“माह पीशानी” : कहानी : पार्ट 2

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पुराने ज़माने में एक व्यक्ति अपनी पत्नि और लड़की कि जिसका नाम शहरबानो था रहता था।

मदरसे में पढ़ाने वाली मुल्ला बाजी को जब यह पता चला कि शहरबानो के बाप की आय अच्छी ख़ासी है तो उसने दिखावटी मोहब्बत द्वारा ख़ुद को शहरबानो से इतना निकट कर लिया कि जो कुछ वह कहती थी शहरबानो करती थी। मुल्ला बाजी ने शहरबानो से कहा कि वह अपनी मां को सिरके के मटके में डाल दे तो उसने ऐसा ही किया। मुल्ला बाजी धीरे धीरे उनके जीवन में प्रवेश कर गई और जब शहरबानो के बाप से उसकी शादी हो गई तो उसका असली चेहरा सामने आया, शहरबानो से एक नौकरानी की तरह काम लेती थी और उसके साथ मारपीट करती थी। मुल्ला बाजी ने शहरबानो को परेशान करने के लिए उससे कहा कि बड़ी मात्रा में रुई को काते और उसका धागा बनाए। पहली बार जब वह अपना काम नहीं निपटा सकी तो पीली गाय ने कि जो वास्तव में उसकी मां थी और सिरके के मटके से बाहर आई थी उसकी सहायता की।

दूसरे दिन सूर्य अभी उदय भी नहीं हुआ था कि मुल्ला बाजी ने कपास की एक गठरी के बजाए तीन गठरियां शहरबानो की दीं और पीली गाय के साथ जंगल की ओर रवाना कर दिया। लड़की कल की तरह घास पर बैठ गई और कताई शुरू कर दी। दोपहर के बाद उसने जब यह देखा कि अभी तक एक गठरी की कताई भी नहीं हो सकी है तो उसका दिल भर आया और उसने रोना शुरू कर दिया। हवा का एक तेज़ झोंका आया और अपने साथ रुई को उड़ा ले गया। शहरबानो उठी और रुई के पीछे दोड़ना शुरू कर दिया लेकिन वह उस तक नहीं पहुंच सकी और रुई एक कुएं में गिर गई, शहरबानो उसकी ने वहां पहुंच कर रोना और चिल्लाना शुरू कर दिया और कहा कि अब वह मेरे साथ क्या नहीं करेगी, अभी तक हर रोज़ मारती पीटती थी लेकिन आज तो मुझे मार ही डालेगी। इस समय गाय आगे बढ़ी और उसने इंसानों की तरह बोलना शुरू किया और कहा, मेरी बेटी डरो नहीं और कुएं के भीतर जाओ। वहां एक देव बैठा हुआ है। पहले उसे सलाम करना और उसके बाद वह जो कुछ भी तुमसे कहे उसका उलटा करना, इसलिए कि देवों का काम उलटा पलटा होता है। गाय ने शहरबानों को देव के साथ किस तरह व्यवहार करना चाहिए सब सिखा दिया। लड़की कुएं में चली गई और जब कुएं के तल पहुंची तो उसकी नज़र एक बग़ीचे पर पड़ी जिसमें एक बड़ा सा देव बैठा हुआ था। शहरबानो ने जब देव को देखा तो उसके पास गई और जिस तरह गाय ने बताया था उसे सलाम किया। देव ने कहा, हे काली आँखों और सफ़ैद दांतों वाली अगर तूने मुझे सलाम नहीं किया होता तो तुझे एक ही निवाला बनाकर खा जाता। अब बता कि तू और यहां कैसे?

यह वह जगह है जहां बहादुर और शक्तिशाली लोग आने से घबराते हैं। तू क्या चाहती है? शहरबानो बैठ गई और शुरू से आख़िर तक देव को अपनी कहानी सुनाई। देव ने कहा, सबसे पहले उठ उस पत्थर को उठा और मेरे सिर पर मार दे। शहरबानो ने वही किया जो गाय ने बताया था, तेज़ी से आगे बढ़ी और देव के सिर लिया और अपनी गोद में रख लिया और उसे प्यार करना शुरू कर दिया। देव ने पूछा मेरा सिर ज़्यादा साफ़ है या तेरी सौतेली मां का? शहरबानो ने कहा कि तुम्हारा सिर ज़्यादा साफ़ है। देव ने कहा, ठीक है, अब उठो कुदाल हाथ में लो और घर को तोड़ डालो। शहरबानो तुरंत उठी झाड़ू हाथ मं उठाई और घर को साफ़ करना शुरू कर दिया। देव ने कहा, मेरा घर अच्छा है या तुम्हारा? शहरबानो ने कहा, तुम्हारे घर से मेरे घर की क्या तुलना? हमारा घर मिट्टी और गारे से निर्मित है और तुम्हारा घर संगे मरमर से। देव ने कहा, अब जाओ और बर्तनों को तोड़ डालो। शहरबानो तुरंत गई और बर्तनों को धोकर उन्हें आईने की तरह चमका दिया। देव ने कहा, ज़रा यह बता कि तेरे बर्तन अच्छे हैं या मेरे बर्तन? शहरबानो ने कहा, ज़ाहिर तुम्हारे बर्तन अच्छे हैं, देव ने कहा बहुत अच्छे, अब जब तू इतनी समझदार है, जाओ कोने से धागे उठा लो और चलती बनो।

