महिला एंकर के साथ कल रात हुई घटना का सच सामने आया

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Omprakash Chouksey
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ताजा-खबर ( पत्रकार साथीगण जरुर पढे)

अभी-अभी खबर आ-रही है कि भोपाल के एक महिला एंकर के साथ कल रात हुई घटना का सच सामने आया है:-

ये कार पारुल केसवानी, पुत्री ईश्वरदास केसवानी, निवासी बी 59 शास्त्री नगर के नाम से दर्ज है। इसे चला रही टीवी चैनल की कथित एंकर का कहना है कि पांच मनचलों ने उसकी कार माखनलाल चतुर्वेदी विवि के सामने रोकी और उससे छेड़खानी की। अखबारों ने भी बगैर खोजबीन उसके बयान को जस का तस छाप दिया। इस महिला ने पुलिस पर भी देर से आने का आरोप लगाया। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज कराने से इंकार कर दिया। पुलिस ने गाड़ी नंबर के आधार पर संबंधित नागरिक को घर से बुलाकर देर रात बयान लिए तब हकीकत सामने आई। खुद को पत्रकार बताने वाली ये महिला कान में ईयरफोन लगाकर अपने किसी सहयोगी से बातें करती हुई कार चला रही थी। प्रचंड समाचार पत्र के दफ्तर के सामने इसने अपनी कार अचानक सड़क पर डाल दी। इससे सामने से आ रही एक कार की भिडंत होते होते बची। कार चालक ने सूझबूझ का परिचय देकर अपनी कार के ब्रेक लगाए लेकिन सड़क के बाजू में लाते समय एक साईकिल चालक से टक्कर होते होते बची। इसके बावजूद ये गैर जिम्मेदार महिला रुकी नहीं। उसने अपनी कार तेजी से आगे बढ़ाई और बीडीए के दफ्तर के बाजू वाली सड़क पर पहुंच गई । इस कार में दो महिलाए, दो लड़के और एक बुजुर्ग सज्जन बैठे थे।अचानक ब्रेक लगने से उन्हें हल्की चोटें भी आईं। प्रभावित कार के चालक ने पीछा करके माखनलाल चतुर्वेदी विवि के सामने जाकर महिला को असावधानी से कार चलाने के लिए टोका। महिला तब तो चुप रही लेकिन बाद में उसने फोन लगाकर पुलिस को बुलाया। इसके बावजूद उसने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई और फेसबुक पर मनचलों की छेड़छाड़ की कहानी कपोल कल्पित कहानी लिख डाली। इससे पुलिस हरकत में आई और अखबारों के अपराध संवाददाताओं ने बगैर खोजबीन किए महिलाओं को असुरक्षित बताते हुए समाचार भी छाप दिए। मीडिया के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये पर पुलिस परेशान है। वह यदि महिला की बात को गलत बताती है तो मीडिया उसे गरियाने जुट जाता है। वास्तव में पुलिस और मीडिया को मिलकर ऐसी महिलाओं की काऊंसिलिंग करने के लिए अभियान चलाना चाहिए जो अनावश्यक रूप से अपनी गलतियां छुपाने के लिए प्रताड़ना और छेड़छाड़ की शिकायतें करती हैं। मीडिया के साथियों को भी इस तरह की घटनाओं में सावधान रहकर रिपोर्टिंग करने की जरूरत है। मीडिया के लोग ध्यान रखें कि वे आम नागरिक हैं उन्हें जनता से विद्रोह करना है तो कृपया मीडिया छोड़ दें ।अपनी नालायकी से मीडिया को बदनाम न करें। उस महिला पत्रकार को प्रभावित व्यक्ति से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि अपनी गलती छुपाने के लिए उसने बेवजह एक जिम्मेदार वाहन चालक को परेशान किया। मीडिया के मित्र भी इसमें सहयोग करें तो अच्छी मिसाल कायम हो सकती है सर जी।