#मोदी ने रखी थी शर्त, अगर रिलायंस को पार्टनर चुना जाएगा तभी डासो को #राफ़ेल का कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा : नया ख़ुलासा

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मीडियापार्ट ने डासो एविएशन के हवाले से लिखा है कि फ़्रांसीसी कंपनी डासो के पास 36 राफ़ेल विमानों का अनुबंध पाने के लिए रिलायंस डिफ़ेंस से समझौता करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

फ्रांस की एक इनवेस्टिगेटिव वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’के मुताबिक़, फ़्रांसीसी कंपनी का कहना है कि उसके पास अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस के साथ जॉइंट वेंचर शुरू करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।

मीडियापार्ट की इस रिपोर्ट में डास्सो से प्राप्त एक दस्तावेज का हवाला देते हुए उल्लेख किया गया है कि राफ़ेल अनुबंध के लिए रिलायंस को ‘ट्रेड ऑफ’ के तौर पर पेश किया गया था। यानी अगर रिलायंस को पार्टनर चुना जाएगा, तभी उन्हें राफ़ेल का कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा।

59 हज़ार करोड़ रुपये के इस राफ़ेल सौदे में रिलायंस डिफ़ेंस डासो का मुख्य ऑफ़सेट पार्टनर है।

अगर इस खुलासे को सच माना जाये, तो यह नरेंद्र मोदी सरकार के उस दावे को ख़ारिज करता है, जिसमें उसने कहा था कि राफ़ेल सौदे में ऑफ़सेट पार्टनर के रूप में रिलायंस के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

मीडियापार्ट की रिपोर्ट के एक हिस्से में बताया गया है: ‘यह एकदम झूठा लोकार्पण था। नागपुर के एक मैदान में टेंट के नीचे ‘नींव का पत्थर’ रखा गया और ऐलान किया गया कि यह ‘भविष्य की डास्सो-रिलायंस फैक्ट्री’ के निर्माण की शुरुआत है।

मालूम हो कि इससे पहले मीडियापार्ट ने पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से बताया था कि अरबों डॉलर के इस सौदे में भारत सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को डास्सो एविएशन का साझीदार बनाने का प्रस्ताव दिया था।