राहुल गांधी वैचारिक दिवालिएपन का शिकार हैं : भाजपा

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भाजपा ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सीधे जवाब मांगा है। भाजपा के मीडिया विभाग के प्रभारी अनिल बलूनी ने लिखित विज्ञप्ति जारी करके कांग्रेस अध्यक्ष को कठघरे में खड़ा किया है। सात सवालों की फेहरिस्त के साथ अनिल बलूनी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर वैचारिक दिवालिएपन का आरोप लगाया है।

सवाल नंबर एक- भाजपा ने पूछा है कि क्या फरवरी 2011 में किंग फिशर एयर लाइंस को मुसीबत से निकालने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तरीके निकालने संबंधी बयान नहीं दिया था?

सवाल नंबर दो- क्या 2010-2013 तक विजय माल्या ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कई मेल नहीं किए और इसके बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने नियम कायदे ताक पर रखकर किंग फिशर एयरलाइंस को लोन मामले में राहत नहीं पहुंचाई थी?

सवाल नंबर तीन- क्या सरकार द्वारा राहत मिलने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर विजय माल्या ने उन्हें धन्यवाद नहीं दिया था?

सवाल नंबर चार- क्या यह सही नहीं है कि 2012 में यूपीए-2 सरकार ने किंग फिशर एयरलाइंस के फ्रीज्ड अकाऊंट को फ्री किया और बेलआऊट पैकेज को भी ग्रांट किया। जिसके बाद स्टेट बैंक ने किंग फिशर को 1500 करोड़ ग्रांट किए थे। जबकि लगातार घाटे में चल रहे स्टेट बैंक के अकाऊंट को सील कर दिया गया था?

सवाल नंबर पांच- क्या तत्कालीन नागर विमानन मंत्री वायलार रवि ने विजय माल्या से भेंट करके उनकी कंपनी को बैंको से सहायता दिलाने का आस्वासन नहीं दिया था?

सवाल नंबर छह- क्या यह सही नहीं है कि किंग फिशर को इस तरह की राहत देने के एवज में कांग्रेस की तत्कालीन अद्यक्ष सोनिया गांधी और वर्तमान अद्यक्ष राहुल गांधी मुफ्त में बिजनेस क्लास में यात्रा नहीं करते थे?

सवाल नंबर सात- क्या यह सही नहीं है कि विजय माल्या की कंपनी को अधिकतर ऋण सोनिया-मनमोहन सरकार के समय में ही दिए गए हैं?

वैचारिक दिवालिएपन के शिकार राहुल गांधी- अनिल बलूनी
अनिल बलूनी ने कहा कि क्या यह भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता। क्या सोनिया-मनमोहन सिंह की सरकार विजय माल्या और उनकी कंपनी को पाल-पोस नहीं रही थी। आखिर कांग्रेस अध्यक्ष इसका जवाब क्यों नहीं देते? बलूनी ने कहा कि दरअसल राहुल गांधी वैचारिक दिवालिएपन का शिकार हैं। उन्हें खुद नहीं पता होता कि वह कब क्या बोलते, क्या करते और क्या समझते हैं?