संघ एक आतंकवादी संगठन है, यह बात अब जग ज़ाहिर हो चुकी है : यह रहे सबूत

Posted by

राष्ट्रीय स्वम सेवक संघ ‘आरएसएस’ भारत में क्या कर रहा है, क्या करता रहा है, क्या करना चाहता है,,,यह जब किसी आरएसएस नेता या कार्यकर्त्ता से पूंछा जाये तो उसका जवाब वह बहुत ही विनमृता, मिठास के साथ ‘देश की सेवा’ बतायेगा, संघ के लोग ट्रेनेड होते हैं, उन्हें अच्छे से हर बात बताई और समझायी जाती है, मोदी की सरकार बनने के बाद आरएसएस का कद बहुत ऊँचा हो गया है, संघ का अपना सारा काम रहस्य्मय तरीके से चलता है, यह रहस्य न सिर्फ जाँच का विषय है बल्कि बहुत ही अधिक संवेनशील विषय है, संघ चिट एंड फण्ड में रेजिस्टर्ड नहीं है, संघ का अपना कोई बैंक खाता नहीं है,,,जाँच की शुरुवात संघ का रजिस्ट्रशन न होना से होनी चाहिए,,,,बैंक खाता क्यों नहीं है जबकि अब तो खुद मोदी सरकार जन-जन के खाते खुलवाने में लगी है,,,संघ के प्राइवेट फाइनेंसर्स कौन हैं, कौन हैं वह लोग जो संघ के बड़े बड़े कार्यक्रमों के खर्चों का बोझा उठाते हैं, वह लोग क्यों उठाते हैं, कब से यह काम कर रहे हैं, उनके अपने सोर्स क्या हैं, उनके परिवार वालों की अब, 15 साल पहले, 40 साल पहले आर्थिक स्थिति कैसी थी,,,

2005 में नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय पर आतंवादी हमला हुआ था, हमले में एक एम्बेसडर कार का इस्तेमाल हुआ था, जो आतंकवादी हमला करने आये थे, उन्हें वहां सुरक्षा कर्मियों ने बड़ी बहादुरी से मुकाबला करते हुए मार गिराया था, बताया गया कि यह कुख्यात आतंकवादी थे और इनके ‘तार’ विदेशों से जुड़े हुए थे, उत्तर प्रदेश में इस घटना के अगले ही दिन राजधानी लखनऊ में ‘सालार’ नाम के वयक्ति को STF ने मार गिराया था, जो कि खतरनाक आतंकवादी था, यह बात खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने मीडिया को बताई थी,,,,कि लखनऊ में मारे गए आतंकवादी के सम्बन्ध नागपुर आरएसएस मुख्यालय पर हमले में मारे गए आतंकवादियों से थे,,,,उक्त घटना की जाँच महराष्ट्र हाई कोर्ट के जज करते हैं,,,रिपोर्ट आती है ”नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पर हुआ हमला फ़र्ज़ी था’,,,यहाँ अहम् बात यह है कि वह हमला सच में ही फ़र्ज़ी था और जो लोग आतंकवादी बता कर मारे गए थे वह मध्यप्रदेश के मजदुर थे,,,तो लखनऊ में जो ‘सालार’ मारा गया था,,,उस के सम्बन्ध मजदूरों से हुए,,,जब उसके सम्बन्ध मजदूरों से थे तो वह आतंकवादी कहाँ से हुआ,,,यह मुलायम सिंह और उत्तर प्रदेश की STF अधिक जानते होंगे,,,पूरी घटना में निष्कर्ष यह है कि ‘वारदात’ को फ्रेम किया गया था,,,किसने किया था, क्यों किया था,,,यह समझना कोई मुश्किल नहीं,,,

आरएसएस के लोग शहरों में तलवार, त्रिशूल, लाठी, बंदूक, राइफल, एयर गन, 30 कार्बाइन जैसे हथियारों से ट्रेनिंग देते हैं, और जंगल में ”वो’ वाली ट्रेनिंग देते हैं, जिसमे हैंडग्रांइड, 47, LMG, SLR आदि आदि हथियार चलना सिखाये जाते हैं,,,यह ‘ट्रेनिंग’ किस लिए दी जाती है, इन सेवकों को किसी युद्ध में भाग लेने तो जाना होता नहीं है, कहीं सरहद पर मोर्चा भी लेना होता है,,,IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) बड़े काबिल लोग होते हैं इस संसथान में, इन काबिल लोगों को संघ के आतंकवाद की कभी भनक नहीं लगी,,,, ‘दाल’,,,,में काला तलाश करने वाली बात नहीं है,,,बात यह है कि भारत में आतंकवाद के नाम पर जो हुआ वह ‘इन सबकी’ मिली भगत से हुआ और एक वर्ग विशेष के खिलाफ हुआ,,,आरएसएस जैसा चाहता था वैसा हुआ, सरकारी तंत्र और संघ के ‘आतंक’ ने मुसलमानों को तबाह कर दिया|

यह कोई भेद नहीं रहा है कि भारत में जो भी आतंकवादी घटनाएं पूर्व में घटित हुईं वह आरएसएस, इंटेलिजेंस एजेंसीज, मोसाद के साझा कार्यक्रम थे, संघ के आतंकवाद का शिकार मुसलमानों को बनाया गया, यह काम बहुत प्लानिंग के साथ सरकारों की मंशा से एजेंसियों और संघ ने अंजाम दिया था,

संघ एक आतंकवादी संगठन है, यह बात अब जग ज़ाहिर हो चुकी है यह अलग बात है की मोदी सरकार अपना असर इस्तेमाल कर के सारे आरोपियों को बचा चुकी है और अब वह क्लीन हैं, फिर भी खेल तो सबकी समझ में आ चुका है|

आरएसएस के आतंकवादी होने के साक्ष्य उपलब्ध हैं, गवाह उपलब्ध हैं, ताकात, सेटिंग से बच तो गए लेकिन जनता सच्चाई जान चुकी है…parvez khan

======================


आरएसएस का असली मकसद ब्राम्हण राष्ट्र बनाना है न कि हिन्दू राष्ट्र।

 

एक दो नहीं 17 जगह की कोर्ट में दायर चार्जशीट के अनुसार आरएसएस आतंकवादी संघठन है। आरएसएस, अभिनव भारत और वन्दे मातरम के ब्राह्मणों ने किये बम ब्लास्ट के आंकड़े।

१ अजमेर शरीफ, राजस्थान २००६
२ मक्का मस्जित, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद २००६
३ समझौता एक्सप्रेस २००६
४ मालेगाव, महाराष्ट्र २००६
५ मालेगाव महाराष्ट्र २००८
६ मोडासा, गुजरात २००८
७ नांदेड़, महाराष्ट्र २००६
८ परभणी, महाराष्ट्र २००३
९ जालाना, महाराष्ट्र २००४
१० पूर्णा, महाराष्ट्र २००४
११ कानपुर, यूपी २००८
१२ कन्नूर, केरल २००८
१३ तेन काशी, तमिलनाडु २००८
१४ पनवेल, महाराष्ट्र २००८
१५ ठाणे, महाराष्ट्र २००८
१६ वाशी, नवी मंबई, महाराष्ट्र २००९
१७ मडगाव, गोवा २०१०

अब इन बम ब्लास्ट में शामिल ब्राम्हणो की लिस्ट :

१ सुनील जोशी – मऊ, मध्य प्रदेश का आरएसएस का प्रचार प्रमुख १९९० से २००३

२ संदीप डांगे – आरएसएस का प्रचार प्रमुख :शाजापुर, मध्य प्रदेश, २००५ से २००८

३ देवेन्द्र गुप्ता जामताड़ा झारखण्ड का आरएसएस का जिला प्रचार प्रमुख

४ लोकेश शर्मा -आरएसएस का नगर कार्यवाहक देवगढ़

५ चंद्रकांत लावे – आरएसएस का जिला प्रचार प्रमुख: शाजापुर, मध्य प्रदेश, २००८ से २०१०

६ स्वामी असिमांंनन्द – आरएसएस का सबसे पुराना और सर्वोच्च नेता

७ राजेंद्र उर्फ़ समुन्दर – आरएसएस वर्ग विस्तारक

८ मुकेश वासनी – गोधरा का आरएसएस का कार्यकर्त्ता

९ रामजी कालसांगरा – आरएसएस का कार्यकर्त्ता

१० कमल चौहांन – आरएसएस का कार्यकर्ता

११ साध्वी प्रज्ञा सिँघ – आरएसएस की कार्यकर्ता जो वन्दे मातरम और अभिनव भारत से जुडी है

१२ राजेंद्र चौधरी उर्फ़ रामबालक दास – आरएसएस का कार्यकर्ता

१३ धन सिंह उर्फ़ लक्ष्मण – आरएसएस का कार्यकर्ता

१४ राम मनोहर कुमार सिंह

१५ तेज राम उर्फ़ रामजी उर्फ़ रामचन्द्र कालसांगरा – आरएसएस का कार्यकर्त्ता

१६ संदीप उपाध्याय उर्फ़ संदीप डांगे – आरएसएस

१७ सुनील जोशी – आरएसएस

१८ राहुल पाण्डे – आरएसएस

१९ डॉ उमेश देशपांडे – आरएसएस

२० संजय चौधरी
२१ हिमांशु पानसे
२२ रामदास मुलंगे
२३ नरेश राजकोंडावर
२४ योगेश विदुलकर
२५ मारुती वाघ
२६ गुरुराज तुप्तेवर
२७ मिलिंद एकबोटे

२८ मलेगोंडा पाटिल (जो गोवा में बम ब्लास्ट के साथ ही मारा गया, यह पिछड़े वर्ग का है और उसका इस्तेमाल आरएसएस ने किया)

२९ योगेश नाईक
३० विजय तलेकर
३१ विनायक पाटिल
३२ प्रशांत जुवेकर
३३ सारंग कुलकर्णी
३४ धनजय अष्टेकर
३५ दिलीप मंगोंकर
३६ जयप्रकाश उर्फ़ अन्ना
३७ रूद्र पाटिल
३८ प्रशांत अष्टेकर

३९ रमेश गडकरी -सनातन संस्था

४० विक्रम भावे – सनातन संस्था

पिछले साल आरएसएस ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में भी बम ब्लास्ट किया था जिसमे २०० से ज्यादा लोग टमाटर की तरह फटकर मारे गए। मध्यप्रदेश में बीजेपी-आरएसएस की सत्ता है इसलिये उस मसले को आरएसएस ने दबा दिया।

अब तो आप समझ ही गए होंगे की मुसलमानों को बदनाम कर देश भर में आरएसएस के ब्राह्मण बम ब्लास्ट कर रहे है।

============


भूल जाओ कि भाजपा ऐसा होने देगी मोदी जी की नजर में ठाकुर पंडित ही हिंदू है……बाकि कुर्मी, राजभर, मौर्या, कोयरी, कार्यालय में कुर्सी लगाने और चटाई बिछाने वाले ही है।
उदाहरण नीचे देख लो ।
मुख्य मन्त्री
उतर प्रदेश :- ठाकुर
उतराखंड :- ठाकुर
राजस्थान :- ठाकुर
छत्तीसगढ़ :- ठाकुर
मणिपुर :- ठाकुर
महाराष्ट्र :- पंडित
गोवा :- पंडित
कर्नाटक :- पंडित
असम :-पंडित
गुजरात :- बनिया
झारखंड :- तेली
हरियाणा :- खट्टर
कैबिनेट मंत्री सिर्फ :- 2 ओबीसी
पीएमओ कार्यालय में 0 ओबीसी
जागो SC,ST,OBC जागो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*भारत के मंत्रिमंडल का महत्वपूर्ण हिस्से में ओबीसी के साथ भेदभाब देखो
—————-
प्रधानमंत्री : बनिया
गृहमंत्री : राजपूत
कृषि मंत्री : राजपूत
ग्रामीण विकास: राजपूत
रक्षा मंत्री : ब्राह्मण
वित्त मंत्री : ब्राह्मण
रेल मंत्री : ब्राह्मण
विदेश मंत्री : ब्राह्मण
शिक्षा मंत्री : ब्राह्मण
सड़क परिवहन मं: ब्राह्मण
स्वास्थ्य मंत्री: ब्राह्मण
कैमिकल मंत्री : ब्राह्मण
पर्यावरण मंत्री : ब्राह्मण
खादी मंत्री : ब्राह्मण
कपड़ा मंत्री : ब्राह्मण
स्टील मंत्री : जाट
क़ानून मंत्री : कायस्थ
संचार मंत्री : पिछड़ा
खाद्य मंत्री : दलित

