‘सम्पर्क फ़ॉर समर्थन’ अमित शाह को मुन्ना बजरंगी के हत्यारे से भी मिलना चाहिए, संघ और बीजेपी के स्वतंत्रता सेनानी यही दंगाई और आतंकवादी हैं!

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परवेज़ ख़ान
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जहाँ इंसान है वहां अपराध, जुर्म का होना स्वाभाविक है, फ़ितरी/आदतन इंसान लालची, बुज़दिल और घमंडी होता है, इंसान का लालच उसे ग़लत पेशा, व्यवहार करने को उकसाता है, हर समाज और दौर में अपराध होते रहे हैं और क़यामत तक जारी रहेंगे, इनमे कभी कभा कमी तो कभी तेज़ी आती रहती है, जिसके कई कारण हैं|

सोमालिया, ज़िम्बावे, मैक्सिको, सूडान कई ऐसे देश हैं जहाँ अपराध बहुत अधिक होते हैं, वहां जेलों से जुर्म के नेटवर्क चलते हैं, जेलों के अंदर गैंगवार होती हैं, जेल ब्रेक होती हैं, यह सभी काम भारत में भी होते हैं/होते रहे हैं, कई बार बिहार की जेलों को बंधक बना कर बंदियों को छुड़ाया गया है, जेल के अंदर से माफिया अपना सारा धंधा चलाते हैं, जेल से हत्याऐं, लूट, अपहरण आदि जुर्मों को अंजाम दिया जाता है|

पहले थोड़ा सा जेल को समझें,,,अक्सर लोग ज़रा बात होती है तो कहते हैं कि ज़यादा से ज़यादा क्या होगा जेल ही तो जाना पड़ेगा,,,जी हाँ,,,जेल का जाना कोई आसान काम नहीं, जेल जाने के लिए जुर्म करना पड़ता है,,,और जब आदमी जेल में पहुँचता है तो वहां का ‘सिस्टम ‘ देख कर उसकी रूह कांपने लगती है, जेल के अंदर दुनियां का कोई कानून, अधिकार, मानवाधिकार नहीं चलते हैं, कुछ वाकया दीवारों पर लिखे होते हैं जिनकी कोई अहमियत जेल में नहीं होती है,,,जेल के अंदर चरस, भांग, स्मैक, हत्थु, ज़रूरत पर कोई से भी ब्रांड की शराब, ativan, अल्प्रेक्स, कम्पोज़, netrabat, trika, dizepam, कोरेक्स, फेंसिड्रिल सिरप, कम्पोज़ के इंजेक्शन, फोर्टविन के इंजेक्शन सभी कुछ उचित मूलय पर मिल जाता है, मगर से सामान हर किसी को नहीं मिलता है, यह जेल के दबंग, अमीर बंदियों/क़ैदियों या जो जेल में अपने बन्दों के ज़रिये तस्करी करते हैं उनके पास मिलता है, जेल में बड़ी संख्या में ”जूताखोर’ भी होते हैं, ये जुताखोर अपना जुगाड़ इधर उधर से कर के एक दो बीड़ी या सिगरेट के माल का बंदोबस्त कर लेते हैं|

जेल के अंदर मोबाइल का होना बहुत ही साधारण सी बात है, बंदी अपनी ज़रूरत के हिसाब से मोबाइल अंदर ‘गोदरेज’ में रख कर ले जाते हैं, यह गोदरेज जेल के अंदर ही तस्कर लोग बहार तारीख पर से अपना माल अंदर लाने के लिए बनाते हैं, एक बड़े साइज़ की गोदरेज में एक किलो चरस आ जाती है, हर गोदरेज की छमता अलग अलग होती है, जेल के अंदर ब्लेड, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, तेल, चीनी, साबुन, मंजन, पापे, बिस्किट, खीर, समोसा, पराठे, चाय आदि सामन जेल के अधिकारी बंदियों व बंदी रक्षकों दुवारा बिकवाते हैं, हर एक हफ्ते के बाद इसका ठेका होता है, इस से बंदीरक्षकों और जेल अधिकारीयों की दो नंबर में मोटी कमाई हो जाती है, जेल के अंदर हर सामन बहार के रेटों से तक़रीबन पांच गुना महंगा बिकता है

