#सनातन संस्था के ‘आतंकवादियों’ का इक़बालिया बयान : देखें वीडियो

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महाराष्ट्र के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने हाल ही में हिंदुत्ववादी संगठनों के तीन कार्यकर्ताओं- वैभव राउत, शरद कालस्कर और सुधन्वा जोगलेकर को गिरफ़्तार किया है.

एटीएस का दावा है कि गिरफ़्तार किए गए तीनों लोग मुंबई, पुणे, सतारा और महाराष्ट्र के दूसरे इलाक़ों में सीरियल ब्लास्ट की साज़िश रच रहे थे.

कहा जा रहा है कि वैभव राउत का ताल्लुक़ सनातन संस्था से रहा है. अब इन तीनों की गिरफ़्तारी से सनातन और हिंदू जनजागृति समिति एक बार फिर से विवादों के केंद्र में है.

सवाल ये है कि क्या ये दोनों संगठन एक ही हैं या अलग-अलग हैं? आख़िर ये संगठन करते क्या हैं? ये क्या शिक्षा देते हैं? वे लोग कौन हैं, जो इन संगठनों को चला रहे हैं? क्या उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई हुई है?

हम इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि, “जांच टीमों ने वैभव राउत के घर से बम और बम बनाने का सामान बरामद किया है. इससे साबित होता है कि सनातन संस्था आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है.”

वहीं कांग्रेस पार्टी ने सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने की मांग की है. महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि राज्य सरकार ने सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने का नया और दुरुस्त किया हुआ प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा है.

इन आरोपों और विवादों के बीच सनातन संस्था के एक प्रवक्ता चेतन राजहंस ने कहा, “हिंदूवादी कार्यकर्ता वैभव राउत सनातन संस्था का साधक नहीं है (सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं को साधक कहा जाता है). लेकिन वो हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है. हम मानते हैं कि हिंदुत्व और धर्म के लिए काम करने वाला कोई भी शख़्स सनातन संस्था का कार्यकर्ता है.”

राजहंस का कहना है कि सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने की मांग एक साज़िश है. लेकिन, ये पहली बार नहीं है कि सनातन संस्था का नाम बम धमाके के किसी केस से जोड़ा गया हो. और सनातन संस्था पर पाबंदी लगाने की मांग भी पहली बार नहीं हो रही है.

सनातन संस्था और बम धमाकों के मामले
इससे पहले सनातन संस्था से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं के नाम, गडकरी रंगायतन बम ब्लास्ट केस, मडगांव बम धमाके, गोविंद पंसारे, नरेंद्र दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्या के मामलों में भी आए हैं.

1. गडकरी रंगायतन बम धमाका
4 जून, 2008 को ठाणे के गडकरी रंगायतन थिएटर की पार्किंग में एक बम धमाका हुआ था. इस धमाके में सात लोग घायल हो गए थे. इस धमाके में विक्रम भावे और रमेश गडकरी मुजरिम करार दिए गए थे.

दोनों का ताल्लुक़ सनातन संस्था से था. जिस दिन धमाका हुआ था, उस दिन रंगायतन में मराठी नाटक ‘अम्ही पचपुते’ नाम के नाटक का मंचन होना था. सनातन संस्था का कहना था कि ये नाटक हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ है.

जांच एजेंसियों का कहना था कि इस नाटक के प्रति विरोध दर्ज कराने के लिए ही ये बम धमाका किया गया था. हालांकि, सनातन संस्था का दावा था कि उसके कार्यकर्ताओं को इस धमाके में फंसाया गया था.


2. मडगांव ब्लास्ट
16 अक्टूबर 2009 को सनातन संस्था के एक कार्यकर्ता मलगोंडा पाटिल की गोवा के मडगांव में बम बनाते हुए मौत हो गई थी. गोवा के गृह विभाग ने ये जानकारी सार्वजनिक की थी. मलगोंडा पाटिल, गडकरी रंगायतन में हुए धमाके और उसके बाद सांगली में हुए दंगों के मामले में महाराष्ट्र एटीएस की तफ़्तीश के दायरे में था.