निर्भय जयकर
😄 सबका साथ,ब्राम्हणो का विकास 😄

💐💐💐💐💐💐💐💐
देखिये बिना आरक्षण के ब्राह्मणो का कहर ।
—————–


No.1- राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद 49′ है जिसमे ’45 ब्राह्मण “SC’ST-4” OBC-00 “

No.2- उप राष्ट्रपति सचिवालय मे कुल पद 7′ जिसमे 7 ही ब्राह्मण “SC-00” ST-00″ BC-00 “

No.3- मंत्रियो के कैबिनेट सचिव कुल पद 20 ‘ जिसमे 19 ब्राह्मण “SC’ST-1 “OBC-00 “

No.4- प्रधानमंत्री कार्यालय मे कुल पद 35 जिसमे 33 ब्राह्मण “SC’ST-2 OBC-00 “

No.5- कृषि एवं सिचंन विभाग मे कुल पद 274 ” जिसमे 259 ब्राह्मण “SC’ST-15″ OBC-00”

No.6- रक्षा मंत्रालय मे कुल पद है 1379 जिसमे 1331 ब्राह्मण” SC’ST-48 ” OBC-00 है “

No.7- समाज कल्याण एवं हैल्थ मंत्रालय कुल पद 209 जिनमे 192 ब्राह्मण “SC’ST-17 OBC-00 है

No.8- वित्त मंत्रालय मे कुल पद है 1008 ” जिसमे 942 ब्राह्मण “SC’ST- 66 ” OBC- 00 है

No.9- ग्रह मंत्रालय मे कुल पद है 409 जिसमें 377 ब्राह्मण ” SC’ST-19″ OBC-13 है

No.10- श्रम मंत्रालय मे कुल पद है 74 जिसमे 70 ब्राह्मण “SC’ST-4” OBC-00 है

No.11- रसायन एवं पेट्रोलियम मंत्रालय मे कुल पद है 121 जिसमे 112 ब्राह्मण ” SC’ST-9″ OBC-00 है

No.12- राज्यपाल एवं उपराज्यपाल कुल पद है 27 जिसमे 25 ब्राह्मण SC’ST-00″ OBC-2

No.13- विदेश मे राजदूत 140 जिसमे 140 ही ब्राह्मण है “SC’ST-00 ” OBC-00 है

No.14- विश्वविद्यालय के कुलपति पद 108 जिसमे 108 ही ब्राह्मण है ” SC’ST-00″ OBC-00 है

D,15- प्रधान सचिव के पद है 26 जिसमे 26 ही ब्राह्मण है ” SC’ST-00″ OBC-00 है

No.16- हाइकोर्ट के न्यायाधीश है 330 जिसमे 326-ब्राह्मण ” SC’ST-4″ OBC-00 है

No.17- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 23 जिसमे 23 ही ब्राह्मण ” SC’ST-00″ OBC-00 है

No.18- IAS अधिकारी 3600 जिसमे 2950 ब्राह्मण ” SC’ST-600 ” OBC-50 है

No.19- PTI कुल पद 2700 जिसमे 2700 ब्राह्मण ” SC’ST-00″ OBC-00 है “

No.20- शंकराचार्य कुल 05 जिसमे 05 ही ब्राह्मण है” SC’ST-00 OBC-00 है ।

इसे कहते है RSS का ब्राह्मणवाद
===========
Pradeep Kasni (IAS hariyana )

समाज |

हमें सावधानी बरतनी चाहिये, किसी भी हालत में आपस में लड़ना नहीं चाहिये.

आपस में लड़ना आरएसएस की ताक़त बढाना है.

जाटों में ही मुसलमान भी हैं, सिख भी हैं, कबीर और घीसापंथी भी हैं. ईसाई भी हैं. और तो और, शहीदेआज़म भगतसिंह जैसे प्रखर वैचारिक और नास्तिक भी हैं. … सब एक हैं. हर कोई अलग खाता-पहनता और मख़्सूस शख़्सियत का मालिक है, पर फिर सब एक हैं. झगड़ा कोई नहीं. टकराव कोई नहीं.

जाट बनाम मुसलमान हो नहीं सकता. इतिहास देखो. मुसलमानों में जाट हैं और जाटों में मुसलमान हैं. राजपूतों में, सैणियों में, धोबियों, नाइयों, तेलियों, जुलाहों और यहाँ तक कि पंडितों सब काम करने में ऐसा ही है. कबीर साहब हुकमरानो के लिये “तुरक/तुर्क” लफ़्ज़ कई बार बर्ताव में लाते हैं. जनाब ग़ालिब भी तुरकबच्चा, खत्रीबच्चा ये भेद करते थे. …

छोटूराम ने तो कहा ही था जाट जाट है : हिन्दू या मुसलमान कुछ हो जाय सबसे पहले और आख़िर में है वह जाट ही. छोटूराम के “ज़िमींदार” दरअसल किसान ही हैं, झोंपड़ीवाले, कर्ज़ और सूदख़ोरी की भीमभारी हिन्दू शिला के नीचे दबे पड़े, कसमसाते हुए और बेमौत मरते हुए. अतिसंवेदी ब्रिटिश कलेक्टर एसएस थोरबर्न की रिपोर्ट ‘मुसलमंस एंड मनीलैंडर्स’ वाले जाट ! इन्सानियतपसन्द इतिहासलेखक राजमोहन गाँधी वाले जाट !

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखा : जट्ट, और उनसे भी पहले ऊँची आवाज़ में बांकेदयाल ने गाया था : “पगड़ी सम्भाल जट्टा पगड़ी सम्भाल ओए ! पगड़ी सम्भाल तेरा लुट गया माळ ओए !” … इन महानुभावों की कल्पना का जट्ट तो महज़ किसान वृत्ति का, कोई भी सरलमना, कोई भी लुटता-पिटता देहाती ही है. आनुवांशिकतावादी या गोत्रप्रिय एथनिक, कास्टिफ़ाइड/हिन्दुआइज़्ड जाट भी नहीं !

तो जट्ट हो जाट हो मुसलमान हो ग़ैर-मुसलमान हो हैं तो सब किसान, मज़दूर, मेहनतकश, हलाल की खाने वाले, क़िल्लत में जीने वाले !

जट्ट/जाट ही क्यों, गुज्जर/गुर्जर, मेव, रोड़, कम्बोह/काम्बोज, अहीर/आभीर/यादव, सैनी, ठाक्कर/ठाकुर/राजपूत, और और सैकड़ों-हज़ारों ऐसी ही शनाख़्तें — उनके बीच झगड़ा क्या है विवाद्य मुद्दा क्या है … कोई नहीं, सचमुच कोई नहीं !

तो सावधान होओ, सचेत होओ, सम्भलो … लड़ो मत !!
===========
दुनिया का सबसे ख़तरनाक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस, अलकायदा नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है : सबूत


भारत के महाराष्ट्र राज्य के पूर्व आईजी पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारत का पहले नंबर का आतंकवादी संगठन है।

एस. एम. मुशरिफ ने कहा कि देश में किसी भी आतंकवादी संगठन ने आरडीएक्स का इस्तेमाल इस प्रकार से नहीं किया है जिस प्रकार से आरएसएस ने किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद फैलाने के जुर्म में आरएसएस और इसके सहयोगी दलों विरुद्ध कम से कम 18 चार्जशीटें दाखिल की जा चुकी हैं।

मुशरिफ ने कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसी आईबी इंटेलिजेंस ब्यूरो भी आरएसएस के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ऐसी एजेंसी है जो अपने काम के लिए सरकार या किसी और को जवाबदेह नहीं है इसी बात का फायदा उठा कर इसका इस्तेमाल ग़लत तरीके से किया जा रहा है। महाराष्ट्र के पूर्व आई जी ने कहा कि सरकारें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन आईबी अपने काम में जुटी रहती है और उसके हर बयान को सच माना जाता रहा है।

अपने संबोधन में महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख ने कहा कि हेमंत करकरे की हत्याा में खुफिया ब्यूसरो, आईबी का हाथ है। उन्होंने कहा कि करकरे, आतंकी गतिविधियों में हिंदू कट्टरवादी संगठनों की भूमिका की जांच कर रहे थे। वे मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्तेट एटीएस के मुखिया थे। मुशरिफ ने कहा कि करकरे की हत्या में आईबी का हाथ होने के पुख्ता सबूत थे किंतु इसे साबित करने की सारी कोशिशें विफल रहीं। उन्होंने कहा कि स्व तंत्र जांच की हमारी मांग हमेशा नकार दी गई। जब तक इसके लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन नहीं चलाया जाएगा, तबतक इसे साबित नहीं किया जा सकेगा।

महाराष्ट्र राज्य के पूर्व आईजी पुलिस ने कहा कि जेएनयू मामले के पीछे भी आरएसएस का हाथ है। उन्होंने कहा कि आरएसएस या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसी चालों के जरिये भारत को हिन्दू राष्ट्र में परिवर्तित करना चाहता है। उनका कहना था कि आरएसएस, एक व्यमवस्था् के अन्तर्गत काम रही है और यह ब्राह्मणवादी व्यववस्था् है।

सोर्स : पारस टुडे
==========

मोहम्मद जाहिद


राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ , यह ब्राम्हणवादियों का ब्राम्हणवादियों के हित के लिए और ब्राम्हणवादियों द्वारा चलाया जा रहा एक अपंजीकृत संप्रादायिक संगठन है।
ब्राम्हणवादियों का झूठा प्रचार है कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है। बहुजनों और दलित युवाओं को संघ के साथ जोड़ने के लिए यह झूठा प्रचार किया जाता है।
पिछले कई सालों से चली आ रही विषमवादी जाति-व्यवस्था को बनाए रखना और सभी जातियों पर ब्राम्हणवादी वर्चस्व बनाए रखना यही इस संगठन का एक मात्र उद्देश्य है।
इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं , और परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग षड्यंत्रों का उपयोग करते हैं।
पूर्वनियोजित हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाना ब्राम्हणवादियों का 20 वीं सदी का सबसे बड़ा षडयंत्र है। लेकिन 21 वीं सदी में आरएसएस ने अपने कार्यों में कुछ बदलाव किए हैं। हिन्दू- मुस्लिम दंगे कराने के अतिरिक्त मुस्लिम आतंकवाद का डर लोगों के दिल-दिमाग़ में भर देने का काम आरएसएस और अन्य ब्राम्हणवादी संगठन कर रहे हैं।

इसके अलावा अपने उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए 36 नाजायज़ संगठनों में एक “अभिनव भारत” के नाम से और एक संगठन बनाया।
21वीं सदी की शुरुआत में , विशेषकर 2002 और 2008 के अंतराल में देश में कई जगहों पर जो बड़े बड़े बम धमाके हुए , वे सारे आरएसएस के ही कृत्य हैं।
सच कहें तो ऐसे बम धमाके होने के बाद उसकी जाँच की एक परंपरा बन गयी थी। जैसे ही कोई घटना हुई , आईबी (इंटेलीजेन्स ब्युरो) उसी दिन किसी मुस्लिम संगठन को दोष देकर उसके खिलाफ कार्यवाही करती थी। अगले 2-3 दिनों में देश के अलग-अलग स्थानों से बेगुनाह मुस्लिम युवाओं को गिरफ़्तार किया जाता था। और मिडिया इन खबरों को बड़े ज़ोर शोर से प्रकाशित करती थी। इसके बाद टीवी पर प्राइम टाइम चर्चासत्र, समाचार पत्रों में लेख-आलेख आदि में यह एक चर्चा का विषय बना रहता था। जिससे समाज में मुसलमानों के प्रति डर पैदा हो।

उस घटना को इससे पहले कि आप लोग भूलते तब तक और एक नई घटना हो जाती। उसकी भी इसी प्रकार जाँच की जाती और फिर मीडिया में नया विषय बना रहता।

संघ नियंत्रित “आईबी” संघ और मीडिया के गठजोड़ से पिछले 5-6 सालों से इसी प्रकार इस देश में चल रहा था।

इन कार्यकलापों में थोड़ी सी रुकावट उस समय आई थी जब 2006 में नादेड़ बम धमाका हुआ। आरएसएस व बजरंग दल के आतंकी जब बम बना रहे थे उसी समय धमाका हुआ। घटना में दो की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। लेकिन मीडिया ने इस घटना का ज्यादा प्रसारण नहीं किया , परिणामतः लोग उसे जल्दी भूल गये।

