संघ की विचारधारा क्या है, इसका लक्ष्य क्या है, 80% संघी यह नहीं जानते : Dr. B.N. Singh का आलेख

Posted by

मैं 38 साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में रहा हूँ और ओटीसी भी किया हूँ।
मैं कक्षा चार से ही संघ में गिरफ़्तार हो गया था और अटल जी [अटलबिहारी वाजपेयी] तक रहा।
वैसे 1988 से ही संघ से मेरा मोहभंग हो गया था पर कुछ व्यक्तिगत संबंधों के कारण जैसे गोविंद जी, विनय कटियार, और बाल जी मैं संघ से जुड़ा ही रहा।
जैसे-जैसे मैं गांधी-नेहरु, मार्क्स-लेनिन और चे गुवारा जैसे लोगों को पढ़ता गया और संघ के अन्दरूनी लोगों को समझता गया, तो संघ से एक दूरी भी मेरे भीतर बनती चली गयी थी।
आज यूपी के जितने मंत्री है, सरकार में, सब हमें अच्छी तरह जानते हैं।
ख़ैर, संघ है क्या, और इसकी विचारधारा क्या है? इसका लक्ष्य क्या है? 80% संघी यह सब नहीं जानते हैं।
वैसे कोउ भी संघ का स्वयंसेवक कभी भी गालीगलौज नहीं करता। ये उसकी सबसे बड़ी अच्छी मेरिट है।
और हाँ, वह तर्क भी नहीं करता। संघ के खिलाफ़ सुनता नहीं, और जहाँ संघ के ख़िलाफ़त की जगह हो, वह वहाँ नहीं रुकता।
अतः 100% गारंटी है कि फ़ेसबुक पर जितने भक्त हैं वे मोदीभक्त हैं : निहायत बदतमीज़। मोदी की ही तरह। और वे बिना किसी आधार या तर्क के पंडित नेहरु और मुसलमानों का विरोध करते है : जब आप तर्क करेंगे तो वे वहाँ से हट जायेंगे।
वहाँ किसी प्रतिभावान को आगे नहीं रखा जाता।
जनसंघ से लेकर बीजेपी मे आज तक कोई प्रतिभावान व्यक्ति आगे नहीं लाया गया है।
जो थोड़ा भी प्रतिभावान होता है उसका हश्र बलराज मधोक, दीनदयाल उपाध्याय और [लालकृष्ण] अडवानी वाला होता है।
हिन्दुत्व की खोज तो [विनायक दामोदर] सावरकर की है लेकिन उसके असली आइडियोलाॅग [माधव सदाशिव] गोलवलकर थे।
संघ पहले महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मणों का एक गिरोह था। पहले इसका नाम अंग्रेज़ों के ज़माने में राॅयल सीक्रेट सर्विस था। और अंग्रेज़ों के दलाली के लिये ही यह बना था। आज़ादी के लड़ाई में एक तरफ़ अंग्रेज़ों की दलाली भी करते थे, और दूसरी तरफ़ [इटली के फ़ाशिस्ट शासक बेनिटो] मुसोलिनी और [जरमन देश के तानाशाह अडोल्फ़] हिटलर से भी संबंध रखते थे।
इनके विचार मुसोलिनी और हिटलर के विचार हैं।
इनका आकलन था कि सेकेंड विश्वयुद्ध मे हिटलर जीत जायेगा। और उसके समर्थन से ये भारत पर कब्ज़ा कर लेंगे। लेकिन हो गया था उल्टा।
इनका लक्ष्य तथाकथित हिन्दू राज्य है जहाँ जर्मन रेस के हिटलर की तरह चितपावन रेस के ब्राह्मणों का इस देश पर राज हो, और मनुवादी संविधान, जिसमें ब्राह्मण सुप्रीम और सब उनके अन्डर रहें। दलित और औरतें ख़ासकर ग़ुलाम हों। दलित सबकी सेवा करें, और औरतें सिर्फ़ बच्चा पैदा करें।
ख़ैर, गांधी-नेहरु ने इनके सपने को चूर-चूर कर दिया।
ये भी तथ्य है कि हमारे देश में सदियों से चली आ रही शोषणकारी व्यवस्था जो असमानता के ऊपर बनी है इन संघी लोगों के लिये खाद-पानी का काम कर रही है।
ये किसी को भी समर्थन दे सकते हैं और ले सकते हैं, बशर्ते कि वह इनके हिन्दू राज मे बाधा न हो।
इन्होंने माफ़ी मांगकर [तत्कालीन भारत के गृहमन्त्री सरदार वल्लभभाई] पटेल को समर्थन दिया, आपात्काल में [प्रधानमन्त्री] इन्दिरा गांधी का समर्थन किया। 1980 में अटल जी के “गांधीवादी समाजवाद” के खिलाफ़ इंदिरा जी को समर्थन किया और 1984 में इंदिराजी के बाद राजीव गाँधी का भी समर्थन किया।
1975 से तो मैं साथ ही हूँ।
बनारस में राजनरायन को हराने के लिये और कमलापति त्रिपाठी को जिताने के लिये ये घोषित प्रत्याशी भरतसिंह राजपूत को बदलकर ओमप्रकाश सिंह कुर्मी को लाये थे। जिससे कुर्मी वोट राजनरायन को न मिले। और 20,000 वोट से राजनरायन हरा दिये गये थे।
मेरा मतलब है कि ये दिल्ली में उसी को मदद करते है जो इनके एजेन्डे में बाधा नहीं होता।
राजीव गाँधी ने अयोध्या में ताला खोला। पटेल के ज़माने में वल्लभभाई पंत ने अयोध्या में 22 दिसंबर 1949 के रात को बाबरी मस्जिद मे रामलला की मूर्ति रखवायी। पंडित नेहरु को अंधेरे मे रखकर। नेहरु ने यहाँ तक कहा कि जिस यूपी कांग्रेस में मै 35 साल इन लोगों के साथ काम किया, आज वो मेरे लिये फ़ाॅरेन लैंड हो गयी है।
पंत ने महन्त दिग्विजयनाथ से मिलकर आचार्य नरेंद्रदेव को भी हरवाया था।
मतलब यह कि संघ का रिश्ता नेहरु को छोड़ कांग्रेस से सदैव रहा है।
नेहरु इनको जानते थे और औक़ात में रखते थे।

