#सत्ता के लिये सिसोदिया वंश ने अपनों का ही खून बहाया था, राजा_दाहिर_ने_अपनी_सगी_बहन_से_शादी_कर ली_थी

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Sikander Kaymkhani
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★#सत्ता_के_लिए_हिन्दू_राजा_दाहिर_ने_बहन_से_शादी_करली_थी_खून_बहाना_तो_बड़ी_बात_नही”★

सत्ता के लिये सिर्फ औरंगज़ेब ने ही ‘अपनों’ का कत्ल नहीं किया, बल्कि सिसोदिया वंश में सत्ता के लिये अपनों का खून बहाया

इतिहास के एक दो उदाहरणों से से निष्कर्ष नहीं निकलते। उसके लिए इतिहास खंगालना पड़ता है। आपने औरंगजेब द्धारा अपने भाइयों को मारने के किस्से जरूर सुने है। अशोक द्धारा भाइयों के कत्ल के किस्से जरूर पढे होंगे। अब जरा सिसोदिया वंश का इतिहास भी जान लीजिए फिर विचार करिए कि सच क्या है?

या तो गुहिल वंश बहुत पुराना है। लेकिन उनका बड़ा इतिहास राणा कुंभा से शुरू होता है। राणा कुंभा के पिता का नाम राणा मोकल था। 1433 में सत्ता हथियाने के लिए राणा मोकल की हत्या उन्हीं के एक सरदार क्षे़त्र सिंह ने कर दी। लेकिन राणा मोकल के साले ने उसे सत्ता छीनने न दिया और मोकल के पुत्र राणा कुंभा को 1433 में गद्दी पर बैठा दिया। राणा कुभा के पु़त्र राणा उदय सिंह प्रथम (राणा ऊदा) ने 1468 में अपने पिता राणा कुंभा को पूजा करते समय मार डाला और राजा बन बैठा।

राणा ऊदा को भी उसके सगे भाई राणा रायमल ने 1509 में कत्ल कर दिया। इसके बाद 1509 में सत्ता के लिए एक और जंग हुई। राणा सांगा ने अपने भाइयों की हत्या करने की कोशिश की, मगर युवराज घोषित हो चुके भाई ने तलवार से उनका एक हाथ काट डाला और एक आंख फोड दी। मगर कुछ सामंतों के आ जाने से युवराज भाग निकला और राणा सांगा अपने पिता की मर्जी के खिलाफ मेवाड़ का राजा बन बैठा।

राणा सांगा की आदतों से परेशान उसके परिजन उससे मुक्ति की सोच ही रहे थे कि खानवा के युद्ध में बाबर से हार के बाद जैसे ही कमजोर हुआ उसके सामंतों और बागी परिजनों ने जहर देकर उसे मार डाला। सांगा की मौत के बाद सत्ता उसके विरोधी रतन सिंह और बाद में विक्रमा सिंह के हाथ में चली गई। उनके पुत्र उदय सिंह के कत्ल कोशिश हुई। मगर 1537 में सत्ता सांगा के बेटे राणा उदय सिंह के हाथ आ गई। उदय सिंह ने मरने से पहले अपने एक बेटे राणा जगमाल को उत्तराधिकारी घोषित किया। उदय सिंह की मौत पर राणा जगमाल को सिंहासन पर बिठाया गया मगर राणा प्रताप ने अपने कुछ साथियों की मदद से राणा जगमाल को बंदी बना कर सत्ता को छीन लिए। बाकी का इतिहास तो सभी जानते हैं।

अब सवाल है कि जिस सिसोदिया वंश में सत्ता के लिए बाप और भाईयों को मारने की प्रथा रही हो, उसमें और औंरंगजेब द्धारा भाइयों को मार कर सत्ता छीनने में क्या अंतर है। लेकिन आप इसे इतिहास की प्रारभिक किताबों में नहीं पायेंगे। संघी इतिहास में तो कहीं भी नहीं। बस केवल यही पायेंगे कि बाप भाई को कत्ल कर सत्ता छीनना मुगलों की परम्परा रही है। ऐसा क्यों हुआ या हो रहा है, इसे समझने की कोशिश कीजिए। यह उस दौर के राजवंशों की सामान्य नीति थी। फिर भी इनके अच्छे बुरे का आंकलन तत्कालीन राजशाही का आम रिवाज न मान कर धर्म के आधार पर किया जा रहा है।