कुछ समय पश्चात फिर से पहले जैसे बड़े बम धमाके होने शुरू हो गये। साथ ही शुरू हुआ इन घटनाओं का आरोप मुस्लिम संगठनों पर लगाना एंव एटीएस जैसी राज्य स्तरीय पुलिस एजेन्सियों द्वारा मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना।

मीडिया ने भी पहले की तरह इन्हीं खबरों को अधिक प्रकाशित और प्रचारित करना शुरू कर दिया। इस तरह संघ , आईबी , एटीएस और मीडिया के गठजोड़ से इस देश में मुस्लिम आतंकवाद का झूठा माहोल फैलाने में आरएसएस धीरे धीरे कामयाब होने लगा।
लेकिन , सैल्यूट शहीद हेमंत करकरे को , इस आईपीएस पुलिस अधिकारी ने आरएसएस की सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

सितंबर 2008 में मालेगाँव में हुए बम धमाके की जाँच करते समय उन्हें कुछ ऐसे सबूत मिले जिससे स्पष्ट हुआ कि सिर्फ़ मालेगाँव 2008 ही नहीं बल्कि इससे पहले जो भी बम धमाके हुए थे उसमें ज़्यादातर बम धमाके के लिए आरएसएस , अभिनव भारत और उनसे जुड़े ब्राम्हणवादी संगठन ज़िम्मेदार हैं।
साथ ही कुछ घटनाओं में बम रखते समय या तैय्यार करते समय धमाके हुए और उनमें भी आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों के आतंकवादी बेनकाब हुए।
मेरी जानकारी के अनुसार वर्तमान में संघ परिवार के खिलाफ अभी दो दिन पहले संघ के कार्यकर्ता के कुन्नूर बम धमाके सहीत लगभग 22 मामले लंबित हैं। इनमें 17 केवल और केवल आरएसएस के खिलाफ है। और यदि अन्य मामलों की ईमानदारी से जाँच हो तो यह संख्या और बढ़ सकती है।

http://www.amarujala.com/./bomb-blast-at-rss-worker-s-house.

स्पष्ट है कि पिछले 90 साल से जो संगठन कथित रूप से देश में सामाजिक , सांस्कृतिक , देशप्रेम की भावना जगाने का कार्य कर रहा है , वह हकीकत में देश में आतंक फैलानेवाला एक आतंकवादी संगठन है और वह एक देशव्यापी देशद्रोही साज़िश का सूत्रसंचालन कर रहा है।

विशेष टिप्पणी :- संघ को येनकेन प्रकरेण सत्ता इसीलिए चाहिए कि वह अपने आतंकवादियों को सुरक्षा दे सके और अपना मनुस्मृति ऐजेन्डा चला सकें। आँख पर पर्दा डाले लोग सावधान हो जाएँ :- मोहम्मद ज़ाहिद

♡ श्रोत :- महाराष्ट्र के आईपीएस और पूर्व इंस्पेक्टर जनरल आफ पुलिस(आईजी, पुलिस) “एस•एम• मुशरिफ़” की नयी किताब “आर•एस•एस• देश का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन” के कुछ अंश।
=============


दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस, अलकायदा नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है

जब मुस्लिम और कुछ कांग्रेस के नेताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) को अक्सर आरएसएस को एक आतंकवादी संगठन कहा मैंने इस बात को अनदेखा करदिया पर जब इस बार प्रकाश राज और कमल हसन जैसे प्रख्यात अभिनेताओं ने यही बात खी तो मैं उसको अनदेखा नहीं कर पाई।

जब मैंने आरएसएस के बारे में शोध करना शुरू कर दिया, तो मुझे बहुत हैरानी हुई क्यूंकि मैंने देखा की जब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई है तब से ही वे आतंकवादी गतिविधियां से जुड़े हुए है। जब भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध हो रहा था,क्या आप जानते हैं कि आरएसएस ने किस तरह भारत को धोखा दिया?

हम जानते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) से तहे दिल से नफरत करती है, फिर भी नेहरू ने 1963 में गणतंत्र दिवस की सैन्ययात्रा पर आने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) से अनुरोध किया था। इसका कारण यह था कि आरएसएस स्वयंसेवकों ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान रक्तदान करके आतंकवाद के प्रति योगदान दिया था।परिणामस्वरूप, 1963 की गणतंत्र दिवस की सैन्ययात्रा में 3500 स्वयंसेवक ने हिस्सा लिया था।

1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान, इस आतंकवादी संगठन ने एक बार फिर अपना वास्तविक चेहरा दिखाया।आरएसएस स्वयंसेवकों ने राहत कार्य में खुद को शामिल किया और तत्कालीन प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री और भारतीय सेना के जनरल खुशवंत सिंह ने इस की सराहना भी की।क्या होता यदि इस संगठन ने उस समय भारत के शत्रुओं के साथ हाथ मिला लिया होता।तत्कालीन प्रधानमंत्री इस संगठन पर कैसे इतना विश्वास कर सकते है?

आरएसएस ने अपने ढोंग को यहीं नहीं रोक दिया क्योंकि यह 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी जारी रहा था। हां ये उस युद्ध के दौरान रक्तदान करने वाला पहला संगठन था। किस तरह की आतंकवादी मानसिकता इस संगठन के पास है क्या होगा अगर ये आतंकवादी संगठन जो डर और नफरत फैलाता है उसने अपने खून में कुछ मिला दिया हो ?

भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, यह आतंकवादी संगठन अपने कार्यकर्ताओं से भरा गिरोह भेजता है।बाढ़ के दौरान, कार्यकर्ताओं को भोजन और पानी की सहायता देते देखा जा सकता है। जब कार्यकर्ताओं से ये पूछा गया की “आप भोजन और पानी के डिब्बे के पैकेट क्यों उठाये हुए हैं?” तो आतंकवादी संगठन द्वारा दिया गया उत्तर बहुत चोंकाने वाला था। एक स्वयंसेवक ने कहा कि ये खाना और पानी बाढ़ प्रभावित लोगों को दिया जाएगा।

लेकिन क्या होता अगर इन कार्यकर्ताओं ने निर्दोष बाढ़ पीड़ितों को डुबाने का प्रयास किया होता?क्या होता अगर उन्होंने भोजन में जहर मिला दिया होता? आरएसएस कैसा एक घातक संगठन है।

आरएसएस के एजेंट पूरे भारत में और हर सरकारी और निजी संगठनों में हैं।सबसे अच्छा उदाहरण प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हैं। वह आरएसएस के एक कट्टर अनुयायी हैं। क्या होता अगर बोफोर्स, 2 जी जैसे घोटाले को उन्होंने अंजाम दिया होता? या विदेश यात्रा के नाम पर वे भारत से पलायन कर लेते।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है और कई दिन पहले, पीएफआई के महिला विंग प्रमुख ने कहा कि अगर भारत में आरएसएस सक्रिय नहीं होता तो भारत एक इस्लामी राष्ट्र होता।क्या यह आरएसएस पर एक कलंक नहीं है?वे कैसे एक इस्लामी संगठन को अपने अच्छे इरादे से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र से भारत को एक इस्लामी राष्ट्र में परिवर्तित करने से रोक सकते हैं? शर्मनाक !!!

महात्मा गांधी ने आरएसएस की प्रशंसा की !!! वह यह कैसे कर सकता है ?

आरएसएस को 1925 में स्थापित किया गया था, लेकिन 1934 में गांधीजी ने 1500 स्वयंसेवकों के शिविर का वर्धा में दौरा किया था

“मैं आरएसएस शिविर कुछ साल पहले गया था, जब संस्थापक श्री हेडगेवार जीवित थे। मैं वहाँ के अनुशासन, अस्पृश्यता का पूर्ण अभाव और कठोर सादगी को देखकर काफी प्रभावित हुआ था। मुझे यकीन है कि कोई भी संगठन जो सेवा के उच्च आदर्श और आत्म-बलिदान से प्रेरित है वो बहुत तरक्की करेगा” ये गांधीजी के शब्द थे जब उन्होंने 16 सितंबर 1947 को दिल्ली में भंगी कॉलोनी में संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। मैं यह सुनकर बहुत हैरान हूँ कि ‘राष्ट्र के पिता’ ने भी इस आतंकवादी संगठन की प्रशंसा की थी।

भारतीय संविधान के निर्माता डॉ बीआर अम्बेडकर ने भी आरएसएस की प्रशंसा की थी!पर क्यूँ ?

“मैं स्वयंसेवकों की दूसरों के जाति के बारे में जाने बिना पूर्ण समानता से एक दुसरे के साथ आगे बड़ते देख के आश्चर्यचकित हूं” यह कथन मई 1939 को पुणे शिविर, में डॉ अम्बेडकर द्वारा दिया गया था।

आरएसएस ने पुर्तगाली को दादर और नगर हवेली से भागने के लिए मजबूर किया !!! क्या यह अतिथि देवो भव है?

यह बिल्कुल असहिष्णुता का एक कार्य है जो विदेशी भारतीय मिट्टी पर रहते थे यानि की पुर्तगाली को आतंकवादी संगठन आरएसएस द्वारा अपना सामान उठाकर भारत से बहार जाने के लिए मजबूर किया गया था, जिससे ये स्पष्ट है कि आरएसएस अतिथि देवो भव का अनुसरण नहीं कर रहा है।अतिथि भगवान के समान होता है। उनको पुर्तगाली को भारत पर शासन करने की अनुमति देनी चाहिए थी।

आरएसएस के संस्थापक, केशव बलराम हेडगेवार पर अंग्रेजों द्वारा 1921 में राजद्रोह का आरोप लगाया गया था और एक वर्ष के लिए उन्हें कैद किया गया था। अंग्रेजों ने एक सराहनीय काम किया था इस आतंकवादी संगठन के संस्थापक को कैद करके।

भारत को आजादी मिलने के बाद सबसे मुश्किल काम कई रियासतों को एक करने का था। सरदार पटेल ने एम.एस. गोलवलकर को महाराजा हरि सिंह को भारत में शामिल होने के लिए समझाने का काम दिया था।सरदार पटेल आरएसएस नाम के आतंकवादी संगठन को इस कार्य की जिम्मेवारी कैसे दे सकते हैं। क्या होता अगर वह महाराजा को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए प्रेरित करते ?

अब हम इस बात पर ध्यान दें कि आरएसएस ने एनजीओ की प्रतिष्ठा को सफलतापूर्वक कैसे लुभाया है जैसे की आईएसआईएस और पीएफआई !!!

शांतिपूर्ण संगठन जैसे आईएसआईएस, अल कायदा, लश्कर-ए-थय्याबा, पीएफआई, जिन्होंने ऊपर काफी पेशेवर और बर्बर रूप से लाखों अपराधियों को नष्ट करने का श्रेय है उन्हें आतंकवादी संगठन कहा जाता है।

मुझे इस पर हैरानी है क्योंकि वे आतंकवादी संगठन नहीं हैं, वे एनजीओ हैं जो नि: स्वार्थ दुनिया में शांति बहाल करने की दिशा में काम कर रहा है।

हाल ही में, पीएफआई नामक गैर सरकारी संगठन के छह सदस्य आईएसआईएस में शामिल हुए हैं। यह वास्तव में एक प्रशंसनीय नौकरी है और ये छह पुरुष मानव जाति के उत्थान के लिए काम करेंगे।

पीएफआई एक महान उपकरण का उपयोग करके हिंदुओं और ईसाइयों को इस्लाम में बदलने में भी शामिल है जो है ‘लव जिहाद’ नामक योजना।दरअसल, इस योजना को संयुक्त राष्ट्र संगठन द्वारा समर्थित और वित्त पोषित किया जाना चाहिए था।अफसोस की बात है कि वैश्विक शक्तियां पीएफआई, सिमी, आईएसआईएस जैसी एनजीओ का समर्थन नहीं करती हैं।

एक एनजीओ आईएसआईएस के एक सदस्य ने पैदल चलने वालों के ऊपर अपना वाहन चड़ा दिया जिससे 8 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। कितना महान काम इस आदमी द्वारा पूरा किया गया। लेकिन लोग उसे आतंकवादी कहते हैं। क्या यह उचित है?