शहरबानो गई और उसने देखा कि रुई का धागा बन गया है और उसके पास सोने की कई थैलियां रखी हुई हैं। उसने सोने को हाथ नहीं लगाया, धागे को उठाया और देव को ख़ुदा हाफ़िज़ कहने के लिए पलटी। देव ने कहा, इतनी जल्दी में कहा जा रही है? अभी ठहरो, क्योंकि तेरा काम समाप्त नहीं हुआ है। धागे को रख दो और इस आंगन से जाओ दूसरे आंगन में और दूसरे आंगन से तीसरे आंगन कि जिसके बीच से एक पानी की नहर गुज़रती है, वहां पानी के पास बैठ जाओ। जब देखो कि पीला पानी आने लगा, उसे हाथ नहीं लगाना। जब काला पानी आने लगे तो उसे अपने सिर और आँखों पर डालना। और जब सफ़ैद पानी आने लगे तो उससे अपना चेहरा धोना। शहरबानो ने स्वीकार किया और तीसरे आंगन में पहुंचकर पानी के पास बैठ गई और काले पानी से अपना सिर और आँखों को धोया और सफ़ैद पानी से चेहरा। उसके बाद देव को ख़ुदा हाफ़िज़ कहने के लिए पलटी। देव ने कहा, जब तुझ पर कोई मुश्किल वक़्त आए मेरे पास आ जाना। शहरबानो ने आभार व्यक्त किया, धागों को उठाया और कूंए से बाहर आकर गाय को तलाश किया। सूर्यास्त हो चुका था और चारो ओर अंधेरा फैल रहा था। लेकिन शहरबानो ने देखा कि उसके पैरों के सामने उजाला है और वह आगे की ओर देख सकती है। उसने अपने चारो ओर एक नज़र डाली, लेकिन देखा कि यह रोश्नी ख़ुद उसके चेहरे से निकल रही है, जब उसने सफ़ैद पानी अपने चेहरे पर डाला था तो एक चांद उसके माथे के बीच में बन गया था और एक तारा उसकी ठोड़ी पर। शहरबानो ने सोचा कि अगर वह इस चांद और तारे के साथ घर पहुंचेगी तो मुल्लाबाजी उसे और अधिक परेशान करेगी।

इसलिए जल्दी ही उसने अपनी शाल से अपना माथा और ठोड़ी को छिपा लिया, घर पहुंची और धागों को मुल्लाबाजी को दे दिया। उसकी सौतेली मां आश्चर्य में पड़ गई कि किस तरह उसने एक दिन में तीन गठरियां रुई को कात दिया। उसके काम में कमी निकालने के इरादे से उसने धागों को उलटना पलटना शुरू कर दिया। लेकिन वह कोई कमी नहीं निकाल सकी। उसके बाद उसने शहरबानो से कहा कि घर में झाड़ू लगाए। उसने सोचा अब सही समय है कि कोई बहाना मेरे हाथ लगे और उसकी जमकर पिटाई करूं। लेकिन अभी बावरचीख़ाने के द्वार तक भी नहीं पहुंची थी कि उसने देखा कि वहां रोशनी ही रोशनी है। आश्चर्य से उसने अपने दांतों के नीचे उंगली दबा ली। धीमे धीमे आगे बढ़ी और देखा कि शहरबानो के माथे से चांद चमक रहा है और ठोड़ी से तारा। पहले से ही सुंदर थी और उसके बाद अधिक सुंदर हो गई। मुल्लाबाजी ने शहरबानो का हाथ पकड़ा और उसे कमरे में ले गई। कहा, बग़ैर मार खाए सच बोल कि यह कैसे हुआ? शहरबानो कि जो बहुत ही सादा इंसान थी उसने जो कुछ देखा और सुना था सब कह डाला। मुल्लाबाजी ने कुछ नहीं कहा और सोच में डूब गई कि कल शहरबानो के साथ अपनी बेटी को जंगल भेजेगी, ताकि उसकी लड़की भी कूएं में जाकर अपना चेहरा धोए और उसके चेहरे पर भी चांद और तारा बन जाए।