रमज़ान में बीवी से सोहबत ‘Sex’ करना जाएज़ है या नहीं; पढे!

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Sikander Kaymkhani
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रमज़ान उल मुबारक का पाक महीना अल्लाह तआला की जानिब से बन्दों के लिए नेकियां कमाने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है! इस महीने में अल्लाह ताला अपनी रहमतों में बढ़ोतरी कर देता है! नफ़िल नमाज़ का सवाब फ़र्ज़ के बराबर हो जाता है और फ़र्ज़ का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है! लेकिन ज़िन्दगी के कुछ ज़रूरी मसाइल का ख्याल रखना बेइंतहा ज़रूरी हैं!

रमज़ान के महीने में ज़िन्दगी की तरतीब भी बदल जाती है और इंसान को अपनी नफ़्स पर काबू करने का हुक्म दिया गया है! ऐसे कुछ मामले ऐसे होते हैं जो आम दिनों जाइज़ होते हैं लेकिन रमज़ान में उनको नहीं कर सकते हैं उन्ही में से एक बीवी के साथ सोहबत या सेक्स करना भी है!
बीवी के साथ सोहबत के दौरान इन बातों का रखें ख्याल…
1- रोज़े के दौरान (यानि सेहरी से लेकर इफ़्तार होने तक) बीवी के साथ सोहबत नहीं की जा सकती है! अगर रोज़ा के दौरान सोहबत की तो रोज़ा टूट जायेगा!
2- इफ़्तार के बाद से लेकर सेहरी ख़त्म होने से पहले तक बीवी के साथ सोहबत की जा सकती है!
3- रोज़ा के दौरान बोसा लेने से भी परहेज़ करना चाहिए लेकिन अगर ले लिया जाये तो रोज़ा नहीं टूटता है लेकिन मुंह में थूक न जाये! लेकिन बोसा देने की नियत लज़्ज़त हासिल करना नहीं होना चाहिए!