लश्कर-ए-तैयबा ने करीब 200 लोगों को नष्ट करने का एक अन्य प्रमुख काम किया था मुंबई पर 2008 में हमला कर के।इस कार्य को मान्यता प्राप्त होनी चाहिए था और ‘महान शांति पुरस्कार’ प्रस्तुत किआ जाना चाहिए था। दुर्भाग्य से, प्रकाश राज और कमल हासन के अलावा,कोई भी इस महान कार्य की बात नहीं कर रहा है।

इसे पढ़ने के बाद आपको यह आश्वस्त हो सकता है कि यदि भारत या विश्व में मानवता मौजूद है,तो यह आईएसआईएस, पीएफआई, अल कायदा जैसे गैर-सरकारी संगठनों के कारण है। और अगर मानवता खतरे में है, तो केवल एक संगठन इसके लिए दोषी है और वह आरएसएस है।
=============


विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ‘धार्मिक आतंकवादी संगठन’ : CIA

एजेंसी ने विहिप के अलावा आरएसएस, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और जमात-ए-उलेमा-ए-हिंद को भी राजनीतिक दबाव वाले संगठन की कैटेगरी में डाला है.

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के हालिया वर्ल्ड फैक्टबुक में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल को ‘धार्मिक आतंकवादी संगठन’ करार दिया है. सीआईए, यूएस की इंटेलिजेंस विंग है. सीआईए ने जारी अपनी फैक्टबुक में राजनीतिक दबाव पर चलने वाले संगठनों का वर्गीकरण किया है. ये संगठन राजनीति में शामिल होते है या फिर बहुत ज्यादा राजनीतिक दबाव बनाते हैं, लेकिन ऐसे संगठनों के नेता विधायी चुनाव नहीं लड़ते.

इस खबर को झूठा बताते हुए विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, ” हमने सरकार से इस मामले में दखल देने को कहा है. सीआईए की इस रिपोर्ट पर यूएस सरकार से बात करने को भी कहा गया है. सरकार को हमारे साथ इस मुद्दे को उठाना चाहिए. सीआईए को भी माफी मांगनी चाहिए और रिपोर्ट पर काम करना चाहिए.”

एजेंसी ने विहिप के अलावा आरएसएस, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और जमात-ए-उलेमा-ए-हिंद को भी राजनीतिक दबाव वाले संगठन की कैटेगरी में डाला है.

बता दें कि सीआईए हर साल अपनी फैक्टबुक जारी करती है. इस फैक्टबुक में, इतिहास सरकार, आर्थिक, ऊर्जा, भौगोलिक, संवाद, आतंकियों और देशों के मुद्दों की जानकारी होती है. एजेंसी ये फैक्टबुक 1962 से प्रकाशित कर रही है, लेकिन 1975 से ही इसे सार्वजनिक किया जाने लगा है.
==========
1925 से 1947 तक RSS के ब्राह्मण प्रचारकों ने कभी भी वन्देमातरम नहीं बोला!

Jayantibhai Manani
————————
‘वंदे मातरम’ नहीं गाने से कोई देशद्रोही नहीं हो जाता. ये बात भाजपा के: मुख्तार अब्बास नकवी ने सही कही है.
RSS के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ द्वारा प्रकाशित 1925 से 1950 तक के साहित्य में आप ढूंढते रह जायेंगे,आप को बंदेमातरम् शब्द कही भी दिखाई नहीं देगा..

1925 से 1947 तक RSS के ब्राह्मण प्रचारकों ने कभी भी वन्देमातरम नहीं बोला, आजादी के आन्दोलन का विरोध करते रहे और ब्रिटिश शासन का समर्थन करते रहे थे. आजादी के आन्दोलन और वन्देमातरम से RSS के ब्राह्मण नेताओ का कोई लेना देना नहीं था.
ये सब मुख़्तार अब्बास नकवी जानते है. इसीलिए RSS के ब्राह्मण नेताओ के बचाव कर रहे है.
संघ द्वारा प्रकाशित 1950 तक के साहित्य प्रकाशन में स्वातंत्र्य आंदोलन में संघ की भूमिका का परिक्षण किया गया है. आझादी के आंदोलन के महत्वपूर्ण प्रकरणों की जाँच करने से जो पत्ता चला है उसके निष्कर्ष निम्न सूचि में देखा जा सकता है.

क्रम परिक्षण निष्कर्ष
01. अंग्रेजी शासन की आलोचना के सन्दर्भ एक भी नहीं.
02. अंग्रेज और ब्रिटीश शासन के गुण गान करते संदर्भो 16
03. अंग्रेजी शासन विरुध वन्देमातरम गाने का आह्वान करते संदर्भो एक भी नहीं
04. भारत के मायनोरीटी पर प्रहार करते और निंदा करते संदर्भो 74
05. स्वातंत्र्य आंदोलन की आलोचना करते संदर्भो 16
06. स्वातंत्र्य आंदोलन का समर्थन करते संदर्भो एक भी नहीं
07. ब्रिटीश शासन को भारत छोड़ने के ललकार करते संदर्भो एक भी नहीं
08. स्वातंत्र्य आंदोलन में सीमाचिह्नरूप काकोरी केस, जलियावाला बाग एक भी नहीं

नरसंहार, गद्दर आंदोलन इत्यादि के उल्लेख करते संदर्भो.
09. ब्रिटीश शासन के दमन विरुध जान देने वाले शहीदों की प्रशंसा करते संदर्भो एक भी नहीं
10. शहीदों की आलोचना करते संदर्भो 10
11. राष्ट्रध्वज और देश के संविधान की निंदा करते संदर्भो 10
(“आझादी का आंदोलन और राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ” किताब के पेज २१-२२ में से)

=========
इन कुछ प्रश्नों के सही उत्तर नहीं तो आप के पास RSS की सही पहचान नहीं है.


JAYANTIBHAI MANANI·MONDAY
===========
आरएसएस के बारे मे क्या सच है और क्या जुठ है ? इस के बारे में संघ के समर्थक और विरोधियो को सही पता नहीं है. उनका परीक्षण संघ के बारे मे कुछ प्रश्न उठा कर उनके उतर ढूंढने से ही हो सकता है.
– – – -1. संघ परिवार के संगठन ख्रिस्ती या मुस्लिम विरोधी प्रचार-प्रसार करते रहते है, तो संघ की स्थापना मुस्लीम शासन में या पेशवाशासन में क्यों नहीं हुई ? अंग्रेजी शासन मे क्यों हुई ?
– – – – 2. 1817 मे पेशवा शासन की समाप्ति और ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के प्रारम्भ से ले कर 19-वी सदी के अंत तक तक ख्रिस्ती धर्मान्तर होते रहे फिर भी संघ की संघ की स्थापना क्यों नहीं हुई ? 1925 से 1947 तक ख्रिस्ती धर्मान्तर पर RSS ने आवाज क्यों न उठाया ?
– – – – 3. 1925 से 1947 तक ब्रिटिशकाल में ख्रिस्ती धर्मांतर के विरूद्ध कोई आंदोलन संघ ने क्यों नहीं किया ?
– – – – 4. आरएसएस की स्थापना महाराष्ट्र में ही क्यों हुई ? संघ का उदेश्य मुस्लिम या अंगरेजी शासन का विरोध क्यों नहीं था ?
– – – – 5. 1925 से 1947 तक चलते रहे आजादी के आंदोलनमें संघ या संघ के कोई ब्राह्मण स्वयंसेवक या ब्राह्मण सर संघचालक ने भाग क्यों नहीं लिया और आझादी के आन्दोलन के विरोधी तथा ब्रितीं शासन के समर्थक क्यों बने रहे थे?
– – – – 6. 1925 से 1947 तक गौमांसभक्षक अंग्रेजी शासको को समर्थन और मदद करते रहे संघ के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ ने गौहत्या बंध कराने का कोई आंदोलन क्यों नहीं चलाया ?
– – – – 7. हिन्दुओ में बिन ब्राह्मण 96 % और हिन्दुओ में ओबीसी, एससी और एसटी 80% है. संघ के 6 सर संघचालक में से कितने ब्राह्मण, कितने बिनब्राह्मण और कितने ओबीसी, एससी और एसटी में से आये है ?
– – – – 8. सघ के राजकीय संगठन जनसंघ के प्रथम अध्यक्ष कौन जाति के थे ? वर्तमान मे भाजपा के अध्यक्ष कोन जाति के है ?
– – – – 9. सघ शुद्र(आजके ओबीसी)और अतिशूद्र-अवर्ण(एससी-एसटी) को हिंदू मानता है ? अगर मानता है तो संघ के राष्ट्रीय नेताओं में उनमे से कोई एक को भी स्थान क्यों नहीं मिला है ?

– – – – 10. 1925 में महाराष्ट्र में ब्राह्मणों के दो गुट थे, एक उदारवादी और दूसरा कट्टर जातिवादी. उदारवादी ब्राह्मण तभी भी संघ से नहीं जुड़े और आज भी नहीं जुडते है, सिर्फ कटटर जातिवादी ब्राह्मण ही संघ से क्यों जुडते रहे है ?
– – – – 11. संघ में और संघ परिवार के संगठनो के नेताओ में ब्राह्मण और बिन ब्राह्मण की कितनी सामाजिक भागीदारी है ?
– – – – 12. संघ के प्रथम सर संघचालक, विहिप के प्रथम अध्यक्ष, एबीवीपी के प्रथम अध्यक्ष, भीरतीय मज़दूर संघ के प्रथम अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेविका संघ की प्रथम अध्यक्षा कौन सी जाति की थी और आज इन पदों पर कौन सी जाति के है ?
– – – – 13. 20-वी सदी के श्रेष्ठ हिंदु महात्मा गाँधी की हत्या, संघ-हिंदू महासभा से जुड़े महाराष्ट के ब्राह्मणों ने क्यों की ?
– – – – 14. अछूत माना गया समुदाय अगर हिंदु है और संघ भी हिन्दूवादी संगठन है, तो नासिक के कालाराम मंदिर-प्रवेश के डॉ.बाबासाहेब आम्बेडकर के आंदोलन को संघने समर्थन क्यों नहीं किया?
– – – – 15. 1925 से 1947 तक अछूत समुदाय या आदिवासी समुदाय के सामाजिक अधिकारके लिए या असमानता के विरुध्ध संघने कोई आंदोलन चलाया ?
– – – – 16. संघ के नेता या स्वयंसेवकों में से किसीने 1925-1947 के दरम्यान “वन्देमातरम” का नारा लगाया था ? 1925 से 1950 तक प्रसिध्ध हुवे संघ के कोई साहित्य में “वंदेमातरम” का कोई उल्लेख क्यों नहीं मिलता है ?
– – – – 17. 1925 से 1947 तक संघ को पता था की बाबरी मस्जिद में राम की जन्मभूमि है ? अगर हा तो आंदोलन क्यों नहीं चलाया ? 1947 से 1984 तक संघ को पता था की बाबरी मस्जिद ही राम जन्मभूमि है ? अगर हा तो कोई आंदोलन क्यों नहीं चलाया ?
– – – – 18. 1980 मे देश के 52 % ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारो के दस्तावेज मंडल कमीशन का रिपोर्ट आने के बाद और 198I-84 तक मंडल रिपोर्ट को लागु करने के लिए आवाज उठनी शुरू होने के बाद, संघ ने बाबरी मस्जिद के विवाद को हवा क्यों दी ?
– – – – 19. 7 अगस्त 1990 को देश के 54% ओबीसी समुदाय को केंद्र की नौकरियों की सता में हिस्सेदारी देते 27% मंडल आरक्षण की घोषणा के बाद हुए ओबीसी आरक्षण के विरुध्ध आन्दोलन में संघपरिवार के संगठनो ने बढ़चढ़ कर के हिस्सा क्यों लिया?

– – – – 20. 7 अगस्त 1990 को देश के 54% ओबीसी समुदाय को केंद्र की नौकरियों की सता में हिस्सेदारी देते 27% मंडल आरक्षण की घोषणा के विरुध्ध संघ परिवार के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ ने सोमनाथ से अयोध्या की रामरथ यात्रा क्यों निकाली?
– – – – 21. 19 नवेम्बर 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने 27% ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक घोषित करने के बाद ओबीसी समुदाय को गुमराह करने के लिए संघ परिवार के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ ने 6 दिसम्बर 1992 को ने कारसेवा के नाम पर बाबरी मस्जिद क्यों गिरवाई?
– – – – 22. संघ ने अग्रेजी शासन में 1925-47 तक गौहत्या के लिए कोई आंदोलन क्यों नहीं चलाया ? स्वदेशी शासन में 1950 के बाद गो हत्या की बात क्यों उठाई गई ?
– – – – 23. संघ राष्ट्रवादी और हिन्दुवादी संगठन है या जातिवादी संगठन है ? संघ भारतीय राष्ट्र का समर्थक या विरोधी संगठन है ?
– – – – 24. RSS के कट्टर जातिवादी ब्राह्मण नेताओ ने 1925 से 1947 तक देश की आझादी के आन्दोलन को समर्थन क्यों नहीं किया? वे आझादी के आन्दोलन के विरोधी और ब्रिटिश शासन के प्रखर समर्थक 1947 तक क्यों बने रहे?

