मुन्ना बजरंगी की हत्या, एक नाथ का नहीं इसमें ”दो नाथ” का हाथ है

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मुन्ना बजरंगी की हत्या की हत्या उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल तो है ही साथी ही प्रदेश में राजनैतिक षड्यंत्रों के तहत ‘कांटे से काँटा” निकालने की निति को भी उजागर करती है, मुन्ना बजरंगी को मारा जाना था, इसके लिए हत्या का स्थान जेल तै किया गया, यह फैसला उस वक़्त लिया गया जब मुन्ना के विरोधी उसे पुलिस हिरासत में मारने में अक्षम हो गए थे, पुलिस के ज़रिये भी उसका एनकाउंटर नहीं करवाया जा सकता था, या हो अधिकारियों ने एनकाउंटर करने से इंकार कर दिया हो, एनकाउंटर की सूरत में पुलिस पार्टी सीधे दोषी करार दे दी जाती इसलिए हत्या के लिए ‘कांटे से काँटा” निकालने के तरीके को अपनाया गया|

मुन्ना बजरंगी प्रदेश का बड़ा अपराधी था, उसकी दोस्ती दुश्मनी बड़े लोगों से थी, उसकी हत्या में बड़े ‘ऊँचे’ ‘ऊपर वाले’ लोगों का हाथ है, हत्या की तैय्यारी कई महिने पहले से की गयी होगी, सुनील राठी नामक अन्य अपराधी को हत्या करने के लिए ‘मैनेज’ किया गया होगा, सुनील राठी का मुन्ना बजरंगी सीधा कोई सम्बन्ध नहीं था, कोई यारी/दुश्मनी नहीं थी,,,तब सुनील राठी ने हत्या क्यों की,,,यह अहम् सवाल है,,,हत्या करवाने वाले/वालों ने तो अपने अपने राजनैतिक व अन्य लक्ष्यों के लिए मुन्ना को मरवाया मगर सुनील राठी ने जो हत्या की है वह,,,,,वह बड़े ”समझौते/सौदे” के आधार पर की गयी है,

”समझौते/सौदे” करने वाले कौन लोग हैं, यह जाँच का हिस्सा है, अगर जाँच सही तरीके से हुई तो मुमकिन है कि पर्दा उठे, लेकिन पूरे प्रकरण में जो देखने को मिल रहा है वह यह कि ‘मुन्ना बजरंगी’ की हत्या ‘राजनैतिक षड़यंत्र’ है और इसमें कितने ही बड़े बड़े लोग शामिल हैं,,,,एक अपराधी हरिदूवार की जेल से ट्रांसफर कर हापुड़ लाया जाता है,,,,एक को टांसिट वारंट पर झाँसी से हापुड़ पहुँचाया जाता है,,,जो हरिदूवार से आया हुआ है उसको पूरी तैय्यारी करने और प्रोग्राम बनाने में जेल के प्रशासन का सहयोग मिलता है,,,32 बोर के 32 कार्टाजे, पिस्टल जेल की बैरिक में पहुँचती है,,,

किसी भी बंदी/क़ैदी का जेल ट्रांसफर जेल अधिकारी अपने मन से नहीं कर सकते हैं, अगर किसी बंदी/क़ैदी को एक जेल से दूसरी जेल ट्रांसफर करना होता है तो उसकी अनुमति जिलाधिकारी के माध्यम से गृह सचिव स्तर से मिलती है, सुनील राठी को हरिदूवार की जेल से हापुड़ की जेल में भेजने मतलब है कि उत्तराखंड की सरकार और वहां का प्रशासन भी इसमें मददगार है

”हापुड़ जेल की जिस बैरिक में सुनील राठी को रखा गया था, उसी बैरिक में मुन्ना बजरंगी को रखा गया, मतलब कि हापुड़ की जेल के बड़े अधिकारी इस षड़यंत्र में शामिल हैं, जेल के अंदर जब भी कोई नई आमद होती है तो उसको किस बैरिक में भेजा जायेगा का फैसला जेलर स्तर का अधिकारी करता है| संवेदनशील बंदी का ख़ास ख्याल रखा जाता है

मुन्ना बजरंगी की हत्या के षड्यंत्रों को लिस्टेड करना पड़ेगा,,,,कई एंगेल, अनेक षड्यंत्रकारी इस हत्या में शामिल हैं,,,यह काम एक नाथ का नहीं इसमें ”दो नाथ” का हाथ है,,,अगर CBI अथवा न्यायिक जाँच नहीं हुई तो हो सकता है रिपोर्ट आये कि गोली मुन्ना बजरंगी ने खुद मारी थी,,,,parvez khan
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पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई। इसका ताना-बाना एक महीने से बुना जा रहा था। जांच के दौरान बागपत के अधिकारियों ने अपने वरिष्ठ अफसरों को जो बातें बताई हैं उससे उनके होश उड़ गए। सूत्रों का कहना है कि हत्या के समय राठी के चार और साथी मौके पर थे, जिन्हें राठी ने सुनियोजित तरीके से सुबह 6.15 बजे ही दूसरी बैरक से तन्हाई में बुलाया था।

