लीरा में मची उथल पुथल को रोकने के लिए क़तर तुर्की में 15 अरब डालर का निवेश करेगा!

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इस समय अमरीका और तुर्की के बीच बुरी तरह से ठनी हुई है। इस बीच क़तर के शासक शैख़ तमीम बिन हमद ने अंकारा दौरे पर तुर्की का खुलकर साथ देने का इशारा दिया है।

तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान से तीन घंटे की लंबी बातचीत के बाद शैख़ तमीम ने कहा कि उनका देश तुर्की की अर्थ व्यवस्था को सहारा देने के लिए 15 अरब डालर का प्रत्यक्ष निवेश करेगा ताकि तुर्क करेन्सी लीरा में मची उथल पुथल को रोका जा सके।

दोहा सरकार ने तुर्की को एसे समय सहारा दिया है जब अमरीका के ट्रम्प प्रशासन की ओर से तुर्की के ख़िलाफ़ भयानक आर्थिक हमला शुरू कर दिया है ताकि तुर्की की अर्थ व्यवस्था ध्वस्त हो जाए और लीरा बहुत कमज़ोर हो जाए। ट्रम्प प्रशासन ने अमरीका निर्यात होने वाले तुर्क उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर दुगना कर दिया है। तुर्की से अमरीका को निर्यात किए जाने वाले स्टील और लोहे पर 50 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया है।

तुर्क प्रशासन ने जवाबी कार्यवाही करते हुए अमरीकी उत्पादों पर इतना ही टैक्स लगा दिया है तथा अमरीका से समस्त इलेक्ट्रानिक उत्पादों का आयात रोक दिया है तथा लीरा को संभालने के लिए कुछ क़दम उठाए हैं जिसके नतीजे में लीरा के मूल्य में लगातार जारी गिरवट को रोकने में सफलता मिली है। लीरा के मूल्य में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और विशेषज्ञों का कहना है कि क़तर की ओर से 15 अरब डालर के निवेश के बाद लीरा की स्थिति में और भी सुधार आएगा।

तुर्क राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहीम क़ालिन ने ट्वीट किया कि तुर्की और क़तर के संबंध सच्ची दोस्ती के आधार पर केन्द्रित हैं मगर उन्होंने यह नहीं बताया कि क़तर का यह निवेश किस तरह वितरित किया जाएगा।

क़तर ने इस समय तुर्की की अर्थ व्यवस्था को सहारा देने के लिए जो क़दम उठाया है वह कठिन घड़ी में सहारा देने के तुर्की के एहसान का जवाब है। लगभग दो साल पहले जब क़तर पर सऊदी अरब, इमारात, बहरैन और मिस्र ने प्रतिबंध लगाया तो तुर्की ने क़तर के लिए वायु संपर्क पुल बना दिया था और क़तर की ज़रूरत का सारा सामान सप्लाई किया था।

यही नहीं तुर्की ने क़तर में सैनिक छावनी बनाई जिसमें इस समय तुर्की के लगभग 35 हज़ार सैनिक मौजूद हैं। इस तरह तुर्की ने क़तर में सत्ता परिवर्तन की सऊदी अरब की योजना को नाकाम बनाया था।

इस कठिन समय में क़तर के शासक की तुर्की यात्रा और 15 अरब डालर कर निवेश करने की घोषणा के बाद क़तर के दुशमन चारों देशों की तुर्की से नफ़रत और बढ़ जाएगी विशेषकर इसलिए भी कि तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने इनमें से कुछ देशों पर ढंके छिपे शब्दों में आरोप भी लगाया है कि वह अमरीका की ओर से छेड़े गए आर्थिक युद्ध में शामिल हैं।

तुर्क अर्थ व्यवस्था की रगों में 15 अरब डालर की रक़म इंजेक्ट करने से तुर्की में क़तर की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और तुर्की का समर्थन करने वाले अरब व इस्लामी देशों में भी क़तर का समर्थन बढ़ेगा विशेषकर इस समय जब अमरीका ने एक इस्लामी देश को निशाना है लेकिन यह भी संभव है कि इससे अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की नाराज़गी बढ़ जाए। क्योंकि तुर्क अर्थ व्यवस्थ को ध्वस्त कर देने की ट्रम्प की साज़िश क़तर के इस फ़ैसले से नाकाम हो सकती है।

फिलहाल तो अमरीका की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन बहरहाल तुर्की को इस कठिन घड़ी में क़तर से बहुत बड़ा सहारा मिला है जिसके महत्व से तुर्क राष्ट्रपति पूरी तरह अवगत हैं।

साभार रायुल यौम