जेल के अंदर ”कट्टन” बड़े काम की चीज़ होती है, किसी से; लड़ाई, झगड़ा होने पर बंदी ”कट्टन’ का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही ऑपरेशन में काम आने वाला ब्लेड जिसे जेल की भाषा में चाबी कहते हैं, चेहरे पर वार करने, और चिराफाडी के बहुत काम आता है, ”कट्टन’ स्टील की चमच्च को डंडी की तरफ से घिस घिस कर बनाया जाता है|

मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर गोली मार कर हत्या कर दी गयी है, बहुत से लोग सोच रहे होंगे कि जेल के अंदर ‘हथियार’ कहाँ से पहुँच गया तो समझ लीजिये कि जेल के अंदर पिस्टल/रिवाल्वर/तमंचा पहुंचना बहुत ही मामूली सा काम है, कई बार तो जेल में बंद बंदी का जेल के ही माफिया अपहरण कर लेते हैं और जेल के अधिकारीयों के मार्फ़त पकड़ का पैसा भी जेल में आ जाता है, इसमें जेल के अधिकारी अपना हिस्सा लेते हैं, ये काम छोटे शहरों की शांत जेलों में ज़यादा और आसानी से होता है|

जेल के अंदर लड़कियां भी रात का मनोरंजन करने के लिए उपलब्ध हो जाती हैं, चमत्कार को नमश्कार है,,,मितरों,,,उम्मीद है अब समझ में आगया होगा कि ”जेल में हथियार’ पहुँचते हैं, जिनको जान का खतरा होता है वह अपने पास अपनी बैरिक में धड़ल्ले से रखते हैं|

जयंत सिन्हा और गिर्राज सिंह ने अभी हाल ही में दंगाइयों से मुलाक़ात की, उनको फूलमाला पहनाई हैं, औरतों की तरह गिर्राज ने आंसू भी बहाये हैं, चुनाव करीब है सब कुछ होगा, तो फिर ‘सम्पर्क फॉर समर्थ’ कार्यक्रम के तहत अमित शाह को मुन्ना बजरंगी के हत्यारे से भी मिल लेना चाहिए, राष्ट्रवादियों की टीम में एक आतंकी की बढ़ोतरी और हो जायेगी, आरएसएस, बीजेपी के पास एक भी, कहने को भी ऐसा नेता नहीं है जो स्वतंत्रता संग्राम में भारत के लिए लड़ा हो, संघ और बीजेपी के स्वतंत्रता सेनानी यही दंगाई और आतंकवादी हैं|

मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रदेश में गैंगवार बढ़ने के चांस हैं, वैसे निजी तौर पर मेरा मानना है कि मुन्ना बजरंगी ”कांटे से काँटा’ निकालने की सरकारी मुहीम का नतीजा है, प्रदेश में एनकाउंटर पर देश की सर्वोच्या अदालत ने भी प्रदेश सरकार से जवाब मांग लिया है, उधर विपक्ष अनेक मुढ़भेड़ों को फ़र्ज़ी बता कर हमलावर है, सूत्रों के अनुसार अब से तीन महीने पहले योजना बनी थी जिसके मुताबिक कुछ चुनिंदा अपराधियों को पेशेवर अपराधियों की मदद से ठिकाने लगाने का कार्यक्रम था|