———— ————————– – – ऊपर दीये गये प्रश्नों के उतर मे आप क्या कहेंगे

============

RSS 1925 – 1947

आरएसएस संघ का खुनी इतिहास.. समय निकाल कर जरूर पड़े

संघ का खूनी इतिहास :-

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक विद्वान विचारक हैं राकेश सिन्हा जी , वह “संघ के विशेषज्ञ” के नाम से लगभग हर टीवी चैनल पर बहस करते रहते हैं और संघ के काले को सफेद करते रहते हैं ।कुछ दिन से हर टीवी डिबेट में यह बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक कोई आज का पैदा नहीं है बल्कि 1925 का जन्म लिया अनुभवी संगठन है । सोचा संघ के 90 वर्ष के जीवन का पोस्टमार्टम किया जाए ।

1925 कहने का तात्पर्य सिन्हा जी या अन्य संघ के विद्वानों का इसलिए है कि उसी समय इनके एक योद्धा “सावरकर” ने एक संगठन बनाया था जिसका संघ से कोई लेना देना नहीं था सिवाय इसके कि संघ को सावरकर से जहर फैलाने का सूत्र मिला । सावरकर पहले कांग्रेस में थे परन्तु आजादी की लड़ाई में अंग्रेज़ो ने पकड़ कर इनको “आजीवन कैद” की सज़ा दी और इनको “कालापानी” भेजा गया जो आज पोर्ट ब्लेयर( काला पानी) के नाम से जाना जाता है ।संघ के लोगों से अब “वीर” का खिताब पाए सावरकर कुछ वर्षों में ही अंग्रेज़ों के सामने गिड़गिड़ाने लगे और अंग्रेजों से माफी मांग कर अंग्रेजों की इस शर्त पर रिहा हुए कि स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहेंगे और अग्रेजी हुकूमत की वफादारी अदा करते उन्होंने कहा कि ” हिन्दुओं को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की बजाए अपनी शक्ति देश के अंदर मुसलमानों और इसाईयों से लड़ने के लिए लगानी चाहिए” ध्यान दीजिये कि तब पूरे देश का हिन्दू मुस्लिम सिख एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी के लिए मर रहा था शहीद हो रहा था और तब ना कोई यह सोच रहा था कि हिन्दू मुस्लिम अलग भी हो सकते हैं , तब यह “वीर” देश में आग लगाने की बीज बो रहे थे , जेल से सशर्त रिहा हुए यह वीर देश की आपसी एकता के विरूद्ध तमाम किताबों को लिख कर सावरकर ने अंग्रेजों को दिये 6 माफीनामे की कीमत चुकाई देश के साथ गद्दारी की और आजाद भारत में नफरत फैलाने की बीज बोते रहे ।

1947 में देश आजाद हुआ और देश की स्वाधीनता संग्राम आंदोलन के ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का फैसला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने लिया तो इसी विचार के लोग इसके विरोध में और अंग्रेजों को वफादारी दिखाते राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को जला रहे थे और पैरों से कुचल रहे थे और मौका मिलते ही देश के विभाजन के समय हिन्दू – मुस्लिम दंगों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और मौका मिलते ही देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी क्युँकि सावरकर हेडगेवार की यह सोच थी कि इस देश में “गाँधी” के रहते उनके उद्देश्य पूरे नहीं होंगे। संघ के जन्मदाता हेडगेवार और गोवलकर ने गाँधी जी की हत्या करने के बाद (सरदार पटेल ने स्वीकार किया ) अपने विष फैलाने की योजना में लग गये , तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू राष्ट्र के निर्माण में लग गये और संघ के लोग भविष्य के भारत को ज़हर से भरने के औज़ार बनाने लगे , नेहरू पटेल को उदारवादी कहिए या उनकी मूक सहमति , संघ को पैदा होते ही उसके देश विरोधी क्रिया

कलाप देख कर भी आंखें मूंदे रहे ।इस बीच संघ ने देश की एकता को तोड़ने के सारे वह साहित्यिक हथियार पुस्तकों के रूप में बना लिए जिससे हिन्दू भाईयों की धार्मिक भावना भड़के जिसका मुख्य आधार मुसलमानों से कटुता और मुगलों के झूठे आत्याचार थे , न्यायिक प्रक्रिया में दंड पाए लोगों को भी हिन्दू के उपर किया अत्याचार किया दिखाया गया , शासकीय आदेशों को तोड़ मरोड़कर हिन्दू भाईयों पर हुए अत्याचार की तरह दिखाया गया तथा इतिहास को तोड़ मरोड़कर मुगल शासकों को अत्याचारी बताया कि हिन्दुओं पर ऐसे ऐसे अत्याचार हुआ और औरंगज़ेब को उस अत्याचार का प्रतीक बनाया गया , एक से एक भड़काने वाली कहानियाँ गढ़ी गईं और इसी आधार पर संघी साहित्य लिखा गया पर जिस झूठ को सबसे अधिक फैलाया गया वो था कि ” औरंगज़ेब जब तक 1•5 मन जनेऊ रोज तौल नहीं लेता था भोजन नहीं करता था” अब सोचिएगा जरा कि एक ग्राम का जनेऊ 1•5 मन (60 किलो) कितने लोगों को मारकर आएगा ? 60 हजार हिन्दू प्रतिदिन , दो करोड़ 19 लाख हिन्दू प्रति वर्ष और औरंगज़ेब ने 50 वर्ष देश पर शासन किया तो उस हिसाब से 120 करोड़ हिन्दुओं को मारा बताया गया जो आज भारत की कुल आबादी है और तब की आबादी से 100 गुणा अधिक है ।पर ज़हर सोचने समझने की शक्ति समाप्त कर देती है तो भोले भाले हिन्दू भाई विश्वास करते चले गए ।इन सब हथियारों को तैयार करके संघ अपनी शाखाओं का विस्तार करता रहा और हेडगेवार और गोवलकर एक से एक ब्राह्मणवादी ज़हरीली किताबें लिखते रहे प्रचारित प्रसारित करते रहे जिनका आधार “मनुस्मृति” थी और गोवलकर की पुस्तक “बंच आफ थाट” संघ के लिए गीता बाईबल और कुरान के समकक्ष थी और आज भी है।नेहरू के काल में ही अयोध्या के एक मस्जिद में चोरी से रामलला की मुर्ति रखवा दी गई और उसे बाबर से जोड़ दिया गया जबकि बाबर कभी अयोध्या गये ही नहीं बल्कि वह मस्जिद अयोध्या की आबादी से कई किलोमीटर दूर बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बनवाई थी , ध्यान रहे कि उसके पहले बाबरी मस्जिद कभी विवादित नहीं रही परन्तु नेहरू आंख बंद किये रहे ।नेहरू के बाद इंदिरा गांधी का समयकाल प्रारंभ हुआ और सख्त मिजाज इंदिरा गांधी के सामने यह अपने फन को छुपाकर लुक छिप कर अपने मिशन में लगे रहे और कुछ और झूठी कहानियाँ गढ़ी और अपना लक्ष्य निर्धारित किया जो “गोमांस , धारा 370 , समान आचार संहिता , श्रीराम , श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर , स्वदेशीकरण थे । इंदिरा गांधी ने आपातकाल में जब सभी को जेल में ठूस दिया तो संघ के प्रमुख बाला साहब देवरस , इंदिरा गांधी से माफी मांग कर छूटे और सभी कार्यक्रम छुपकर करते रहे पर इनको फन फैलाने का अवसर मिला इंदिरा गांधी की हत्या के बाद , तमाम साक्ष्य उपलब्ध हैं कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों में संघ के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था ।राजीव गांधी बेहद सरल और कोमल स्वभाव के थे और उतने ही विनम्र , जिसे भाँप कर संघियों ने अपना फन निकालना प्रारंभ किया और हिन्दू भाईयों की भावनाओं का प्रयोग करके श्रीराम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद के विवाद को हवा दे दी और आंदोलन चला दिया , पर पहले नरम अटलबिहारी वाजपेयी को मुखौटे के रूप में आगे किया जिसकी स्विकरोक्ती गोविंदाचार्य ने भी अटलबिहारी वाजपेयी को मुखौटा कह कर की , संघ का दोगलापन उजागर करने की कीमत उनको संघ से बाहर करके की गई और वह आजतक बाहर ही हैं । दूसरी तरफ लालकृष्ण आडवाणी तमाम तैयार हथियारों के सहारे हिन्दू भाईयों को उत्तेजित करते रहे जैसे आज योगी साध्वी और तोगड़िया करते हैं ।राजीव गांधी के पास संसद में इतनी शक्ति थी कि संघ को कुचल देते तो यह देश के लिए सदैव समाप्त हो जाते परन्तु सीधे साधे राजीव गांधी कुटिल दोस्तों की बातों को मानकर गलत ढुलमुल फैसलों से संघ को खाद पानी देते रहे , कारसेवा और शिलान्यास के नाम पर राजीव गांधी का इस तरह प्रयोग किया गया कि संघ को फायदा हो और संघ की रखैल भाजपा ने उसका खूब फायदा उठाया और दो सीट से 88 सीट जीत गई ।फिर वीपी सिंह की सरकार बनी भाजपा और वाम मोर्चा के समर्थन से तथा संघी जगमोहन को भेजकर काश्मीर में आग लगा दिया गया ।

अब सब हथियार और ज़मीन तैयार हो चुकी थी और प्रधानमंत्री नरसिंह राव का समय काल प्रारंभ हुआ जो खुद संघ के प्रति उदार थे , उड़ीसा में पादरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बच्चों को जलाकर मारने के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद संघ ने इसाईयों के प्रति नफरत फैलाने की नीति छोड़कर सारी शक्तियों को देश के मुसलमानों से नफरत फैलाने में लगा दिया , संघ ने प्रधानमंत्री राव की चुप्पी का फायदा उठाया अपने बनाए झूठे हथियारों से हिन्दू भाईयों के एक वर्ग की भावनाएँ भड़काई और अपने साथ जोड़ लिया । साजिश की संसद और उच्चतम न्यायालय को धोखा दिया और अपने लम्पटों के माध्यम से बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर को गिरा दी ।

इसके बाद अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो सारे जन्म स्थान के मंदिर 370 स्वदेशीकरण सब दफन कर दिया गया और हर छोटे बड़े दंगों में शामिल रहा संघ ने साजिश करके गुजरात में इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार कराया और अपने चरित्र के अनुसार एक नायक बनाया। फिर अपने असली रूप चरित्र और सिद्धांतों के अनुसार उसी असली नायक नरेंद्र मोदी को आगे किया और झूठ और फेकमफाक के आधार पर और आज सत्ता पर कब्जा किया।
संघ की यह सब राजनीति उत्तर भारत के प्रदेशों के लिए थी क्युँकि मुगलों का शासन अधिकतर उत्तर भारत में ही था। दक्षिण के राज्य इस जहर से अछूते थे इसलिए अब वहाँ भी एक मुसलमान शासक को ढूढ लिया गया और देश की आजादी से आजतक 67 वर्षों तक निर्विवाद रूप से सभी भारतीयों के हृदय में सम्मान पा रहे महान देशभक्त टीपू सुल्तान आज उसी प्रकिया से गुजर रहे हैं जिससे पिछले सभी मुगल बादशाह गुजर चुके हैं , मतलब हिन्दुओं के नरसंहारक बनाने की प्रक्रिया।और आज उनकी जयंती पर हुए विरोध में एक यूवक की हत्या भी कर दी गई।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जो जुल्मों और लूट का जो इतिहास प्रमाणित रूप से दुनिया के सामने हैं यह उसकी निंदा भी नहीं करते , इस देश को सबसे अधिक लूटने वाले अंग्रेजों की ये कभी आलोचना नहीं करते जो देश की शान “कोहिनूर” तक लूट ले गये , जनरल डायर की आलोचना और जलियांवाला बाग के शहीदों के लिए इनके आँसू कभी नहीं गिरते , आज संघ के पास शस्त्र सहित कार्यकर्ताओं की फौज है जो शहरों में दहशत फैलाने के लिए सेना की तरह फ्लैगमार्च करते हैं , संविधान की किस धारा के अनुसार उन्हे यह अधिकार है यह पता नहीं । भारतीय इतिहास में जुल्म जो हुआ वह अंग्रेज़ों ने किया और उससे भी अधिक सदियों से सवर्णों ने किया दलितों और पिछड़ों पर , जब चाहा जिसे चाहा सरेआम नंगा कर दिया जो इन्हे दिखाई नहीं देता क्योंकि इनको जुल्मों से मतलब नहीं आपस में लड़ाकर देश मे जहर फैलाकर सत्ता पाने से है और उसके लिए देश टूट भी जाए तो इनसे मतलब नहीं।

इसी लिये कहता हूँ साजिशें करने मे माहिर संघ को “संघमुक्त भारत” करके ही इस देश का भला हो सकता है और यह समय इस अभियान के लिए सबसे उपयुक्त है।

=============

Terror strike on RSS headquarters foiled
JUNE 02, 2006
=========


Praveen Swami and Agencies

High drama as alert policemen gun down three terrorists; Lashkar-e-Taiba principal suspect

Attackers came in a car fitted with red command-light Nagpur police were alerted

NAGPUR/NEW DELHI: Three terrorists were shot dead on Thursday morning during an abortive attempt to storm the Rashtriya Swayamsevak Sangh headquarters in Nagpur the latest in escalating terror strikes across India that have brought enormous pressure to bear on the India-Pakistan détente process.

