रोज़ा तोड़कर जावेद आलम ने बचाई 8 साल के ”पुनीत” की जान

Posted by

Sagar_parvez
===========

जयपुर।कहीं दूर रेगिस्तानी इलाके में आपका गला सूखा हुआ है और दूर दूर तक आपको पानी का नामो निशान ना दिखाई दे रहा हो, तो आपकी जान पर बन आएगी। आप ये सोचोगे कि कोई भी फरिश्ता के तरह आए और आपकी प्यास की इस तड़प को खत्म करके चला जाए। आपकी ये दुआ कबूल हो जाए और कोई शख्स आपको पानी के साथा आता नज़र आए तो आप बिना उससे कुछ पूछे सीधा पानी ही मांगोगे।

या फिर पहले ऐसा करोगे कि उसका नाम पूछ कर उसके ज़ात या मज़हब का पता लगाया जाए। फिर ये जब साबित हो जाए कि फलाना इंसान आपकी इच्छानुसार का है तभी आप उसके पास रखा पानी पिएंगे। आप हरगिज़ ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि ये बात उस वक्त अगर आप सोचें तो शायद आपको मौत भी आ जाए, प्यास के मारे।

जब बचाने के लिए किसी भी रंग, ज़ात, मज़हब का इंसान आपके पास आए तो आपको कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि यहां पर आपकी जान जाने का डर आपको है। शायद यही चीज़ और सोच आप आम समय में भी रख सकते हैं।

बिहार के गोपालगंज में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। हिमोगलोबिन की कमी से जूझ रहे भूपेंद्र कुमार के 8 साल के बेटे को तत्काल खून की ज़रुरत थी। हिमोग्लोबिन की कमी से खून की ज़रुरत होती है।

उस समय गोपालगंज सदर अस्पताल में A+ खून की उपलब्धता नहीं थी और ना ही पुनीत के परिवार मे किसी का भी खून पुनीत के बल्ड ग्रुप से मैच कर रहा था। ऐसे में अस्पताल में काम करने वाले एक स्वीपर ने किसी बल्ड डोनेटिंग सोसाइटी का नाम पुनीत के परिवार वालों को बताया और परुवार पहुंचा उस ब्लड ग्रुप सोसाइटी के पास।

आनन फानन में पुनीत के पित भूपेंद्र पहुंचे, उस बल्ड ग्रुप सोसाइटी के पास। पिता ने एक सदस्य अनवर हुसैन से बात की जिन्होंने बाद में जावेद आलम शख्स से बात की, जिनका ब्लड ग्रुप पुनीत के बल्ड ग्रुप से मैच करता था।

लेकिन दिक्कत इस बात की थी कि रमज़ान का महीना चल रहा है और जावेद भी उस वक्त रोज़ा से थे। डॉक्टरों ने कहा कि रक्त दान करने से पहले कुछ खाना ज़रुरी है। ऐसे में पुनीत ने इंसानिय को धर्म से परे रखने का फैसला किया और अपना रोज़ा तोड़कर बच्चे की जान बचाने का फैसला किया।

जावेद चाहता तो वो भी ये कह सकता था कि उसके लिए रोज़ा ज़्यादा ज़रुरी है, ना कि किसी की जान बचाना। जावेद ने ये साफ संदेश दिया है कि खुदा इस बात से खुश नहीं होगा कि वो दिन भर भूखा है, खुदा तो इस बात से खुश होगा कि उसने अपना खून देकर किसी की जान बचाने वाला एक जाबांज़ काम किया है।

आज पुनीत के रगों में खुद के खून के साथ साथ जावेद का खून भी बह रहा है, जो ये साबित करता है कि इंसान, बस इंसान ही होता है। वो ना तो हिंदु होता और ना ही मुसलमान होता है।