मुझसे प्यार करने वाले लोग मुझे ज़हरीला न बनने देने के लिए काफ़ी हैं

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Pratima Jaiswal
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हमारे कुछ गिने-चुने अपने लोग हमें जहरीला बनने से रोके हुए हैं। उनका होना ही हमारे अंदर जहर को हमेशा के लिए और पूरी तरह फैलने नहीं देता। हम रूखे तो हुए हैं लेकिन इतना जहरीला नहीं हो पाते कि सड़क पर घूमते किसी कुत्ते को लात मारकर अपनी कुंठा निकालें और न ही किसी भिखारी की पैदाइश को धिक्कारते हुए उन लोगों के मनहूस चेहरों को याद करें, जो हर रोज थोड़ा-थोड़ा हम में जहर भर रहे हैं।

मुझे जहरीला बनने से रोका है उन अपनों ने जिन्हें मैं जैसी भी हूं खूबसूरत नजर आती हूं। वो उस जहर को एक पल में मार देते हैं, जिन्हें मेरे शरीर या कपड़ों में कमी नजर आती है। उस जहर का ईलाज भी इन्हीं लोगों के पास है, जो मुझसे फायदों के लिए दोस्ती और जान-पहचान साधते हैं और पीठ-पीछे कुछ भी कह देने से परहेज नहीं करते।

ऐसे अनगिनत जहर जो कतरा-कतरा मुझमें हर रोज भरते जाते हैं, उन्हें रोकने के लिए उन लोगों का होना काफी है, जो मुझे प्यार करते हैं।

आप पर फब्तियां कसकर खुद को प्रोग्रेसिव और मॉर्डन दिखाने वाले, खुद कुंठा का शिकार लोग आपके शरीर, कपड़ों, लिंग, परिवार, बोली, स्वभाव, घर, क्षेत्र, जाति, धर्म, नजरिया, पेशा, विचार सबसे नफरत करने वाले, आपकी काबिलियत को कम आंकने वाले, आपकी हंसी से चिढ़ रखने वाले…अनगिनत ऐसे जहर हैं, जो आप में उतर रहे हैं लेकिन आपको प्यार करने वाले लोग उस जहर को आपके दिल-दिमाग के साथ प्रतिक्रिया नहीं करने देते। वो रोक देते हैं, उस जहर को बहने से, वो आपको जहरीला बनने नहीं देते।

धीरे-धीरे आप में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जाती है और आप पर किसी तरह के जहर का असर पड़ना बंद हो जाता है।
लेकिन जहर का साइड इफेक्ट ये है कि आपके लिए लोग अलग-अलग किस्म के जहर की शीशियां बन जाते हैं, वो चलती-फिरती जहर की वो शीशियां हैं, जो हर रोज अपनी शीशियां बदल रहे हैं, लेकिन जहर पहले जैसा दम घोंटू ही रहता है।

मुझे उन लोगों से न ही नफरत होती है और न ही शिकायत। मुझे उन लोगों से घिन्न आती है, वैसी ही घिन्न जैसी बचपन में बुखार आने पर उस पीली शीशी वाली दवाई से आती थी।

उस दवाई को झेलने के लिए नाक बंद करके एक बार में घोंट जाना पड़ता था। किसी दिन ज्यादा मन खराब होने पर उल्टी आ जाती थी। ऐसा ही कुछ इस जहर के साथ भी होता है।

जहरीला न बनने के बाद भी, मैं अपने अंदर कहीं कोने में जहर की एक पुड़िया छुपाकर रखना चाहती हूं, जो इन जहर की शीशियों से अलग होगी। ये पुड़िया उस शीशी के जहर पर काम आएगी, जो हर रोज मुझे जहरीला बनाने की कोशिश करते हैं। वो जब शीशी खोलकर मुझपर जहर उड़ेलने की कोशिश करेंगे,तो मैं उनपर पुड़िया से चुटकी भर जहर लेकर छिड़क दूंगी।
क्योंकि मैंने कहीं सुना था कि ‘जहर ही जहर को मारता है’।

फिर भी मैं पूरी तरह खुद में जहर नहीं भर पाऊंगी क्योंकि मुझसे प्यार करने वाले लोग मुझे जहरीला न बनने देने के लिए काफी हैं। वो मुझे जहरीला बनने से रोके हुए हैं।
~प्रतिमा