Police said the terrorists attempted to drive a white Ambassador car, fitted with a red command-light, towards the building shortly before dawn. When guards at the perimeter of the three-level security cordon flagged down the car, its driver attempted to crash through the barriers. RSS chief K.S. Sudarshan and other top functionaries were not present in the building at the time of the attack.

Attackers Pakistanis?

Intelligence sources in New Delhi said all three intruders were thought to be Pakistani nationals, although no detail of their identities was available. “We had reason to believe that an operation of this kind was being planned and asked the Nagpur police to be prepared,” a senior official said.

Officials noted that the attack came just a day after Union Home Secretary V.K. Duggal and his Pakistani counterpart Syed Kamal Shah met in Islamabad to discuss New Delhi’s concerns over continued cross-border terrorism.

Investigators believe that either the Lashkar-e-Taiba or the Jaish-e-Mohammad was most likely to have carried out the attack. Both organisations have demonstrated the capability to execute suicide-squad attacks in the recent past. In July last, Jaish operatives attempted to storm the makeshift temple at the Babri Masjid site in Ayodhya using tactics similar to that adopted in Nagpur. An Ambassador car rigged to resemble an official vehicle was also used in the 2001 Jaish attack on Parliament House.

Deep networks

Of the two outfits, the Lashkar appears to have developed deeper networks in Maharashtra a fact demonstrated by the massive recoveries of explosives last month from a terror cell it set up in the Aurangabad area. Such activities are not new. In June 2004, for example, the Pune-based Lashkar operative Javed Sheikh and his girlfriend Ishrat Jehan Raza launched an operation seeking to assassinate the former Union Home Minister, L.K. Advani, and bomb the Bombay Stock Exchange.

Maharashtra-based Lashkar cells have from the outset sought to eliminate politicians of the Hindu right wing. As early as November 2000, police arrested three Pakistani nationals who had set up a covert cell at Mumbra, near Mumbai, with intent to assassinate Shiv Sena chief Bal Thackeray.

Disturbing evidence has emerged that such recruitment is gathering scale. On Wednesday, The Hindu broke the news of training of several persons from the Maharashtra and Gujarat cadre in Jammu and Kashmir by the Hizb-ul-Mujahideen on behalf of the Lashkar. One recruit, Mohammad Irfan of Kolhapur, was shot dead in an encounter on the outskirts of Tral, south of Srinagar, on Tuesday.
=========


NAGPUR: Police foiled a terrorist plan to blow up the Rashtriya Swayamsevak Sangh headquarters early on Thursday and shot three armed terrorists in an encounter.

The militants, who came in a white Ambassador with a flashing red light and wore police outfits, were killed by the special squad of the local police in a five-minute encounter that took place in a narrow lane, hundred yards from the Sangh building.

Though no terrorist organisation has claimed responsibility, the Nagpur police suspect it to be a handiwork of the Lashkar-e-Taiba or Kashmir-based Hizbul Mujahideen. This was the first terrorist attack in the city.

It began at 4.05 am, when patrolling security guards noticed the Ambassador circling the area from a peripheral road.

When two of them stopped the car a few metres from the barricades on the eastern approach lane, the militants opened fire. The two escaped unhurt as they wore bulletproof jackets and fired back, killing the three militants.

Barring RSS executive body member Indresh Kumar, no top leader of the Sangh was in the building at the time of the attack. Sarsanghchalak K S Sudarshan is in Kolkata, while general secretary Mohan Bhagwat is in Kamptee, RSS sources said.

Kumar told DNA that he had informed all Sangh leaders about the incident in the morning.

Police were on alert following intelligence inputs from central agencies about a probable terror attack.

The security cordon around the Sangh headquarters and Dr Hedgewar memorial in Reshimbagh were intensified following the attack.

Central intelligence agencies had given “specific information about a terrorist suicide squad which had entered Nagpur” to the police.

They had asked the police to seal the city, but police sources believe the terrorists may have entered Nagpur three days ago. After having monitored the RSS building and security arrangements, they might have decided to attack it in the morning, police sources said.

Police said the terrorists had come with AK-47s, hand grenades, about 500 gm of RDX, besides small arms and ammunition.

Police Commissioner Shiv Pratap Singh Yadav told newsmen the terrorists may have come from Patna. “We are probing details like where did they come from, where they stayed and for how many days they were in the city,” he said.

PM FLAYS ATTACK: Prime Minister Manmohan Singh condemned the terrorist bid to attack the RSS headquarters in Nagpur and appealed for calm and communalpeace.

“The entire nation is united against terrorism. All communities should live in amity and peace,” the prime minister said.

Condemning the terrorist attempt, the RSS told its cadres across the country to remain calm while the Bharatiya Janata Party said the United Progressive Alliance must realise that terrorists cannot be fought with kid gloves.

Former prime minister Atal Behari Vajpayee condemned the terrorist bid. He appealed to everyone to remain alert, an aide said.

“Jihadi forces have become bold enough to attempt to attack the RSS headquarters. It is heartening that police have been successful in thwarting their designs. The attempt highlights the need for all our activists to be more alert and cautious.

“There is no need to panic. They should remain calm and take steps for the security of our offices across the country,” Sangh national executive member Ram Madhav said over the telephone from Hyderabad.
===========
Once leaders decided on Hindu terror, babus had to convey it to public: MANI

Abhinandan Mishra
Published : April 21, 2018

===================
R.V.S. Mani

‘In Nanded blast, CBI found that the accused Bajrang Dal man was not involved with any groups.’

The Sunday Guardian spoke to retired bureaucrat R.V.S. Mani who served in the Ministry of Home Affairs in the tumultuous period of 2006 to 2010 when the term “saffron/Hindu terror” was tried to be made a part of the narrative by the UPA government, an attempt that unravelled this week with the acquittal of Aseemanand in the Mecca Masjid blast case. He also talks about 26/11. Excerpts:

Q: Did you come across saffron/Hindu terror when you were with the MHA from 2006 to 2010?

A: I never came across any instance of saffron terror. I have been saying this consistently that we received no such input (from agencies) ever. There was one small case in April 2006 of Nanded, which was discussed (among MHA officials, insinuating the existence of Hindu terror) in June-July 2006. A local garage owner, who was a member of Bajrang Dal, was involved in a blast. In small towns, it is very normal for people to destroy their own property to claim insurance fraudulently. Later, the CBI and other organisations found that he was involved with no groups and was not working to carry out any terror blasts. And since the CBI did not find anything incriminating, Nanded was not pursued further. The question is: Why did they try to give it a Hindu terror angle?

In the Aurangabad arms case of May 2006, the arms that were seized were adequate to wage a war. The whole network was spread across Indore, Khandwa, Aurangabad and Malegaon where SIMI was based. Later, on 1 June 2006, there was an attack on the RSS headquarters in Nagpur. That very day certain things happened.

Q: What happened?

A: In February 2007, the Samjhauta blast happened. Bharti Arora, the SP of Crime and Railway, was the first responder and was the first officer to reach there along-with an inspector. All the signs (at the blast spot) were pointing to a particular terror organisation, Lashkar-e-Tayyaba (LeT). Even the inputs received from the United States and from SAARC on terrorism pinpointed that Arif Qasmani from Karachi (LeT operative) was responsible for the attack. All these inputs are on record. These inputs are in the MHA files. Later, the narrative changed (it was turned into an act of Hindu terror) after the NIA came into being on 1 January 2009, following a presidential assent for the same in December 2008.

Since we are on the topic of NIA, I would like to tell you something which is not related to saffron terror. After Parliament approved the formation of NIA, we did a clause by clause vetting of the Act in cooperation with Law Ministry officials, before it was submitted to the President. I left the Law Ministry in my personal car, with a gentleman from the ministry at 9.40 pm on 30 December 2008 and handed over the documents to the staff at the Rashtrapati Bhavan for Presidential assent at 10 pm. This can be verified. Then I, along with the Law Ministry staffer, drove away in my car. I dropped him near Dwarka Mor Metro station. Soon after I dropped him, I was chased by youths who were on two motorcycles. There is a police post at Sector 13, Dwarka and when I rushed there, I received no help. I somehow managed to dodge them and reach home. This is all on record. Next day I reported all of this to the MHA. It was also communicated to P. Chidambaram (then Home Minister). Till then I was not aware why I was chased that other night.

If you go back, till the first week of January 2009, Pakistan did not accept Ajmal Kasab as one of its citizens. They accepted it later. During this time, some back channel things, which we were not aware of at the time, were happening. We don’t know what was happening. But citizenship of Kasab was definitely a topic.

Now let me take you to the interrogation of terrorist and Mumbai attack plotter David Coleman Headley, who very clearly said that attempts were made to take people hostage so that they can be used to secure the release of Kasab.

My report (of being chased and no policemen being present at the police chowki) was taken up by Delhi police formally only on 19 January 2009, 20 days after the incident and two weeks after Pakistan had accepted Ajmal Kasab as their national. Later, the police, after investigating my complaint, stated that all constables and officials, who were supposed to be there at the police post, were “away” on duty or were removed from the post at the time of the incident. After six months (of the incident), I learnt in a casual closed door meeting with MHA officials that the plan was to kidnap me so that Kasab could be set free. All this is a matter of record. I knew sensitive details about the whole attack, had monitored it while it was happening in Mumbai. Even the “sarkar” was aware of it and maybe was a party to it. I am not making any allegations; all this can be corroborated from official records.

Q: Former Home Secretary and now Union minister, R.K. Singh had at the time admitted the presence of Hindu terror.

A: What will R.K. Singh do? You need to understand how things move in the bureaucracy. On the basis of whatever inputs are received from intelligence agencies, we make our reports and present it to the minister. But if the minister takes a contrary call, then we are bound to follow the decision taken by the minister and make it public. No officer has the power to go against the narration that has been decided by his minister or the top leadership. Once the top leadership and the minister decided it was “Hindu terror”, R.K. Singh had no choice but to communicate the same to the public. There was no input about “Hindu terror”, but once the communication was received that it has to be “Hindu terror”, Singh had no choice. If he did not, he would have suffered. If the minister says that an affidavit needs to be changed, it has to be changed, nothing can be done. This also happened during the time of G.K. Pillai.

Q: Are you referring to the second affidavit that was filed in the Ishrat case? (The MHA, after stating that she was a part of Lashkar-e-Tayyaba, denied this in the second affidavit.)

A: Yes. And I don’t know why R.K. Singh is avoiding the media. He should come out and say what exactly happened. So many things were happening which should not have.

Children light candles in memory of the victims of the Samjhauta Express train in Jammu, on 22 February 2007. REUTERS
Q: Like?

A: On 11 December 2008, after the Mumbai attack, the Home Minister gave a suo-motto statement in Parliament on Mumbai attacks regarding a suspected Lashkar boat in the Pakistani water being cited by the Indian Navy before the actual attack. He also said that in the absence of any further inputs, no action was taken. Ask him did the Indian Navy abandon the search for the boat (which eventually entered India with the terrorists) sou-moto or was it asked to abandon it? If they were asked to abandon it, who asked them to abandon it?

Indian Navy does the job of surveillance in its normal course. They don’t wait for intelligence input. Intelligence inputs act as force multipliers. Hence, they would not have abandoned their surveillance unless any direction comes from the top.