इनको क्या चाहिये? बिकास? – बिकास इनका एजेन्डा कभी नहीं था, और न है।
मन्दिर, 370 और काॅमन सिविल कोड। इन तीनों का मोदी कभी नाम नहीं लिया।
अयोध्या जाना तो दूर, मोदी उसकी चर्चा भी नहीं किया।
370 के समर्थन से काश्मीर में सरकार बना लिया, मोहन भागवत के छाती पर मूंग दलकर।
काॅमन सिविल की जगह मुसलिम महिलाओं के लिये तीन तलाक का खेल खेलने लगे।
मोदी चिल्लाकर बोलता है कि [डाॅक्टर भीमराव रामजी] अम्बेडकर नहीं होते तो मैं पीएम नहीं बनता। कभी कहा कि सावरकर, गोलवलकर, भागवत ने हमें पीएम बनाया!
अटल से ज्यादा मोदी और अमित शाह संघ के लिये ख़तरनाक हैं। मोदी के काट के लिये [महन्त आदित्यनाथ] दिग्विजयनाथ के रूप में उत्त्तराधिकारी को लाया गया।
मोदी के प्रत्याशी को गोरखपुर में जानकर हराया गया।
कोल्ड वार ज़ारी है।
मोदी और शाह का खेल बहुत लंबा नही चलेगा। बीजेपी चुनाव मे खुद संघ के द्वारा हरा दी जायेगी अगर मोदी पीएम के प्रत्याशी रहे तो। नहीं तो 2019 मे वे हटा दिये जायेंगे।
अब तो राहुल भी इंडियन नेशनलिस्ट की जगह हिंदू नेशनलिस्ट की सर्टिफिकेट्स बटोर ही रहे हैं। कभी आपने संघ द्वारा सोनिया [गाँधी] या उनके परिवार के ख़िलाफ़ कोई बात सुनी है।
मोदी के इच्छा के खिलाफ़ [मनोहरलाल] खट्टर ने सब [राॅबर्ट] वाड्रा का केस ख़तम कर दिया।
कल जो अडवानी थे आज मोदी को बनाया गया, और आज जो अडवानी है कल बहुत ही जल्दी मोदी होने वाले हैं।
संघी कभी सत्ता से टकराव मोल नहीं लेते, परन्तु समय आने पर शासनसत्ता को उसकी औक़ात भी बता देते हैं।
संघ में प्रतिभाहीन, सरस्वतीविहीन, लगनशील लोग ही आगे बढ़ते हैं, और मोदी ने संघ को दरकिनार किया है, पर बकरा की माँ कब तक ख़ैर मनायेगी!

साभार उद्धृति • वाॅल शोभाकर