‘ये बच्चा किस का है’,,,,होगा सरपंच का डीएनए टेस्ट!!!

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राजकोट।आदमी अपने किये पर केसा पहन सकता है यह उसे ग़लत काम करते वक़्त समझ में नहीं आता है, क्या सच है और क्या झूठ यह ऊपर वाला या जिस के मामला होता है के आलावा कोई नहीं जानता है पर आज के समय में विज्ञानं ने बहुत तरक्की कर ली है, और विज्ञानं के ज्ञान के कारण हकीकत सामने आ जाती है, अपनी तरह के पहले मामले में, गुजरात में अमरेली जिले के एक गांव की महिला सरपंच से डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहा गया है, जिससे यह साबित हो सके कि वह तीसरी बच्ची की मां नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो वह पद के लिए अयोग्य घोषित कर दी जाएगी। जिला विकास अधिकारी ने पिछले हफ्ते तोरी गांव की निर्वाचित सरपंच ज्योति राठौर को यह टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं।

ज्योति पिछले साल 29 दिसंबर को अमरेली जिले के कूकावाव तालुका स्थित तोरी गांव की सरपंच चुनी गई थीं। उनसे तालुका विकास अधिकारी (टीडीओ) एनपी मालवीय के सस्पेंशन ऑर्डर को चैलेंज करने के बाद डीएनए टेस्ट करवाने को कहा गया है। मालवीय ने ज्योति को बाला राठौर की एक शिकायत के बाद सस्पेंड किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ज्योति 6 साल की एक बच्ची की मां हैं, जो उनकी तीसरी संतान है।

2 से ज्यादा संतान होने पर अयोग्य
आरोप है कि सरपंच ने बच्ची की मां का नाम नीता और पिता का नाम भारत दर्ज करवाया है। पंचायती राज ऐक्ट के मुताबिक दो से ज्यादा संतानें होने पर सरपंच को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।

शिकायत करने वाले बालाभाई राठौर ने कहा, ‘नीता ज्योति का ही दूसरा नाम है और पिता का नाम भारतभाई भी फर्जी है। ऐसे कागज तीसरे बच्चे की पहचान छुपाने के लिए तैयार किए गए हैं। मुझे भरोसा है कि अगर ठीक से डीएनए टेस्ट हुआ तो साबित हो जाएगा कि वह ज्योति की बेटी है।’

दस्तावेजों से छेड़छाड़?
टीडीओ एनपी मालवीय ने कहा कि डॉक्युमेंट्स के वेरिफिकेशन के बाद ही मैंने उसे अयोग्य घोषित किया था, जिसके बाद मेरे ऑर्डर को डीडीओ के सामने चुनौती दी गई।

डीडीओ का कहना है कि सिर्फ शक के आधार पर एक चुने हुए व्यक्ति को हटाया नहीं जा सकता। कागजों से छेड़छाड़ की जा सकती है लेकिन डीएनए रिजल्ट्स के साथ नहीं। इससे सब साफ हो जाएगा। बता दें, ज्यादातर मामलों में डीएनए टेस्ट संतान का पिता साबित करने के लिए किए जाते हैं, यह अपनी तरह का पहला मामला है जब मातृत्व साबित करने के लिए इस टेस्ट की मदद ली जाएगी।