“यहूदी देश” के नस्लभेदी क़ानून की प्रति को इस्राईली संसद में फाड़ा गया : देखें वीडियो

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इस्राईल की संसद नेसेट में “यहूदी राष्ट्र का देश” नामक पास हुए क़ानून का अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से विरोध जारी है। इस परिप्रेक्ष्य में योरोपीय संघ ने इस्राईली संसद में पारित क़ानून पर चिंता जतायी और इसे संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।

ज़ायोनी संसद ने व्यापक विरोध के बावजूद 19 जुलाई को “यहूदी देश” नामक नस्लभेदी बिल को पारित कर उसे क़ानून का रूप दे दिया।

इ्सराईली संसद में अरब सांसदों ने इस कानून का भरपूर विरोध और इसकी प्रतियां फाड़ी किंतु उसके बावजूद यह कानून पारित हो गया।

इस क़ानून के अनुसार, अतिग्रहित फ़िलिस्तीन की सारी भूमि ज़ायोनियों के लिए है और फिलिस्तीनियों को सभी नागरिक व मानवीय अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। इसी तरह हिब्रू ज़बान को आधिकारिक ज़बान घोषित किया गया है। इस क़ानून में बैतुल मुक़द्दस को ज़ायोनी शासन की राजधानी घोषित करने के अलावा ज़ायोनी कॉलोनियों के विस्तार को राष्ट्रीय मूल्य कहा गया है और मौजूदा कॉलोनियों को बेहतर करने और नई कॉलोनियों के निर्माण का प्रावधान रखा गया है।

हालांकि फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की नस्लभेदी कार्यवाही वर्षों से जारी है लेकिन हालिया महीनों में इस्राईल को अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के समर्थन और अमरीका की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद, फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की कार्यवाहियों में तेज़ी आयी है। ट्रम्प ने मई में अमरीकी दूतावास को बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित करने का आदेश देकर और इस्राईल के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद से निकलकर यह दर्शा दिया कि वह बहुत पहले से ज़ायोनी शासन का मुख्य घटक व समर्थक है।

“यहूदी देश” नामक क़ानून का पारित होना, अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व सिद्धांतों की अनदेखी और फ़िलिस्तीनियों के संबंध में मानवाधिकार के उल्लंघन व नस्लभेद का स्पष्ट नमूना पेश करता है। ज़ायोनी संसद के सदस्य अहमद तय्यबी के शब्दों में इस क़ानून का पारित होना अतिग्रहित फ़िलिस्तीन में प्रजातंत्र की मौत है।

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