राखी विशेष : हिन्दू रानी का एक मुसलमान नवाब को अपना भाई मानना

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Shamsher Ali Khan
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( राखी विशेष )


सतरावी शताब्दी में रानी कमला पति एक गौड़ क़बीले के कियाराम नामक गौड़ की बहुत हसीन ख़ूबसूरत लड़की थी गौड़ राजा निज़ाम शाह ने उनकी सुन्दरता से मोहित होकर उन्हें अपनी रानी बना लिया निज़ाम शाह रानी कमलापती जिसकी सुन्दरता की कोई मिसाल नहीं थी वो अपने पति के साथ क़िला गिन्नौर में रहती थी ।

एक बार राजा निज़ाम शाह गौड़ की लड़ाई चैनपुर बाड़ी के गौड़ राजा से हुई गौड़ राजा ने एक साजिश रची कि निज़ाम शाह के रिश्तेदारो को मिला लिया और निज़ाम शाह को उनके ज़रिए ज़हर दे के मार डाला उस समय निज़ाम शाह का बहुत कम उम्र का एक बेटा नवलशाह रानी कमलापति से था

निज़ामशाह की मौत के बाद रानी को अपनी और अपने मासूम बच्चे की चिन्ता सताने लगी पहले तो रानी ने बहुत हिम्मत जुटाई लेकिन सुहाग का गम बच्चे की चिन्ता और दुश्मनों की कड़वी निगाहो के आगे वह अपने साहस को बाक़ी नहीं रख पाई और अपनी अपने बच्चे की जान बचाकर भोपाल में महल रानी कमलापति ( वर्तमान में कमला पार्क ) में रहने आ गई रानी को अपने सुहाग की मौत का दुख बहुत सताता था लेकिन वो अकेली महिला बदला लेने की स्थित में नहीं थी वो उचित समय का इन्तज़ार कर रही थी ।

उधर नवाब सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा एक अफगानी पठान मुल्क मालवा में अपनी तलवार की चमक दिखाते ओर अपनी वीरता का लोहा मनवाते हुए इस्लाम नगर ( भोपाल से 15 k.m. दूर ) को अपने क़ब्ज़े में कर के हुकूमत स्थापित कर चुके थे उस समय उनकी बहादुरी साहस और ईमानदारी की चर्चा चारों और थी ।

रानी को जब सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा की बहादुरी और ईमानदारी की ख़बर मिली तो उसके मन में अपने पति की मौत का बदला लेने की भावना दोबारा जाग उठी उसने सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा को मिलने अपने कमलापति महल बुलाया उसने अपनी दुख भरी दास्तान सुनाई और अपने सुहाग का बदला लेने के लिए कुछ ख़र्चा देने के अनुबंध के साथ उनको ज़िम्मेदारी सौंपी ।

रानी कमलापति की दास्तान सुन कर सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा भावुक हो उठे वह पूर्व से ही मैदाने जंग के माहिर तथा युद्ध स्थलों के शेर थे ।
उन्होंने अपनी मुंह बोली बहन के सुहाग का बदला लेने के लिए चैनपुर बाड़ी के राजा पर धावा बोल दिया उन्होंने अपनी वीरता के साथ राजा को हरा दिया और राखी के दिन अपनी बहन को उसका सर काटकर उपहार में दिया ।उनकी इस बहादुरी और अपने सुहाग के बदले की आग बुझा कर रानी बहुत खुश हुई ।

ये भाई बहन का रिश्ता मरते दम तक चला लेकिन रानी अपने भाई से पर्दा करती थी नवाब सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा ने भाई होने के नाते रानी से पर्दा ना करने को कहा लेकिन वो कभी सामने नहीं आई उस पर सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा ने अपनी मुंह बोली बहन रानी कमलापति को अपनी मां के रूप में माना ।
रानी ने उनके ज़रिए दिए गए सम्मान का बहुत ही आदर किया और सरदार दोस्त मोहम्मद ख़ा ने भी उनकी मर्यादा का सम्मान करते हुए कभी पर्दा नहीं तोड़ा ।

हिन्दू रानी का एक मुसलमान नवाब को अपना भाई मानना तथा मुसलमान नवाब का एक हिन्दू रानी को अपनी बहन स्वीकार कर के उसे मां का सम्मान देना और बहन के सुहाग का बदला लेने के लिए अपनी तथा सेना की जान जोखम मे डालना जहां हिन्दू मुस्लिम बहन भाई के पाक रिश्तों का अभूतपूर्व उदाहरण है वहीं हिन्दुस्तान के पूर्वजों की एकता की मिसाल भी है यह इस विशाल देश के हर धर्म की अवाम को प्यार और भाई चारे का पैगाम देती है|
किसी के ज़ख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा,
अगर बहनें नहीं होंगी तो #राखी कौन बांधेगा ?