सनातन संस्था ने माना था कि मलगोंडा पाटिल उनका कार्यकर्ता था. सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस कहते हैं, “इस मामले में भी सनातन संस्था को ज़बरदस्ती फंसाया गया. जबकि हम ने तो इस दुर्घटना में अपने साधक-मलगोंडा पाटिल को गंवा दिया. इस मामले के बाक़ी सभी आरोपी सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए थे. ये सभी लोग अब जेल से बाहर हैं. लेकिन झूठे केस की वजह से उनकी ज़िंदगी के अहम साल बर्बाद हो गए.”

3. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या का केस
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और तर्कशास्त्री लेखक डॉक्टर नरेंद्र डाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को पुणे में कर दी गई थी. इस मामले में एक संदिग्ध वीरेंद्र तावड़े, हिंदू जनजागृति समिति का सदस्य था. वीरेंद्र तावड़े का ताल्लुक़ सनातन संस्था से भी था.

तावड़े को 2016 में गिरफ़्तार कर लिया गया था. सीबीआई का कहना है कि सनातन संस्था का एक और कार्यकर्ता सारंग अकोलकर भी इस मामले में संदिग्ध है. वो अब तक फ़रार है. हाल ही में गिरफ़्तार वैभव राउत, हिंदू गोवंश रक्षा समिति का सदस्य है. वो सनातन संस्था की गतिविधियों में भी शामिल रहा है.

4. गोविंद पंसारे मर्डर केस
कोल्हापुर के वामपंथी नेता गोविंद पंसारे और उनकी पत्नी उमा को 15 फ़रवरी 2015 को उस वक़्त गोली मार दी गई थी, जब वो सुबह की सैर के बाद घर लौट रहे थे. गोली लगने के पांच दिनों बाद पंसारे की कोल्हापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी.

पुलिस ने इस मामले में समीर गायकवाड़ को 15 सितंबर 2015 को सांगली से गिरफ़्तार किया था. समीर गायकवाड़, सनातन संस्था से जुड़ा हुआ था.


क्या सनातन और हिंदू जनजागृति समिति दो अलग-अलग संगठन हैं?
दोनों ही संगठनों के प्रवक्ता कहते हैं कि सनातन संस्था और हिंदू जनजागृति समिति दो अलग-अलग संगठन हैं. सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस कहते हैं, “सनातन संस्था की स्थापना अनुयायियों को ईश्वर के पथ पर ध्यान लगाने और आध्यात्म की शिक्षा देने के लिए की गई. वहीं हिंदू जनजागृति समिति का संबंध कई हिंदू संगठनों से है. सनातन संस्था भी उनमें से एक है.”

लेकिन जानकारों का कहना है कि असल में ये दो संगठन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. साकाल मीडिया समूह के जल्द ही शुरू रहे अख़बार ‘सिंपल टाइम्स’ की संपादक अलका धुपकर कहती हैं, “हालांकि इनके दो नाम हैं, मगर ये दोनों नाम एक ही संस्था के हैं.” अल्का धुपकर ने सनातन संस्था पर कई स्पेशल स्टोरी की हैं.

वो कहती हैं, “जब ज़्यादातर लोगों ने सनातन संस्था का नाम भी नहीं सुना था, तब इस संगठन के कार्यकर्ता तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों में जाकर वहां के छात्रों को बरगलाते थे और उन्हें अपने संगठन में शामिल करने के लिए प्रेरित करते थे. इन छात्रों के अभिभावकों ने पुलिस से भी शिकायत की थी. लेकिन, उनकी शिकायतें अनसुनी कर दी गईं.”

लेकिन, सनातन संस्था से जुड़े हिंदू वक़ील एसोसिएशन के प्रमुख संजीव पुनालेकर इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं कि उन्होंने युवाओं को बरगलाया. संजीव कहते हैं, “युवाओं के लिए आयोजित सनातन संस्था के सभी कार्यक्रमों में कोई भी हिस्सा ले सकता है. हम कोई भी आयोजन छिपकर ख़ुफ़िया तरीक़े से नहीं करते. हर तबक़े के युवा इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं. जो अभिभावक इसके ख़िलाफ़ हैं, वही ऐसे अनर्गल आरोप लगाते हैं.”


