सऊदी नरेश का वेतन, जान कर हो जाएंगे हैरान!!!

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दुनियां के सबसे संपन्न देशों में से एक सऊदी अरब को लोग कई वजहों से अच्छा मानते हैं,सऊदी अरब की कानून वयवस्था पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है, यहाँ जो कानून प्रजा के लिए है वही हुकूमत में उच्च और उच्तम पदों पर बैठे लोगों के लिए हैं, सऊदी अरब में खानपान की हर चीज़ 100 फीसद सुध मिलती है वहां मिलावट की कोई गुंजाईश ही नहीं है, सऊदी अरब में कोई भी नहर नहीं है फिर भी वहां पानी की कमी नहीं होने दी जाती है, सऊदी अरब विश्व के सबसे शांति प्रिय देशों में से एक है जहाँ अपराध दर जीरो मानी जाती है, सऊदी अरब में हर नागरिक की शिक्षा का पूरा खर्चा वह देश के अंदर हो या विदेशों में सरकार उठती है, वहां विवाह के समय दंपत्ति को सरकार की ओर से फ्लैट और एक बड़ी रकम नकद तोहफे के रूप में दी जाती है, सऊदी अरब में ज़रूरतमंदों को क़र्ज़ बिना बियाज़ के मिलता है वह भी भारी छूट के साथ|

आजकल सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की लंदन यात्रा के समय सऊदी नरेश का वेतन चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह एेसी हालत में है कि रियाज़ ने हाल ही में भ्रष्टाचार से संघर्ष का दावा करके बहुत से राजकुमारों, व्यापारियों और अधिकारियों को गिरफ़्तार किया और उनके माल को ज़ब्त कर लिया था। ब्रिटिश वेबसाइट मिडिल ईस्ट ने रहस्योद्धाटन किया है कि राजकोष से दिया जाने वाला सऊदी नरेश का वेतन, अमरीकी राष्ट्रपति और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सहित दुनिया के कई देशोंं के वरिष्ठ अधिकारियों से कई गुना अधिक है।

ब्रिटेन के प्रसिद्ध पत्रकार डेविड हेरेस्ट ने अपने एक लेख में सऊदी अरब के सरकारी महलों के निकट एक सूत्र के हवाले से सऊदी अरब के अधिकारियों के वेतन के बारे में लिखा कि सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ लगभग 80 करोड़ डाॅलर वेतन लेते हैं।

ब्रिटिश का यह पत्रकार सऊदी नरेश के वेतन की ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के वेतन से तुलना करते हुए लिखते हैं कि टेरीज़ा मे को वार्षिक एक लाख 54 हज़ार दो सौ पाउंड वेतन मिलता है जिसमें उनके आवास, रहने और घरेलू ख़र्च भी शामिल नहीं हैं।

हेरेस्ट इसी प्रकार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के वेतन के बारे में कहते हैं कि ट्रम्प को वार्षिक 4 लाख डाॅलर और कुछ सुविधाएं मिलती हैं किन्तु सऊदी नरेश हर महीने, अमरीकी राष्ट्रपति के वेतन से 2 लाख गुना वेतन लेते हैं।

ब्रिटिश पत्रकार हेरेस्ट की रिपोर्ट में जो बात ध्यान का केन्द्र बनी है वह भ्रष्टाचार से संघर्ष और भ्रष्टाचार से मुक़ाबले के बहाने दसियों राजकुमारों और अधिकारियों की गिरफ़्तारी के समय इतना बड़ा वेतन लेने का विषय है।

सऊदी क्राउन प्रिंस ने लगभग पांच महीना पहले देश में भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिए एक समिति गठित की जिसके दौरान 50 से अधिक बड़े बड़े राजकुमारों को पकड़ा गया। यह विषय राजकुमारों की गिरफ़्तारी तक सीमित नहीं रहा बल्कि गिरफ़्तार राजकुमारों की संपत्ति भी ज़ब्त कर ली गयी। जैसा कि जर्मन समाचार एजेन्सी ने बताया कि 106 अरब डाॅलर की नक़दी, मूल्यवान वस्तुओं और संपत्ति, गिरफ़्तार राजकुमारों से ज़ब्त कर दी। सऊदी अरब की सरकार यमन युद्ध के ख़र्चे तथा तेल की क़ीमत में भारी गिरावट के कारण बजट घाटे को पूरा करने के प्रयास में है।

पिछले दो दशकों के दौरान विश्व आर्थिक संकट के आरंभ होने के बाद से सऊदी अरब को अभूतपूर्व आर्थिक गिरावट का सामना है जबकि वस्तुओं और सेवाओं पर 400 प्रतिशत मंहगाई की घोषणा की गयी। यह एेसी हालत में है कि इन वर्षों के दौरान सऊदी कर्मियों और नागरिकों का वेतन अौसतन केवल 66 प्रतिशत बढ़ा है।

सऊदी नागरिकों की शिकायत यह है कि देश की जनता को बहुत अधिक आर्थिक समस्याओं का सामना है जबकि देश के नरेश दुनिया में सबसे अधिक वेतन ले रहे हैं और उन्हें अपने नागरिकों और जनता का तनिक भी ध्यान नहीं है। (