We also got credible and strong inputs that the 10 terrorists were helped by Indian nationals. They came from Colaba area, heavily armed and they just walked into Mumbai and no one noticed? Would that have happened without local assistance? There was an Indian hand and intervention, but it was never investigated since it was stopped at the top level.

Pakistan had communicated that a call had been made to Asif Zardari by Ministry of External Affairs on the day of the attack. Pranab Mukherjee had made no such call. So who did it? What was the call about? Why was it made?

A top bureaucrat of the rank of Additional Chief Secretary (Home) was in the Taj Hotel when the attack took place. The inputs about the possible terror attack on the Taj were shared with these officials too. After the Chief Secretary, such sensitive information lands on the table of the Additional Chief Secretary (Home). What were they doing there?

These are the questions about 26/11 attack that need to be answered.

You should also recall that in a reply to a starred question in the Lok Sabha No. 78, on 2 March 2010, the Home Minister replied that the investigating agencies were informed by Kasab that they (terrorists) were assisted by an Indian. Was Kasab’s admission not found to be substantiated by investigators or they were asked not to pursue it? A Bollywood personality’s name had also come up during the post attack investigation after which a letter was received from the personality explaining his position.

Somewhere in March 2010, the relatives of this personality met a Union minister in Delhi in the Haley Road area, to seek help in the matter—the meeting was facilitated by a TV journalist.

The Bollywood personality could have used a legal route of recording the statement before a magistrate to get his exoneration if he was innocent. Any lawyer would have guided him on this.

You must also keep in mind that all the senior officials involved in the internal security were in Pakistan when the 26/11 attack took place. They were taken to Murree in Pakistan, a travel plan, that was not originally in the itinerary and do understand that Murree does not have a good communication system (weak mobile network). This all was part of a well planned design.

Q: Design?

A: Normally, Additional Secretary (Border management) has no role there—conventionally, he was not supposed to go. But he was included in the delegation at the behest of a political leader at the last minute. Later on, when the proposal to extend the stay and go to Murree was made, it was he (Additional Secretary, Border Management) who prevailed over the Home Secretary and extended the tour. And we know what happened after that.

Q: The Mumbai attacks?

A: Yes, and when it was happening, the internal security apparatus that could have handled it was not in place. I was there in the control room and working under the guidance of two Joint Secretaries who were doing their best to do whatever they could. Everybody was calling us up, the MEA, the PMO, the Home Minister, the embassies and we had no answers. We sent a proposal that since CISF and CRPF units were there, we should move them as first responder since both, especially CISF, are trained in securing buildings and vital installations (just like Taj Hotel) but Shivraj Patil (then Home Minister) would not respond. It was well past midnight on 26/11 that our officers, who were in Pakistan, were able to come back, after a BSF aircraft was sent to pick them up. For 18 hours (since the attack started) the top bureaucrats, who were assigned the job, were not there to take decisions and internal security was directionless. These 18 hours gave the terrorists enough time to entrench themselves securely. The attack could have been avoided, should have been avoided, the subsequent loss of life could have been avoided.

Q: Do you suspect individuals were working on the directions of Pakistan?

A: In April 2007, a student was arrested from Pune for spying for ISI. His father was in the Army. He was honey trapped by a Pakistan based girl through social media. He later converted, got married and after investigations we found that the boy, who had access to sensitive information due to his father’s post, had revealed everything to her. She was a Karachi based “call girl”.

In 2008, we received inputs that politicians from UP and Bihar, bureaucrats, policemen, top officers in PSUs, defence personnel and people working in the media were either honey trapped or were forced to work for ISI for other reasons. This is all available with the MHA. The names were not there. Some of them had even converted and married, which was solemnised by a Pakistani cleric in Mau, the details of which are maintained by him in a separate register. Some of these politicians are still active.

Since the conduct rules of IAS and IPS officers are not our domain, this report was sent to Inderjeet Kaur (who was the director, police, at that time) and S.S. Shukla (Under Secretary, DoPT). I don’t know if any action (based on the report) was taken or not. I am not imputing anything, just stating what had happened.

==========

Author : Gaurav Pandhi

‘Saffron Terror’ – the Bogey and its gears!
OCTOBER 1, 2012
=================

The term Saffron Terror is widely known & unspoken and it is no hidden fact now that the RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) and its sister-organizations, together called the Sangh Parivar, has been involved in various terrorist activities in India, in the recent past.

There have been many voices, exposing the Saffron terrorism, but only to be ridiculed by the Sangh and mainly by its political wing, the Bhartiya Janta Party.

Nevertheless, on 29thSep 2008, a bomb explosion took place in the crowded Bhiku chowk of Malegaon, killing 6 people and injuring more than 100. Fortunately for India, and unfortunately for the Brahminists, the investigation was to be carried out by the then Mumbai-ATS Chief Hemant Karkare. As the investigation proceeded, the debunking of the Sangh Parivar came on the track. The police investigation reached Sadhvi Pragyasingh Chadrapratapsingh Thakur (former active member of ABVP and national executive of secretary of Durga Vahini, VHP’s women wing) and further, Manoj Sharma, an RSS member. A preliminary enquiry with Pragyasingh Thakur lead to more of her associates named Shivnarayan Kalang and Shamlal Sahu, a BJP member.

The investigations clearly implicated the involvement of the Sangh in the Malegaon bomb blast. This case along with the Samjhauta Express blast case became the final nails in the Sangh’s head, attesting it to be involved in terrorist activities in the country.

The ATS Chief progressed in unfolding the whole plot and the miscreants mentioned

above were in custody, waiting being tried in the court of law. Before the whole case could be concluded, the Mumbai-ATS lost its dreaded Chief, Karkare, in Mumbai attacks of 2008, where Karkare along with other officials died in the lanes of Mumbai, fighting the terrorists.

In fact, the Malegaon incident is not the only one in the Saffron Terror’s credentials; there is a long list of incidents – that due to unknown reasons were never as hugely debated as the other terror incidents.

S.M. Mushrif is an ex-Inspector General of Police, Maharashtra, an RTI activist and Anna Hazare’s associate. It was Mushrif who exposed Abdul Karim Telgi’s fake stamp paper scam. The former IG has authored a book titled “Who Killed Karkare”. The book has been written mostly on the basis of historical facts derived from the material from the public domain, own experiences and few ‘presumptions’ of the author. The writings of the author and the questions raised by him prompted the Mumbai High Court to seek a response from the Government and the investigating agencies, in 2010.

The author analysed how & why the communal dissonance began between the Hindus & Muslims in the past, how & why it were unsuccessful for the rightist in 2002 and how & why instead of the riots, post 2002, the Muslim Terrorism surfaced in India.

However, the interest of this dissertation is to list down, not what all S.M. Mushrif has analysed in his book (for that, you may, better read the book itself and be your own judge to agree or disagree with what book concludes), but to list down the militant incidents the Sangh Parivar has been involved in, since last 12 years. On page number no. 47 of the book, the author lists the incidents along with the source of information and it goes as under: (the exact text from the book)

March 2000: Bajrang Dal organized a training camp at Pune to train its activists, among other things, in the use of gelatin sticks. About 40 to 50 state-level activists attended the camp. Himanshu Panse of Nanded (who later died while preparing a bomb in April

2006) was the group leader. The camp was organized by Milind Parande, the head of the Bajrang Dal’s All India Physical Education wing. (As disclosed in the investigation of Nanded blast case of 2006)

2001: 40-days training camp of RSS-Bajrang Dal activists was organized on the premises of the Bhonsala Military School,

Nagpur. A total of 115 activists from all over the country, including 54 from Maharashtra, attended the camp. The trainees were imparted training in handling of weapons, making of bombs and exploding the same. Retired Army officers and retired senior IB officers were among the trainers. (As disclosed in the investigation of Nanded blast case of 2006 and Malegaon blast case of 2008)

2003: At a training camp organized at Akanksha Resort on Sinhgad Road near Pune, activists were given training in preparing and detonating bombs. About 50 youths attended the training. A man identified as “Mithun Chakravorthy” was the main person who not only imparted training in the use of explosives but also handed over large quantities of explosives to the trainees on the concluding day. Among others who imparted training were serving and retired army officers, an arm expert from Pune, Rakesh Dhawade and Dr. Deo. (As disclosed in the investigation of Nanded and Malegaon blast cases)


15th May 2002: “153 members of Sangh Parivar between the age of 15 and 45 years attended a 21-day orientation camp in Pune city. In khaki shorts, they learnt all about “Hindu Rashtra” neatly mixed with Lezim, Lathi, Yoga, Kho-Kho, Kabbadi and a smattering of spoken Sanskrit. This summer camp was behind padlocked gates. No stepping beyond the gates and no surprise visitors”. Similar camps were being organized at 71 locations across the country, at the same time. AT Latur (Maharashtra) 45 to 60 years –old persons were taking lessons meant for senior citizens. (Pune Newsline [The Indian Express] 15th May 2002)

31st May 2002: A week-long training camp of Bajrang Dal activists was held at Bhopal, Madhya Pradesh, in which nearly 150 activists were imparted training in the use of firearms. The camp was organized to train youths to fight in case a war with Pakistan breaks out. (The Times of India, Pune, 31st may 2002)

18th May 2003: A camp for female activists of Vishwa Hindu Parishad was organized in Mumbai from 17th May 2003, to train girls in Karate, Judo and combat with Knives and swords. (Sunday Times of India, 18th May 2003)

31st May 2003: As a part of the RSS’ nation-wide training programme for women, started in Kanpur on May 25, retired army personnel gave special training to nearly 70 girls on how to load a gun, aim and shoot, while Judo trainers educated them in the martial art. Six more training camps were held in different district of the state (U.P) while all over the country, this programme was organized in 73 cities. (Sunday Express, Pune, 1 June 2003)

18 May 2001: Explosion of pipe bomb occurred near Nageshwarwadi Ganesh temple of Aurangabad. (Lokmat, Aurangabad, 24th May 2006)

17th November 2002: Explosion of pipe bombs occurred near Khadkeshwar Mahadeo temple and near VHP office in Niral Bag of Aurangabad (website of Loksatta on 24th May 2006 and Lokmat, Aurangabad, 17th November 2003). (After the bomb explosion in Nanded on 6th April 2006, in which two RSS and Bajrang Dal workers were killed while making bombs, police found that there were also pipe bombs and there was a striking similarity between their bomb and the Aurangabad bombs – Lokmat, Aurangabad, 24th May 2006)

1st June 2006: There was an attempted attack on the RSS headquarters at Nagpur, in which three terrorists of Pak-based terrorist group were killed in the encounter. (The fact-finding team headed by Mr. BG Kolse Patil, retired High Court judge, came to the conclusion after enquiry that the encounter appeared to be fake and demanded judicial enquiry. This operation was apparently by the IB at the instance of the RSS)

November 2003: Bombs were thrown on Mohammadia Masjid, Parbhani.
August 2004: Bombs were thrown on Merajul Ulum Masjid Purna (Distt. Parbhani).
A bomb was thrown on Kadria Masjid, Jalna.

6th April 2006: Explosion occurred in Nanded in which two activists of RSS-VHP-Bajrang Dal were killed and three injured while making bombs.

OLYMPUS DIGITAL CAMERA

10th February 2007: In a mysterious blast in Nanded, one Pandurang Bhagwan Amilkanthwan (age 28) was killed and another person, Dnyaneshwar Manikrao Gonewar (age 40), was seriously injured. Both are suspected to belong to Bajrang Dal. (The Times of India, Pune, 11th February 2007)

September 2007: Three boys, claiming to belong to an organization called “Jehad-i-Islami” and extorting money from people by sending threatening letters had been arrested by Rampur (U.P.) Police. But all three were non-Muslims. They were identified as Rajpal Sharma, Dori Lal and Dharam Pal. (The Milli Gazette, 1-15 October 2007)

26th September 2007: Six bombs were found in Mumbai ahead of cricketer’s arrival. The Mumbai Police arrested two persons, viz., Rajeev Govind Singh and Sumitra Badal Roy who were carrying six low-intensity bombs, enough to kill at least half a dozen people, ahead of the Indian team’s victory procession through the city. (The Times of India, Pune, 27th September 2007)(One shudders to think what would have happened if they had succeeded in throwing the bomb at the procession and were not caught. Moreover, what could have been the reaction of the police, the public and the media, if these two persons happened to be Muslims?)

