मोहे सावन खूब सतायो साजन : प्रीत प्रतिमां

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🌸 🌸 प्रीत प्रतिमां 🌸 🌸
मोहे सावन खूब सतायो साजन,
मोहे सावन खूब सतायो
तुम परदेसी दूर बसे हो
मोरे अंग अंग अग्नि लगायो
मोहे सावन खूब सतायो
बरसें बादर बिजुरी चमके
कोयल मोर पपीहा बोले
मोरा चंचल मन भरमायो
मोहे सावन खूब सतायो
नन्हीं नन्हीं बूंदनीयों ने
बहुत ही नाच नचायो
तोरी याद में भीगा तन मन
बरखा ने मन तरसायो
मोहे सावन खूब सतायो
याद सताये जब जब तोरी
तन मन तडपे छतियां धडकें
मोरे नैनन चैन न आयो
मोहे सावन खूब सतायो
काहे गये परदेस पिया
क्यों मोरी सुध बिसरायो
बाट तकत तुमरी दिन रैन
मोरे साजन कब घर आयो
मोहे सावन खूब सतायो रे साजन
मोहे सावन खूब सतायो।

प्रीत प्रतिमां 🌸

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गर जो सुलगना हो,
गीली लकड़ियों की मांनिद,
तो कोई सीखे हम से,
किस तरह तेरी यादों से,
हम अपने ख्वाबों को,
राख किया करते हैं,
जलते हैं शब भर,
फिर खाक हुआ करते हैं,
खाक हुआ करते हैं, मगर
चिंगारीयों को भी,
ज़िंदा रखते हैं,
क्या पता कब तेरा,
सामना हो, और तू
हवा दे मेरे अरमानों को

प्रीत प्रतिमां 🌸
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जानते हो तुम बिल्कुल
मेरी तरहा हो,
आवारा, तन्हा, बंजारा
जब जब भी मैं,
ज़मीन पर चलती हूँ
तुम आसमान में
मेरा पीछा करते रहते हो,
कभी कभी लगता है कि
जैसे कदम से कदम
मिला कर चल रहे हो
और जब बैठ कर
तुम्हें निहारने लगती हूं
वो तुम्हारा थम जाना
बादलों की ओट से
मुस्कुरा कर झांकना
जैसे कह रहे हो
अब तो उठ जाओ
कब तक बैठी रहोगी
अभी तो सफर लंबा है
रात बहुत बाकी है
इससे पहले कि मेरी
चांदनी मुझे अपने साथ
ले जाये
तुम भी ~~~~~

प्रीत प्रतिमां 🌸