मुसलमानों को दुशमन के धोखे में नहीं आना चाहिए, शिया सुन्नी मिलकर करें मुक़ाबला : इमामे जुमा

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तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने कहा कि इस्लामी जगत को चाहिए कि दुशमनों के मुक़ाबले में डट जाए।

तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम आयतुल्लाह मुहम्मद अली मुवह्हेदी किरमानी ने एकता सप्ताह के आगमन की बधाई देते हुए आशा जताई कि शीया और सुन्नी समुदाय आपसी एकता को मज़बूत करके इस्लामी जगत के संयुक्त दुशमनों का डटकर मुक़ाबला करेंगे।

शुक्रवार को हिजरी क़मरी कैलेंडर के रबीउल औवल महीने की 12 तारीख़ है, सुन्नी समुदाय का मत है कि पैग़म्बरे इस्लाम का जन्म इसी तारीख़ में हुआ था, शिया समुदाय का मानना है कि पैग़म्बरे इस्लाम का जन्म 17 रबीउल औवल को हुआ था। ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी की पहल पर 12 रबीउल औवल से 17 रबीउल औवल तक शीया सुन्नी एकता सप्ताह मनाया जाता है।

आयतुल्लाह मुहम्मद अली मुवह्हेदी किरमानी ने नमाज़े जुमा के ख़ुतबों में कहा कि शिया और सुन्नी मुसलमानों को दुशमन के धोखे में नहीं आना चाहिए, यदि इस्लामी जगत एकजुट हो जाए तो शत्रु उसे कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकेगा।

तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इस हफ़्ते के इमाम ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजन शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच एकता का ध्रुव साबित हो सकते हैं लेकिन कुछ मुस्लिम देशों की सरकारें दुशमन की चाल में आकर इस्लामी जगत को एकजुट होने से रोक रही हैं।

आयतुल्लाह मुहम्मद अली मुवह्हेदी किरमानी ने इलाक़े में दाइश के ख़ातमे को ईश्वरीय वचन पूरा होने का उदाहरण बताया और कहा कि क़ुरआन में ईश्वर ने वादा किया है कि असत्य मिट जाने वाला है और सत्य बाक़ी रहने वाला हे।

तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम आयतुल्लाह मुहम्मद अली मुवह्हेदी किरमानी ने कहा कि धार्मिक नेतृत्व, लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन, इस्लामी बलों और ईरान की शक्ति अब अमरीका की समझ में आ जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुशमन की साज़िशों में नहीं फंसना चाहिए बल्कि उनका डटकर मुक़ाबला करने की ज़रूरत है।