#सीरिया के हालात विशेषकर इदलिब के बारे में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान का नज़रिया!

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सीरिया के हालात विशेषकर इदलिब के बारे में तेहरान में आयोजित होने वाले त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का लाइव प्रसारण, दुनिया के लिए हैरान करने वाला था।

सीआईए के जासूस भी इस शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चा पर बात करने के लिए सिर जोड़कर बैठ गये किन्तु उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने तेहरान बैठक का लाइव टेलीकास्ट देखा ।

इस बैठक में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान का नज़रिया ध्यान योग्य था। उन्होंने सीरिया के इदलिब प्रांत में संघर्ष विराम पर बहुत अधिक बल दिया था जबकि रूस के राष्ट्रपति विलादीमीर पुतीन ने इदलिब प्रांत में नुस्रा फ़्रंट सहित अन्य आतंकवादी गुटों की उपस्थिति की ओर संकेत किया किन्तु अर्दोग़ान अपनी बात पर अड़े रहे। इसके बावजूद तेहरान बैठक के घोषणापत्र में तुर्की के राष्ट्रपति के संघर्ष विराम की बात को शामिल नहीं किया गया।


अब सवाल यह पैदा होता है कि तुर्की के राष्ट्रपति इदलिब में संघर्ष विराम पर इतना अधिक बल क्यों दे रहे हैं और यह संघर्ष विराम किस किस के बीच होना चाहिए? एक ओर तो आतंकवादी गुट हैं और दूसरी ओर सीरिया की सरकार है जो देश को सशस्त्र आतंकियों के नियंत्रण से पाक कराना चाहती है। तुर्की किस पक्ष में है? क्या तुर्की स्वयं आतंकवाद की सबसे अधिक बलि चढ़ने वाला रहा है? और उसे इस प्रकार इदलिब में आतंकवादियों के हितों का समर्थन करना चाहिए?

यहां पर इस बात पर चर्चा ज़रूरी है कि इदलिब में संघर्ष विराम किसके हित में है? इदलिब से निकलने वाला ख़बरों को देखने के बाद पता चलता है कि आतंकवादियों में काफ़ी भय व्याप्त है, यहां तक कि जो विदेशी आतंकी हैं उनमें तो और भी बौखलाहट है, यह आतंकी दुनिया के विभिन्न देशों से सीरिया लाए गये, इनमें से कुछ अपनी जान बचाना चाहते हैं जबकि कुछ ने हथियार उठा लिए हैं और युद्ध का रास्ता अपना लिया है।


अमरीका समर्थित आतंकवादी गुट स्वयं को अधिक से अधिक लैस करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा समय मांग रहे हैं। इन गुटों से सीरिया के शहरों में अपनी गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। इन हालात को देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि इदलिब में संघर्ष विराम, आतंकवादियों के अलावा किसी और के हित में नहीं हो सकता। अब यह सवाल पैदा होता है कि क्या तुर्की को यह पता है कि इदलिब में संघर्ष विराम किस की सेवा के लिए होगा?


कुछ टीकाकारों ने इदलिब के बारे में अर्दोग़ान की नीति को केवल राजनैतिक दांव बताया है किन्तु यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि तेहरान बैठक के बाद और सीरिया सरकार के इदलिब में जारी आप्रेशन के कारण तुर्की ने भी सीरिया में अपने सैनिकों की संख्या बढ़का कर तीस हज़ार कर दी है। अर्दोग़ान के प्रवक्ता का कहना है कि तुर्क सैनिकों की उपस्थिति केवल इदलिब पर हमला न करने की गैरेंटी है और सीरिया की ज़मीनी सेना और रूस की वायु सेना, इदलिब में तुर्क सैनिकों की उपस्थिति की वजह से कोई कार्यवाही नहीं कर सकते।

यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि तुर्की को ईरान और रूस सहित अपने घटक और मित्र देशों का विश्वास हासिल करने की कार्यवाही करनी होगी और तुर्की की इस प्रकार की कार्यवाही जिससे विश्वास बहाली को धचका लगे, बचना चाहिए। बहरहाल सीरिया की सेना ने देश के समस्त क्षेत्रों को आतंकवादी गुटों के नियंत्रण से पाक कराने का फ़ैसला कर लिया है और अब समय ही बताएगा कि इदलिब में आतंकवादी कितने दिन और चैन की सांस ले सकते हैं?