एक अधिकारी ने बताया कि हत्या के समय दूसरी बैरक के चार से पांच लोगों के तन्हाई बैरक में होने की पुष्टि हुई है। यह सभी बागपत के ही रहने वाले हैं। सूत्रों का दावा है कि राठी को जेल में विशेष सुविधाएं हासिल थीं। उसे व उसके लोगों के आने-जाने पर किसी तरह की चेकिंग नहीं की जाती थी। उसके लोग जेल में मोबाइल का प्रयोग धड़ल्ले से करते थे।

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जेल परिसर में सुनील राठी की ही चलती थी। सुनील राठी के लिए खाना, कपड़ा और अन्य सामान उसके घर से आता था, जिसकी कोई जांच नहीं की जाती थी। जेल के अंदर ही नहीं बाहर भी राठी के चाहने वालों की संख्या कम नहीं है। जेल के बाहर हत्या की खबर आने पर राठी के समर्थकों का जमावड़ा शुरू हो गया। इन लोगों ने पुलिस के सामने चेतावनी दी कि सुनील राठी को कुछ नहीं होना चाहिए।

एक महीने पहले कौन मिला था राठी से?
सूत्रों की मानें तो लगभग एक महीने पहले पूर्वांचल के एक बाहुबली ने जेल के अंदर राठी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि उसी समय से बजरंगी की हत्या का ताना-बाना बुना जा रहा था। मुन्ना को पहले जून में ही बागपत की अदालत में पेश होना था, लेकिन बीमारी का हवाला देकर वह दो तारीखों पर उपस्थित नहीं हुआ। इस बार जब कोर्ट ने पेशी की तारीख तय की तो उसे हर हाल में पेश करने का फरमान सुनाया गया। सूत्रों का कहना है कि तीन दिन पहले एक अन्य व्यक्ति ने जेल में राठी से मुलाकात की। इसकी रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं है।

पुलिस ने मुन्ना के साथ रात में साथ रहने वाले विक्की सुनहरा से भी पूछताछ की है। सुनहरा ने बताया कि मुन्ना के पास कोई असलहा नहीं था। वह सुबह सवा पांच से साढ़े पांच बजे के बीच उठा था। छह बजे बैरक खुलने के बाद बाहर आया जहां, राठी से मुलाकात हुई। सुनहरा ने बताया कि वह बाथरूम चला गया इसी बीच गोलियों की तड़तड़ाहट से वह डर गया। जब बाहर आया तो देखा सामने मुन्ना की लाश पड़ी थी।

एसटीएफ को सुनील राठी ने दी ये जानकारी
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एसटीएफ ने बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के मुख्य आरोपी सुनील राठी से मंगलवार को पूछताछ की। राठी ने एसटीएफ को भी वही बात बताई है, जो स्थानीय पुलिस और जेल अधिकारियों से कही थी।

एसटीएफ के अनुसार, राठी ने कहा कि सुबह चाय के समय मुन्ना बजरंगी और उसके बीच किसी बात को लेकर कहा सुनी हुई और बजरंगी ने उसके ऊपर पिस्टल तान दी।

आत्म रक्षा के लिए उसने मुन्ना बजरंगी से पिस्टल छीन कर उसे ही मौत के घाट उतार दिया, लेकिन राठी की थ्यौरी न तो स्थानीय पुलिस के और न ही एसटीएफ के गले उतर रही है।

मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने को कहा कि उसकी पत्नी सीमा सिंह की ओर से दी गई तहरीर पर अलग से एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। पूर्व में जेल प्रशासन की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में ही इस तहरीर को शामिल कर विवेचना की जाएगी। डीजीपी ने यह जानकारी यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद मीडियाकर्मियों को दी।

उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में पुलिस से कोई चूक नहीं हुई है। पुलिस न्यायालय के आदेश का पालन कर रही थी और उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। बजरंगी को दो एम्बुलेंस और पर्याप्त पुलिस बल के साथ झांसी से बागपत जेल लाया गया था। 12 घंटे के सफर में कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि मुन्ना बजरंगी की हत्या जेल के अंदर हुई। इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से लिया है। न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेटी जांच और विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस भी इस मामले में विवेचना कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में जिसकी भी लापरवाही होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि बजरंगी की पत्नी सीमा ने तहरीर में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, पूर्व पुलिस अधिकारी जीएन सिंह, जीएन सिंह के बेटे प्रदीप सिंह समेत कई लोगों को पति की हत्या के लिए जिम्मेदार माना है।