राम की मूर्ति बन कैसे सकती है, राम के चेहरे की कोई फ़ोटो तो है नहीं?

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प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति स्थापित की है जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने दीपावली पर अयोध्या पहुँच कर एलान किया कि वह राम की मूर्ति बांयेंगे, जो की सरयू नदी के पास लगेगी, वैसे भारत आस्थावान देश है, आस्था के लिए साक्षात् कुछ भी होना ज़रूरी नहीं है, आस्था, केवल कल्पना पर आधारित होती है, जैसे कि खुद किसी वस्तु, शहर, आदि के सम्बन्ध में सोच कर कोई ख़याल बना लेना, भारत में हनुमान, शिव, ब्रह्मा आदि सभी भगवानों की मूर्तियां मौजूद हैं, राम भगवन भारत की बहुत बड़ी आबादी के भगवान हैं, हिन्दी भाषी राज्यों में रामचंद्र जी, श्री कृष्णा, काली, भवानी अनेक भगवान हैं, हिन्दी भाषी भारत राजपूत बाहुल्य, अर्थात राजपूतों के प्रभाव का इलाका है यहाँ के लगभग सभी भगवान् ‘राजपूत/ठाकुर’ जाति से हैं, इसका भी कारण है, हिन्दी भाषी इस इलाके में राजपूत राजे, महराजे, जागीरदार, ज़मीदार, मनसबदार होते थे/हैं, ऐसे में ब्राह्मण अगर खुद भगवान् बनने की सोचते तो फिर ठाकुर साहब के ‘लट्ठ’ से कौन बचता, इसलिए माना जाता है कि ब्राह्मणों ने राजपूतों को भगवान् और खुद को जिजमान बना लिया, इसका भी फायदा था, जिस किसी को भी दंड देना होता ब्राह्मण को ठाकुर साहब से केवल उसकी शिकायत करना होती थी बाकि का सारा काम ठाकुर के ‘लठैत’ कर देते थे, इस तरह ब्राह्मण वर्ग ठाकुरों को अपनी ढाल बना कर काम लेते रहे|

यह जो कहानी है इसका आधार मेरी आस्था है, ख्याल, मैथमैटिकल कैलकुलेशन है, मेरी आस्था का सभी को सम्मान करना चाहिए

परवेज़ ख़ान

इंस्पीरेशन : Pradeep Kasni IAS office haryana
राम की मूर्ति बन कैसे सकती है : राम के चेहरे की कोई फ़ोटोग्राफ न है !

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