‘2023 तक हिंदू राष्ट्र की स्थापना’
सनातन संस्था की वेबसाइट पर इसका लक्ष्य लिखा है- समाज की मदद से राष्ट्र की सुरक्षा और लोगों में धार्मिक विचारों को बढ़ावा देना. हिंदू धर्म पर आधारित राष्ट्र की स्थापना करना, जो हर मामले में आदर्श होगा.

परातपरा गुरु डॉक्टर अठावले यांचे विचारधन: द्वितीय खंड’ नाम की किताब में लिखा है, “1998 में डॉक्टर अठावले ने पहली बार 2023 तक भारत में राम राज्य या हिंदू राष्ट्र की स्थापना का विचार रखा था. सावरकर, संस्थापक सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, गोलवलकर गुरूजी जैसी महान हस्तियों ने भी ज़ोर-शोर से हिंदू राष्ट्र की स्थापना की बात उठाई थी. लेकिन अफ़सोस है कि आज़ादी के बाद हिंदू भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बन गया और हिंदू राष्ट्र की शानदार विचारधारा ओझल हो गई.”

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के सदस्य संजय सावकर कहते हैं, “शुरुआत में सनातन संस्था के पास ज़्यादा काम की गुंजाइश नहीं थी. वो केवल आध्यात्म का प्रचार-प्रसार करते थे. 1999 तक वो ईसाई धर्म या इस्लाम की निंदा नहीं करते थे. शायद उन्होंने ये नीति इसलिए अपनाई ताकि शुरुआत में ही विरोध से बच सकें. लेकिन बाद में वो आक्रामक तरीक़े से हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करने लगे.”

सनातन संस्था के तमाम प्रकाशित लेखों पर गौर करें, तो साफ़ लगता है कि उन्हें लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है. सनातन संस्था के एक लेख में लिखा है, “जनप्रतिनिधि या राजनेता नहीं, बल्कि केवल संत ही हिंदू राष्ट्र की स्थापना करने में सक्षम हैं. हिंदू राष्ट्र में कोई चुनाव नहीं होगा.” इसी लेख में आगे अपने समर्थकों से कहा गया है, “शैतानी ताक़तों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने होंगे.”

लेकिन, सनातन संस्था साफ़ तौर पर कहीं ये बात नहीं कहती कि हिंदू राष्ट्र की स्थापना कैसे होगी और क्या उसमें हिंसा के लिए भी जगह होगी.

सिंपल टाइम्स की अल्का धुपकर कहती हैं, “सनातन संस्था की विचारधारा कट्टर दक्षिणपंथी है. वो हिंसा की वक़ालत करते हैं. उनका मक़सद हिंदू राष्ट्र की स्थापना है. इस लक्ष्य के रास्ते में आने वाले का सफ़ाया करना मंज़िल तक पहुंचने की उनकी नीति का हिस्सा है.”

अल्का धुपकर गोवा में स्थित रामनाथी आश्रम भी 2015 में जा चुकी हैं. वो लगातार सनातन संस्था की गतिविधियों की रिपोर्टिंग करती रही हैं.

वहीं, सनातन संस्था का कहना है, “हमारा मूल लक्ष्य है समाज और धर्म को जागृत करना. हम ये काम क़ानूनी और शांतिपूर्ण तरीक़े से कर रहे हैं. गौरी लंकेश, नरेंद्र डाभोलकर और गोविंद पंसारे के हत्यारे अब तक नहीं खोजे जा सके हैं. इसलिए सनातन संस्था को निशाना बनाया जा रहा है. ख़ुद को तरक़्क़ीपसंद कहने वाले लोग लगातार हिंदुत्व के ख़िलाफ़ लिखते रहते हैं. सनातन संस्था ने हमेशा क़ानूनी तरीक़े से उनका विरोध किया है.”

डॉक्टर जयंत बालाजी अठावले कौन हैं?
डॉक्टर जयंत बालाजी अठावले, सनातन संस्था के संस्थापक हैं. वो एक मनोवैज्ञानिक हैं. सनातन संस्था की वेबसाइट के मुताबिक़, भारत आने से पहले डॉक्टर बालाजी ब्रिटेन में सात साल तक मेडिकल प्रैक्टिस कर चुके हैं. इंदौर के भक्त महाराज उनके गुरू थे.

