर निकलने की घोषणा करके सऊदी अरब को बड़ा झटका दिया था। हालांकि यमन युद्ध में मलेशिया के सैनिकों की संख्या केवल सांकेतिक ही बताई जाती है लेकिन सऊदी अरब को झटका इसलिए लगा कि वह बड़ी कोशिश करके यमन युद्ध के समर्थकों की संख्या बढ़ाने में लगा हुआ है और इसके लिए उसने बड़े पैसे ख़र्च किए हैं मगर इस युद्ध में सऊदी अरब का साथ देने वालों की संख्या लगातार कम होती गई है।

यमन युद्ध के मामले पर जर्मनी से सऊदी अरब के संबंधों में काफ़ी तनाव आ चुका है।

मलेशिया में नई घटना यह हुई कि सरकार ने उस आतंकवाद विरोधी केन्द्र को बंद कर दिया जिसका सऊदी अरब समर्थन करता है और लगभग डेढ़ साल पहले सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने मलेशिया यात्रा के दौरान इस केन्द्र का उद्घाटन किया था।

एसोशिएटेड प्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मलेशिया के रक्षा मंत्री मुहम्मद साबू ने देश की संसद को बताया कि किंग सलमान अंतर्राष्ट्रीय शांति केन्द्र तत्काल बंद किया जा रहा है और इसके सभी कार्यक्रम मलेशिया रक्षा व सुरक्षा केन्द्र को सौंपे जा रहे हैं। मलेशियाई रक्षा मंत्री ने यह नहीं बताया कि यह फ़ैसला क्यों किया गया है और सऊदी अरब ने भी इस घटना के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है।

पिछले साल किंग सलमान ने मलेशिया की दौरा किया था तो उस समय इस केन्द्र की स्थापना इसलिए की गई थी कि इसमें धर्मगुरुओं को जगह दी जाए और वह चरमपंथी विचारों का मुक़ाबला करें।

जिस समय इस केन्द्र की स्थापना हुई उस समय नजीब रज़्ज़ाक़ की सरकार थी और नजीब रज़्ज़ाक़ इस समय भ्रष्टाचार के मामलों में जेल की सलाख़ों के पीछे हैं।

सऊदी अरब पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह दुनिया भर में अपने अलग अलग केन्द्रों की मदद से चरमपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा देता है। फ़्रांस और जर्मनी सहित अनेक पश्चिमी देशों में स्थानीय सरकारों ने सऊदी अरब द्वारा बनाए गए कई केन्द्रों को बंद करवा चुकी हैं।

अलक़ायदा, दाइश अन्नुस्रह और तालेबान जैसे आतंकी संगठनों की विचारधारा वही वहाबी विचारधारा है जो सऊदी अरब की सरकारी विचारधारा है और जिसे वह दुनिया भर में फैलाने का प्रयास कर रहा है। मलेशिया और इंडोनेशिया उन देशों में गिने जाते हैं जहां सऊदी अरब ने पिछले कई दशकों से अपने इस मिशन पर काम किया है। यहां तक कि अमरीका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने भी अपने एक बयान में इस इलाक़े में चरमपंथी विचारधारा बढ़ने की बात कही थी।

इस प्रकार की अटकलें हैं कि मलेशिया में संभावित रूप से यह केन्द्र इस लिए बंद किया गया है कि वह अपने घोषित लक्ष्य के ख़िलाफ़ काम कर रहा था जिसे मलेशिया की वर्तमान सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।