12th December 2006: Nasik Police seized 50 detonators, 11 boxes containing gelatin sticks and five tins of ammonium nitrate from an unidentified vehicle near Nasik. They are suspected to have links with Bajrang Dal. (Weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

2006: 15 Kg RDX was found in the house of one Shankar Shelke, a resident of a village in Ahmednagar district. The person later died in under mysterious circumstances. (Marathi weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

2006: From a sugar factory at Pathari (Distt. Ahmednagar) a large quantity of explosives was seized by police. (Marathi Weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

14th October 2006: From the house of the “Sarpanch” of Adgaon village in the jurisdiction of Chikalthana P.S. of Aurangabad, 4.5 Kg ammonium nitrate, 186 sticks of gelatin and 566 detonators were seized by the Police. (Marathi weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

2006: From a club on Aurangabad-Mumbai Highway, police seized 20 Kg Ammonium nitrate and 18 sticks of gelatin from one Laxman Jayavant. (Marathi weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)
11th October 2007: In a powerful blast in a village in Yevatmal district of Maharashtra, one Dr. Bafna was killed. The deceased was suspected to belong to RSS. (Marathi weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

2007: Ammonium nitrate and gelatin sticks worth Rs. 14 lakh 72 thousand were seized by the Latur district police from seven youths. Their names were Vikas Mawad, Kailas, Vinod, Dhananjay, Nitish, Mahesh and Ganesh. (Marathi weekly Shodhan, Mumbai, 4-10 July 2008)

15th October 2007: On the eve of Diwali, bombs were sent as gifts to some persons in Wardha. Police arrested four persons in this connection, viz., 1) Chintu alias Mahesh Thadwani, 2) Jitesh Pradhan, 3) Prakash Balve and 4) Ajay Jivtode. However, the “mastermind” of this plan, one Bandu Telgote alias “Laden” was still absconding. (Dainik Bhaskar, 3 November 2007)

20th February 2008: A bomb was planted at Cineraj Cinema in Panvel town, about 50 Km from Mumbai during the screening of the film “Jodha-Akbar”. (Communalism Combat, Mumbai, July-August 2008)

31st October 2008: The Bomb Detection and Disposal Squad (BDDS) of the police, defused a bomb found in a plastic carrier bag at an auditorium in Vashi, Navi Mumbai. Later it was found to be planted by a Brahminist organization. (Communalism Combat July-August 2008)

4th June 2008: A bomb exploded in the Gadkari Rangayatan theatre in Thane, where a Marathi play “Amhi-Pachpute” was due to be staged. Seven persons were injured. Police found that Brahminist organizations such as Guru Kripa Pratishthan, Sanatan Sanstha and Hindu Janajagruti Samiti were behind the blast at Gadkari Rangayatan and for planting bombs in Vashi and Panvel. (The Indian Express investigation shows that the linkages to these groups of Maharshtra and Goa go all the way to Australia and U.S., as reported in Communalism Combat, July-August 2008). During their investigation, police recovered massive stocks of explosive items at Penn and Satara at the instance at the arrested accused.

24th January 2008: A bomb blast took place at the RSS office at Tenkasi in the Tirunelvedi District of Tamil Nadu. After a thorough investigation, the Tamil Nadu Police arrested eight persons belonging to Sangh Parivar outfits. The police said 14 pipe bombs were assembled and the operation had begun from July 2007. The arrested persons confessed that their objective was to create communal divide. (The Milli Gazette, 16-29 February 2008)

April 2008: In the investigation of a minor riot involving two different communities, police found that in village Amerti of Chopda Taluka of Jalgaon district, deadly weapons like pistols, swords, choppers, etc. were manufactured on a large scale. The investigation also revealed that one person by name Shetty Phitewala, who was a resident of Samatanagar and an active member of a communal party, gave training to the youth in the use of weapons and showed communally provocative films and CDs to them. (The Milli Gazette, 16-31 May 2008)

17th April 2008: The Malegaon Police raided a pathological laboratory situated in the basement of a private hospital and recovered five live RDX explosives, three used RDX explosives, one pistol, a laptop, a scanner, two mobile phones, four fake currency notes of Rs. One Thousand each and Rs. 5,000 in cash and arrested three persons, viz., Nitish Ashire, Sahebrao Dhurve, and Jitendra Khema belonging to some unknown organization. (The Milli Gazette, 1-15 May 2008)

June-July 2008: RSS activist, Suraj Narain Tonden, was arrested by Bara Banki Police for conspiring to demolish the Thakur
Dwara Temple of the city. (The Milli Gazette, 16-31 July 2008)

October-November 2007: In the investigation of the bomb blast at Thane and planting of bombs in Vashi and Panvel, it was revealed that the same gang had planted a bomb in the Muslim graveyard of Ratnagiri on Ratnagiri-Panvel road, at the time of Diwali last year, but fortunately it did not explode. (The Milli Gazette, 16-31 July 2008)

April 2008: Near Ajara in Kolhapur district on 10th April 2008, police arrested two youths, Oliver Bardeskar and Datta Shankar Pachawadekar, while carrying on a motorcycle 35 crude bombs, ammunition and a gun. (Daily Pudhari, Kolhapur, 11 April 2008)

July-August 2008: One Pramod Mutalik of Rashtriya Hindu Sena (RHS), an outfit of RSS, has formed an Anti-Terrorist Squad at Bangalore, with 700 people from all over the state and 150 from Bangalore. Mutalik claimed that he has set up the team to weed out terrorism from the state. (Pune Mirror, 23 August 2008)
Pramod Mutalik also heads Sri Ram Sene. He claimed that a total of 1,132 Hindu suicide bombers have become members of his suicide squad. Sri Ram Sene has also set up secret training camps in Mangalore, Belgaum and Shimoga in order to provide training to these suicide bombers. (The Milli Gazette, 1-15 November 2008)

2nd August 2008: Faizabad (U.P.) Police arrested a terrorist in the guise of a Sadhu, carrying live bombs in his jhola (bag) while entering court premises. His name was found to be Nankaoo Das. (The Milli Gazette, 1-15 September 2008)

24th August 2008: Two Bajrang Dal activists, viz., Rajeev Mishra and Bhupinder Singh, died while making explosive devices in Kanpur (U.P.). The IGP Kanpur zone told reporters that investigations had revealed that there were plan for a massive explosion. Apart from the huge stock of explosive material, the police found a diary and a hand-drawn map of minority-dominated Ferozabad. (Outlook, 15 September 2008; Communalism Combat, September 2008). In the investigation of this case STF (U.P.) found that the deceased Bajrang Dal members had frequently called up two monile phones in Mumbai two months before the blast. But on enquiry, the SIM cards were found to have been obtained in fake names. The police were trying to get details of the calls from service provider. The police said that large quantities of chemicals recovered from the house of Mishra could have caused destruction like the ones in Gujarat and Bangalore. (The Times of India, Mumbai, 29 October 2008)

21st September 2008: Dakshin Kannada Crime Branch of Managalore (Karnataka) arrested one Duresh Kamath for illegaly storing huge quantity of gelatin sticks, detonators and other explosives in a private commercial complex in Puttur. (The Milli Gazette, 1-15 October 2008)

3rd October 2008: In Talegaon Dhabhade (Distt. Pune) “Durga Mata Daud” (rally) was organized by VHP and Bajrang Dal on 2nd October 2008 on the occasion Dussehra. In the rally, youngsters carrying swords, lathis and flags participated. (Daily Lokmat [Hello Pune], Pune 4 October 2008).

Several such rallies were organized elsewhere in Maharashtra, in which swords, torches, trishuls and lathis were carried openly and provocative slogans against Muslims were raised. The largest rally was in Sangli where about 5000 people participated.

29th September 2008: Hindu Jagran Manch, an Indore-based extremist group having links with BJP’s student wing ABVP, carried out bomb blasts in Malegaon (Maharashtra) and Modasa (Gujarat) in which, respectively, six and one persons (all Muslims) died. (The Indian Express, Pune, 23 October 2008)

Later in the Investigation, the involvement of a Hindutva (Brahminist) terror group called Abhinav Bharat and some army officers and religious leaders was revealed. It has been suspected that the same group is responsible for bomb blasts on Samjhauta Express, Ajmer Dargah and some other places.

In this connection, some highly explosive facts came to light. Members of the Abhinav Bharat terror group were preparing for a nationwide bombing campaign as early as 2002. In December 2002, the M.P. Police had discovered an improvised explosive device at Bhopal’s railway station. A second IED was found exactly a year later in Bhopal’s Lamba Khera neighbourhood. Both bombs were intended to attack delegates arriving in the city for the annual convention of the Tablighi Jammat, an event that attracts 5 lakh Muslims. Madhya Pradesh Police, the sources said, soon developed information linking the attempted bombing to local Hindutva activists, Ramnarayan Kalsangram and Sunil Joshi. Both men, now alleged by the Maharashtra ATS to have occupied commanding positions in Abhinav Bharat, were questioned along with several other suspects linked to the Bajrang Dal activities. (Hindu, Delhi, 20 November 2008)

But what transpired in the enquiry and what action was taken against these terrorists is not known. Apparently, they were allowed to walk free; otherwise they would not have been able to cause blasts in Malegaon, Modasa, Ajmer, Samjhauta Express, Mecca Masjid and many other places.

10th November 2008: Two RSS activists were killed in a bomb blast in Kannur district of Kerala while assembling a bomb. The next day while searching the area the police recovered 18 crude bombs from the house of BJP leader Prakashan, about 200 meters away from the spot where the two persons were killed. (The Indian Express, Pune, 11 November 2008 and the Times of India, Pune, 13 November 2008)

9th November 2008: Acting on a tip-off, police recovered seven live crude bombs from village Manjargaon of Badnapur tehsil in Jalna district of Maharashtra. One person was arrested and further investigations were going on, said police officials. (The Indian Express, Pune, 11 November 2008)

11th November 2008: ULFA chairman Arbinda Rajkhowa alleged on 11th November 2008 that RSS was behind the deadly October 30th blast in Assam and ethnic violence in Bodo Territorial Administered Districts (BTAD) which claimed 140 lives (85 in blasts and 55 in ethnic violence). He also claimed that ULFA had enough evidence to prove RSS involvement in the blasts. A few months ago in its mouthpiece, Freedom, ULFA had mentioned the secret directives sent by RSS to carry out blasts in different parts of the country, but the government took no steps in this direction. (DNA online news, 11 November 2008)

10th December 2008: Two Maharashtrian youths, identified as Mahesg Parab and Anil Jagtap, were arrested by the Gujarat Police at Khambalia near Jamnagar on suspicion. The police recovered from the two laptops, four mobile phones, a motorcycle and maps of Jamnagar airport, Saurashtra region, Attari border, areas of Gujarat and Rajasthan and the maps of Reliance and Essar companies. They were handed over to the ATS for further enquiry. (Marathi daily Pudhari, 10December 2008)

27th December 2008: Bajrang Dal organized a three-day camp for training youths “to fight against terror”. The camp was organized during 27-29 December without prior permission of police officials. Youngsters were taught the art of wielding lathis, swords and air-rifles and they also participated in discussions on how Islamic Jihad was responsible for the recent terror attacks. The camp was attended by youths between the age group of 18-35 years, from across Mumbai. (Asian Age, 29 December 2008 and The Milli Gazette, 16-31 January 2009)

12th January 2009: A Karnatka dacoit, Nagaraj Jambagi, with link to a radical Hindu right wing group confessed to having carried out the Hubli district court bombing of 10 May 2008. Sources in the state intelligence said that Jambagi and two others in this gang, Ramesh Pawar and Kingaraj Lalgar, were members of a radical right wing Hindu group.

The blast had taken place, as the first phase of the polling for Karnataka Assembly election was on, in a magistrate’s court room where cases against SIMI leaders including Safdar Nagori were scheduled to be heard two days later. The investigation was not concluded, but SIMI was widely believed to have been responsible. (The Indian Express, Pune, 13 Januar 2009)

4th April 2009: A bomb explosion took place in a non-descript village called Ghatsavali in Beed district of Maharashtra. The village has a population of about 1,000 with only 70 to 80 Muslims. The blast case was detected and three persons, Ashok Lande, Mayoor Lande and Tulshiram Lande were arrested. During the interrogation, they told the police that they caused the blasts as they did not want a mosque in the village. (Marathi weekly Shodhan, 29 May-4 June 2009) In this case the explosion may have caused little physical damage, but its implications are very dangerous.

The above said incidents are the ones listed by the author in his tome; however, one may ponder how many such incidents would have occurred since last three years (2009-2012) and went unnoticed. Something more surprising is that though all of these incidents were reported in local / national dailies, the electronic media completely ignored them in their reports, leave alone triggering the debates.

Perhaps, it seems the word ‘terrorism’ holds a different definition, when it is pre-fixed with ‘Hindutva’.