मोदी-शाह के युग का अंत शुरू : रिपोर्ट, आंकड़े

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2014 में मोदी लहार पर सवार बीजेपी सत्ता में आयी थी, धीरे धीरे वह मोदी लहर सिर्फ थम गयी है बल्कि मोदी का जादू भी ख़त्म हो रहा है,विदेशों में भारत की अनेक मामलों को लेकर फ़ज़ीहत हो रही है वहीँ देश के अंदर माहौल बिगाड़ा हुआ है, चरमपंथ, सम्प्रदायकता, कट्टरपन चरम पर है, अल्पसंखयकों पर हमलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, साथ ही किसान, नौजवान, मध्यमवर्ग परेशान हैं, नौकरियां हैं नहीं, अपराध रुक नहीं रहे हैं|

नतीजे गवाह हैं कि उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी, अमित शाह- मोदी की जोड़ी के लिए लकी साबित नहीं हुए। पिछले चार सालों में जिन-जिन राज्यों में लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए हैं प्रधानमंत्री मोदी की लहर उस सीट को बचाने में असफल साबित हुई है। यहां तक कि हाल ही में बीजेपी के गढ़ बने उत्तर प्रदेश में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जलवा नहीं चल सका और वह खुद अपनी गोरखपुर और फूलपुर की सीट गंवा चुके हैं। यही नहीं बृहस्पतिवार को आ रहे उपचुनाव के नतीजे भी बीजेपी के लिए कोई तोहफा नहीं ला रहे हैं। एकबार फिर बीजेपी अपनी महत्वपूर्ण मानी जाने वाली सीट कैराना को हारती दिख रही है।

बता दें कि आज उपचुनाव वाली चार लोकसभा सीटों में यूपी की कैराना, महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया, पालघर और नगालैंड की एक-एक सीट के परिणाम बीजेपी के लिए खुशखबरी नहीं ला रहे हैं। शुरुआती रुझानों से ही बीजेपी कई सीटों पर पिछड़ती दिख रही है जिसमें कैराना, महाराष्ट्र की सीट शामिल है।
लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखे जा रहे उपचुनाव के नतीजे कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं क्योंकि सारे विपक्षी दल मिलकर तीसरे गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं और इस गठबंधन का असर यूपी में तो पिछले उपचुनाव में देखने को मिला ही था। वही असर आज भी दिखाई दे रहा है। कैराना में भाजपा को हराने के लिए विपक्षी पार्टियां रालोद उम्मीदवार का समर्थन कर रही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे देश में विपक्षी पार्टियां कैराना में भाजपा को हरा एक बड़ा संदेश देने की तरफ आगे बढ़ रही हैं।

इस चुनाव में एक बात और समझने की है कि आ रहे है परिणामों के रुझान जो भी हों लेकिन सच्चाई यही है कि इन चार सीटों में से तीन सीटें बीजेपी के खाते में थीं, जबकि नगालैंड सीट उसके सहयोगी दल के पास थी। ऐसे में बीजेपी के सामने अपनी सीटों को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती है, क्योंकि पार्टी अगर एक भी सीट हारती है तो सीधे पीएम नरेंद्र मोदी पर सवाल उठने लाजमी हैं। वहीं विपक्ष उपचुनाव जीतने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटा है।
बीजेपी को लगातार लगता रहा है झटका

2014 के बाद अभी तक 23 उपचुनाव हुए हैं। बीजेपी सिर्फ चार सीटें ही जीत सकी है और यही नहीं इन चुनावों में वह अपनी छह महत्वपूर्ण सीटें गंवा चुकी है। इन चुनावों में वह कोई एक्स्ट्रा सीट अपने खाते में शामिल करने में विफल साबित हुई है। लोकसभा चुनाव के ठीक बाद मोदी लहर में 2014 और 2016 में दो- दो सीट पर कब्जा तो किया लेकिन 2015, 2017 से लेकर मार्च 2018 में हुए उपचुनावों में बीजेपी को लगातार झटका लगता आ रहा है।

इनसीटों पर हुए उपचुनाव और ऐसे रहे परिणाम

2014
बीड, महाराष्ट्र
2014: बीजेपी
उपचुनाव में जीती बीजेपी

कंधमाल, ओडिशा
2014: बीजेडी
उपचुनाव में जीती बीजेडी

मेडक, तेलंगाना
2014, टीआरएस
उपचुनाव में जीती टीआरएस

वडोडरा, गुजरात
2014, बीजेपी
उपचुनाव में जीती बीजेपी

मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
2014, सपा
उपचुनाव में जीती सपा

2015

रतलाम, मध्यप्रदेश
2015, बीजेपी
उपचुनाव में जीती कांग्रेस

वारांगल, तेलंगाना
2014-टीआरएस
उपचुनाव में जीती टीआरएस

बांनगांव- पश्चिम बंगाल
2014- एआईटीसी
उपचुनाव में जीती एआईटीसी

2016
लखीमपुर, असम
2014- बीजेपी
उपचुनाव में जीती बीजेपी

शहडोल- मध्यप्रदेश
2014: बीजेपी
उपचुनाव में जीती बीजेपी

कूछेबहर-पश्चिम बंगाल
2014- एआईटीसी
उपचुनाव में जीती एआईटीसी

तमलुक, पश्चिम बंगाल
2014-एआइटीसी
उपचुनाव में जीती एआइटीसी

तुरा, मेघालय
2014-एनपीपी
उपचुनाव में एनपीपी

2017

अमृतसर, पंजाब
2014-कांग्रेस
उपचुनाव में जीती कांग्रेस

गुरदासपुर-पंजाब
2014- बीजेपी
उपचुनाव में जीती कांग्रेस

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर
2014-पीडीपी
उपचुनाव में जीती एनसी

मल्लपुरम-केरल
2014-आईयूएमएल
उपचुनाव में जीती आईयूएमअल

2018
अलवर, राजस्थान
2014- बीजेपी
उपचुनाव में जीती कांग्रेस

अजमेर, राजस्थान
2014-बीजेपी
उपचुनाव में जीती कांग्रेस

उलूबेरिया, पश्चिम बंगाल
2014- एआईटीसी
उपचुनाव में जीती एआईटीसी

गोरखपुर, उत्तरप्रदेश
2014- बीजेपी
उपचुनाव में जीती एसपी

फूलपुर- उत्तर प्रदेश
2014- बीजेपी
उपचुनाव में जीती सपा

अररिया, बिहार
2014- आरजेडी
उपचुनाव में जीती आरजेडी