वेबसाइट के मुताबिक़ डॉक्टर अठावले ने 1 अगस्त, 1991 को ‘सनातन भारतीय संस्कृति की स्थापना की थी’. 23 मार्च 1999 को उन्होंने सनातन संस्था की स्थापना की. हाल ही में उनकी 75वीं सालगिरह धूमधाम से गोवा के रामनाथी आश्रम में मनायी गई थी.

इस मौक़े पर डॉक्टर जयंत बालाजी अठावले भगवान श्रीकृष्ण का भेष धरा था. कार्यक्रम के दौरान वो एक सिंहासन पर बैठे रहे थे. उसके बाद से डॉक्टर अठावले के सार्वजनिक कार्यक्रम बहुत कम हो गए हैं.

सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस कहते हैं, “उम्र ज़्यादा होने के कारण डॉक्टर अठावले में ऊर्जा की कमी आ गई है. इसीलिए वो सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं दिख रहे हैं. वो 2009 के बाद से आश्रम के बाहर नहीं गए हैं. वो पिछले आठ-दस साल से गोवा के रामनाथी आश्रम में ही रह रहे हैं.”

सनातन संस्था की वेबसाइट पर सदस्यों के हवाले से कई वाहियात दावे किए गए हैं. कुछ अनुयायियों का दावा है कि उन्होंने डॉक्टर अठावले के इर्द-गिर्द एक आभामंडल देखा है. जब वो आस-पास होते हैं तो अलग तरह की ख़ुशबू आती है. उनका चेहरा भगवान श्रीकृष्ण जैसा दिखता है.

अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष श्याम मानव दावा करते हैं कि डॉक्टर अठावले ने सम्मोहन के ज़रिए युवाओं को इकट्ठा किया है. वो कहते हैं कि, “डॉक्टर अठावले बहुत चतुर डॉक्टर हैं. वो एरिक्सोनियन सम्मोहन के ज़रिए अनुयायियों के दिमाग़ को नियंत्रित करते हैं.”


‘इंसान को बिना कपड़े उतारे नहाना चाहिए’
सनातन संस्था अपने सदस्यों को बहुत सी शिक्षाएं देती है. संस्था लोगों को दांत साफ़ करने के तरीक़े से लेकर रात में सोने तक का तरीक़ा बताती है.

इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज कुछ मशविरे ऐसे हैंः

बिना नग्न हुए स्नान करें, वरना शैतानी ताक़तें आपका नुक़सान कर सकती हैं.
खड़े होकर मूत्र न त्यागें.
टॉयलेट होकर आने के बाद मिट्टी से हाथ धोएं. टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल न करें.
सनातन संस्था ऐसी सलाहों के पीछे के तर्क भी देती है. जैसे किः

रात में आईना देखने से बचना चाहिए वरना माहौल में मौजूद शैतानी आत्माएं आईने में दिखने वाले चेहरे पर हमला बोल सकती हैं.
दांत साफ़ करने के लिए प्राणहीन ब्रश की जगह उंगली का प्रयोग करें, क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक, दोनों परतों की सफ़ाई करती है.
श्राद्ध के दौरान दांतों को ब्रश नहीं करना चाहिए क्योंकि उस वक़्त पितरों की आत्माएं धरती की कक्षा में आ जाती हैं और पित्र पक्ष में अपने घर के आस-पास मंडराती रहती हैं. इस दौरान खाना-खाने के बाद पानी से भी मुंह नहीं साफ़ करना चाहिए. क्योंकि इससे चमत्कारिक किरणों का प्रभाव कम हो जाता है.
हालांकि जानकार सनातन संस्था के मशविरों को सिरे से ख़ारिज करते हैं. दांतों के डॉक्टर कहते हैं कि श्राद्ध के दिनों में ब्रश न करने की सलाह अंधविश्वास है. दांतों के डॉक्टर रविंद्र जोशी कहते हैं, “उंगलियों से दांत साफ़ करने पर मसूड़ों की मालिश तो हो जाती है, पर इससे दांत ठीक से साफ़ नहीं होते. दांतों के बीच में फंसी गंदगी निकालने के लिए ब्रश करना ज़रूरी है. दांतों को रोज़ाना ब्रश करना रोज़ नहाने जितना ही ज़रूरी है. मर चुके लोगों की फ़िक्र करने के बजाय ज़िंदा लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए.”


आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का विरोध करते हुए सनातन संस्था इसके लिए तर्क भी देती है. संस्था का कहना है किः

हेयर ड्रायर से बालों को न सुखाएं क्योंकि ड्रायर की आवाज़ से शैतानी ताक़तें खिंची चली आती हैं. इन शैतानी तरंगों का बुरा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है. इससे शरीर में विध्वंसक जज़्बात पैदा हो जाते हैं.
वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे वातावरण में नुक़सानदेह विकिरण पैदा होता है.
वेबसाइट की ही तरह सनातन संस्था का अख़बार ‘सनातन प्रभात’ भी ऐसी बातें प्रकाशित करता है. अख़बार पर लगातार अवैज्ञानिक और अतार्किक बातें छापने के आरोप लगते रहे हैं. अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने ऐसे तमाम दावों को सबूतों के साथ ग़लत ठहराया है.

सनातन संस्था के मुताबिक़ महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग नियम हैं. उनके कई तर्कों को मानना असंभव है. वो कई ऐसी बातें कहते हैं जो पुरुषों के लिए तो नुक़सानदेह हैं, पर महिलाओं के भले की हैं.

पुरुषों को लंबे बाल नहीं रखने चाहिए क्योंकि इससे उनके अंदर भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ेगा.
महिलाओं को लंबे बाल ही रखने चाहिए क्योंकि, लंबे बालों में हलचल से उनके शरीर के अंदर उपजने वाली भावनाओं से सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी. और इससे वातावरण में ताक़तवर तरंगें पैदा होंगी. ये ताक़तवर तरंगे जज़्बातों और नुक़सानदेह तत्वों को नष्ट कर देंगी. महिलाओं को लंबे बाल रखने चाहिए क्योंकि ये शक्ति का प्रतीक है. लंबे बाल शरीर की भावनात्मक ऊर्जा के सहायक होते हैं.

मुसलमानों और ईसाइयों के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार

सनातन संस्था अक्सर हिंदुओं को ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील करती है. डॉक्टर अठावले ने धर्मांतर एवं धर्मांतरितांचे शुद्धिकरण नाम की किताब में लिखा है, “मुसलमान लव जिहाद से इस देश को भारी नुक़सान पहुंचा रहे हैं और ईसाई धर्मांतरण से हिंदू धर्म को खोखला कर रहे हैं. चूंकि हिंदू समुदाय को कोई धार्मिक शिक्षा नहीं मिलती, न ही हिंदुओं में अपने धर्म के प्रति गौरव का भाव, इसलिए वो ऐसे छल-प्रपंच में आसानी से फंस जाते हैं.”

हिंदू जनजागृति समिति की वेबसाइट पर अक्सर अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बातें छपती रहती हैं. पत्रकार धीरेंद्र झा ने अपनी किताब, ‘शैडो आर्मीज़’ में एक अध्याय सनातन संस्था पर लिखा है. धीरेंद्र झा अपनी किताब में लिखते हैं, “सनातन संस्था के आत्मरक्षा के नियम सदस्यों को बंदूक चलाने का तरीक़ा सिखाते हैं. इसमें ये भी लिखा है कि गोली चलाते वक़्त निगाह दुर्जनों पर होनी चाहिए.”

सनातन संस्था के साहित्य और चित्रों पर नज़र डालें तो ये साफ़ हो जाता है कि दुर्जन कौन है. संस्था की नज़र में तर्कशास्त्री, मुसलमान, ईसाई और हर वो इंसान जो हिंदू विरोधी है, वो दुर्जन है.

डॉक्टर अठावले की पत्रिका ‘क्षत्रधर्म साधना’ में लिखा है, ‘पांच फ़ीसद अनुयायियों को हथियारों की ट्रेनिंग देने की आवश्यकता होगी. भगवान सही समय पर हथियार उपलब्ध कराएंगे.’

इस पत्रिका में ये भी लिखा है कि इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि किसी को गोली चलानी आती है या नहीं. जब वो भगवान का नाम लेकर गोली चलाता है, तो ईश्वर की शक्ति से गोली निश्चित रूप से सही निशाने पर लगेगी.

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तुषार कुलकर्णी
संवाददाता, बीबीसी मराठी

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