राजनीती दुनियां का सबसे खतरनाक पेशा है, यह ”पेशा” अपराध से भी कठिन हैं, एक अपराधी नरम दिल, सहायक हो सकता है मगर ”पेशेवर नेता’ दुर्दांत स्वभाव के हो जाते हैं, उनके लिए अगर उनका अपना भाई भी मरता है तो मरे बस उसकी अपनी कुर्सी और पावर बनी रहे, पूर्वांचल की हवा में बहुत वक़्त तक मुन्ना बजरंगी के मारे जाने की कहनी तैरती रहेगी, पूर्वांचल के इलाके में आज भी मऊ के ‘अंसारी ब्रादर’ का सिक्का चलता है, 2005 से वैसे तो मुख़्तार अंसारी जेल में हैं लेकिन उनके संपर्क और सम्बन्ध ”दूर” तक हैं, कृष्णा नन्द राय हत्या मामले में मुख्तार अंसारी काफी समय से ज़मानत की कोशिश कर रहे हैं मगर बात बन नहीं पा रही है, मुन्ना बजरंगी की हत्या असल में पूर्वांचल की गैंगवार का नतीजा है, हत्या का स्थान ही बस हापुड़ है बाकी कहानी पूर्वान्च से शुरू होती है, मुख़्तार अंसारी बहुत समय से अपने विरोधियों की आँखों में खटक रहे हैं, मुन्ना बजरंगी के मारे जाने का सीधा नुक्सान मुख़्तार अंसारी की ताक़त पर पड़ेगा, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा पूर्वांचल से आते हैं, उनका उधर कई ज़िलों में प्रभाव हैं, लड़ाई पॉवर और पैसे की है, रेलवे के सामन की नीलामी हो या नहरों की सफाई, सड़कों का बनना हो या ओवर ब्रिज, फ्लाई ओवर,,,हर काम में पैसा है,,,पैसा पॉवर का खेल ‘गैंगवार’ की शक्ल में सामने आता है,,,मुख़्तार अंसारी ग्रुप के अभी सबसे बलशाली हैं ठाकुर अभय सिंह, विधायक अभय सिंह फैज़ाबाद से समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2012 में प्रदेश में सबसे अधिक मतों से जीते थे, अभय सिंह के ही झगडे में कृष्णा नन्द राय की हत्या हुई थी, उस केस में अभय सिंह भी आरोपी हैं,,,,बजरंगी तो मारा गया,,,पर सवाल बहुत से उठ रहे हैं, एक सवाल जिसमे से यह भी है कि भारत का मैन स्ट्रीम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस खबर को पूरी तरह से पी गया है, कहीं डिबेट नहीं हुई, कहीं भी उत्तर प्रदेश की कानून वयवस्था पर चर्चा नहीं हुई, कहीं भी योगी की असफलता की बात नहीं हुई,,,,क्यों,,,इशारों को समझो,,,बाक़ी जो है ”राज़’ उसे राज़ ही रहने दो,,,,

लिस्ट में 300 के करीब ऐसे लोगों के नाम शामिल बताये जाते हैं जिनका कांटा ”कांटे’ से निकाला जायेगा, अपराधी से कोई भी अपराध नियंत्रण की उम्मीद न रखे, बीजेपी के 324 चुने हुए विधायकों में से संघ परिवार ने किसी को भी मुख्यमंत्री नहीं बनाया, बल्कि योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की कुर्सी पर बैठा दिया, अब ऐसा क्यों हुआ यह समझने की बात है, 324 चुने हुए विधायक, इनमे एक भी मुख्यमंत्री के काबिल नहीं था क्या, संघ परिवार का एजेंडा देश, जनता, तंत्र, लोकतन्त्र, संविधान, संसद सब से महत्वपूर्ण है, उस एजेंडे की प्राप्ति के लिए रास्ते में जो भी आयेगा ”मिटा’ दिया जायेगा,,,,क्या समझे,,,कुछ समझ ……. ”मुन्ना”

परवेज़ ख़ान
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#जंगल_राज_और_राम_राज
जेल के भीतर प्रेम प्रकाश सिंह ऊर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या यूपी में जंगलराज के चरम की निशानी है। मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 29 जून को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करके यूपी एसटीएफ तथा पुलिस पर हत्या करवाने की आशंका जता चुकी थीं। बीजेपी वाले ठाकुर मुख्यमंत्री के राज में सबसे बड़े ठाकुर माफिया की जेल में हत्या ने यूपी के अपराध जगत को हिला कर रख दिया है।

बजरंगी, मुख्तार अंसारी के बेहद ख़ास माने जाते थे। पूर्वांचल में ठाकुरों के बीच बेहद लोकप्रिय मुन्ना बजरंगी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप था। बाहर इनकाउंटर हो रहे हैं और जेल के भीतर हत्या। कानून फिर रह ही कहां गया?

अरशद मिर्ज़ा अलीगढ़ वाला