यदि दुबारा यह ग़लती की तो फिर तुम्हारे आंसू पोंछने वाला कोई नहीं होगा

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काला नहीं देखी हो, तो देख लीजिए।

आज फ़िल्म काला देखी। यह फ़िल्म देखने से बहुत आसानी से दर्शक को यह समझ में आता है कि देश की तमाम झुग्गी बस्तियों के साथ हमारा सिस्टम क्या कर रहा है! आदिवासी, दलित, किसानों और दबे-कुचले तबकों के साथ कैसे पेश आ रहा है !

खेती और बस्ती की ज़मीन पर फोर लेन, सिक्स लेन और स्पेशल हाइवे किनके लिए बनाए जा रहे हैं ! झुग्गी बस्तियों को विस्थापित कर स्मार्ट सिटी, बहु मंजिला पार्किंग और पार्क आदि-आदि किसके लिए बनाए जा रहे हैं !

विकास का सपना, जो दिखाया जा रहा है, उसकी हकीकत क्या है ! विकास का सपना देश का सपना है या फिर हरि दादा का सपना है ! हरि दादा कौन है ! अगर पिछले कुछ साल में हरि दादा को नहीं पहचान पाए हों ! तो फ़िल्म काला जल्दी देख लीजिए। फिर टीवी खोलते ही हरि दादा विकास की बात करते दिखाई देगा। रेडियो चालू कीजिए हरि दादा मन की बात करते सुनाई देगा ! गली के हर चौराहे पर देश के हरि दादा, गली के हरि दादा के साथ दिखाई देगा।

फ़िल्म में हरि दादा की भूमिका में नाना पाटेकर है। जोकि एक बिल्डर और नेता है। नवभारत राष्ट्रवादी पार्टी का नेता।

मैं आपको फ़िल्म की कहानी नहीं सुनाना चाहता हूं। संक्षिप्त में यही कहना चाहता हूं कि जो ग़लती पहले कर चुके हो। वह ग़लती फिर मत दोहराना । हरि दादा और उनके लग्गू-भग्गू के झांसे में मत फंसना। यदि दुबारा यह ग़लती की तो फिर तुम्हारे आंसू पोंछने वाला कोई नहीं होगा ।

असल हरि दादा को पहचानिए। आप जानते ही हैं। लेकिन स्वीकार नहीं करते हैं। क्योंकि हरि दादा डरा रहा है । कभी भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों से, कभी पड़ोसी मुल्क से। वह आपके डर को अपनी ताक़त में बदलना चाहता है। वह आपको राष्ट्रवादी और देशभक्त भक्त बनने के लिए उकसाता है। वह ख़ुद को बहुत बड़ा राष्ट्रवादी और देशभक्त मानता है। मगर देश के संविधान, क़ानून को नहीं मानता है। किसानों से, बस्ती वालों से ज़मीन छीन कर धन्ना सेठों को दे रहा है। मुखालिफत करने वाले को देशद्रोही कह मरवा देता है। उससे बचना, वह देश भक्त नहीं, वह राष्ट्रवादी नहीं। असल में वह देशद्रोहियों का प्रधान है।

एक बार हरि दादा आपको अच्छे-अच्छे सपने दिखाकर ठग चुका है। फिर आपको ठगने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। सतर्क रहने की ज़रूरत है ।

काला वाकई अद्भुत फ़िल्म है। यदि आप फ़िल्म के शौकीन नहीं है, तब भी देखिए। हरि दादा को भी काला फ़िल्म देखनी चाहिए। अनेक अड़ी-सड़ी फ़िल्म की रिलीज़ में सेंसर टांग अड़ा देता है। लेकिन यह फ़िल्म रिलीज़ हो गयी, यह आश्चर्यजनक है। इस फ़िल्म का गांव-गांव और बस्ती प्रर्दशन होना चाहिए। काश ! यह मेरे बस में होता।

मैं यहां काला की तस्वीर लगा रहा हूं, लेकिन हरि दादा की आप लगाइए। अपनी गली के हरि दादा से लेकर दुनिया के हरि दादा तक की तस्वीर लगा सकते हैं। संभव है कि कुछ की नज़र में हरि दादा कामन होगा और कुछ की नज़र में अलग-अलग होंगे। इस तरह हम एकाधिक हरि दादा को जान सकेंगे। आप हरि दादा का कोई क़िस्सा भी सुना सकते हैं।

– Satya Patel