सीरिया पर तीन देशों के हमले का उल्टा नतीजा निकला है : देखें वीडियो

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हमारा क्यों यह मानना है कि सीरिया पर तीन देशों के हमले के अधिकतर परिणाम हासिल नहीं हुए बल्कि उल्टा नतीजा निकला है?
तीन देशों ने सीरिया पर जो मिसाइल हमला किया जिसके दौरान अधिकार मिसाइल मार गिराए गए, यह हमला अपने अधिकतर लक्ष्य पूरे नहीं कर सका बल्कि पूरी तरह उल्टा नतीजा निकला है।

सबसे बड़ी चीज़ तो यही है कि इन हमलों के बाद राष्ट्रपति बश्शार असद की लोकप्रियता सीरिया के भीतर और बाहर और भी बढ़ गई है। इसी तरह रूस, ईरान और हिज़्बुल्लाह से उनका एलायंस और भी मज़बूत हुआ है, इस हमले से सीरियाई सेना की दृढ़ता और भी स्पष्ट हुई है जबकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की कमज़ोरी ज़ाहिर हुई है।

हम तो यह मानते हैं कि रूस ने इस पूरे प्रकरण को बड़े सामर्थ्य और संयम के साथ मैनेज किया है और राष्ट्रपति ट्रम्प की इज़्ज़त बचाने के लिए किए गए इस दिखावटी हमले को हो जाने दिया हालांकि इससे रूस के राष्ट्रपति पर यह आपत्ति भी हुई कि उन्होंने अमरीकी हमले को नाकाम नहीं बनाया मगर एक विचार यह है कि रूस ने अप्रत्यक्ष रूप से जवाब दिया है। रूस ने सीरियाई मिसाइलों के माध्यम से जवाब दिया है जो रूसी निर्मित मिसाइल हैं।

सीरिया को इस हमले से बहुत सीमित नुक़सान पहुंचा है जिसकी दो वजहें हैं एक तो यह कि पहले ही सैनिक ठिकानों और हवाई अड्डों को ख़ाली कर लिया गया था और सीरिया ने अपने आधुनिक विमान रूस के प्रयोग वाली छावनियों में भेज दिए थे और दूसरी वजह यह है कि अधिकतर मिसाइल निशाने पर लगने से पहले ही मार गिराए गए।

वाशिंग्टन में रूस के राजदूत अनातोली आन्तीनोफ़ ने कहा कि यह हमला राष्ट्रपति पुतीन का अपमान है और रूस इसका जवाब ज़रूर देगा। राजदूत का बयान शायद सीरिया संकट के बारे में रूस की भावी योजना की ओर संकेत है। इससे पहले जब तुर्की ने दक्षिणी सीरिया में रूस का एक युद्धक विमान मार गिराया था तो तत्काल जवाब नहीं दिया था बल्कि अपनी समझदारी से तुर्की को व्यवहारिक रूप से नैटो से बाहर निकाल लिया और उसे रूसी ख़ैमे में शामिल कर लिया।

यदि हम सीरिया और क्षेत्र की भविष्य की तसवीर देखें तो निम्नलिखित बातें अपेक्षित हैं,

जिस तरह शनिवार को हमला किया गया उसी तरह भविष्य में भी केमिकल हमले का बहाना बनाकर हमला किया जाएगा तो उसका भी कोई फ़ायदा नहीं होगा क्योंकि इस हमले से अमरीका तथा उसके ख़ैमे में शामिल देशों की छवि ही ख़राब हुई है। विशेषकर इसलिए कि हमला ठीक उस दिन किया गया जिस दिन संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेषज्ञ टीम केमिकल हथियार के प्रयोग किए जाने के दावों की जांच के लिए दमिश्क़ पहुंचने वाली थी। इस हमले से यह संदेश भी गया कि यह देश चाहते ही नहीं कि इस मामले की जांच हो।

दूसरी बात यह है कि सीरिया, ईरान और रूस संभावित रूप से इस हमले का बदला थका देने वाली छापामार जंग के माध्यम से लेंगे। इस छापामार कार्यवाही का निशाना सीरिया और इराक़ में मौजूद 8 हज़ार से अधिक सैनिक बन सकते हैं।

तीसरी बात यह है कि अब रूस सीरिया को एस-300 या एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स व्यवस्था दे सकता है जिसकी मदद से सीरिया भविष्य में विदेशी हमलों को रोक सकेगा।

रूस-इस्राईल संबंध इस हमले के बाद बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच जाएंगे क्योंकि यह ज़ाहिर हो चुका है कि इस्राईल इस हमले में शामिल था, उसने इस हमले के लिए जानकारियां उपलब्ध कराई थीं।

इस बात की संभावना अधिक है कि इदलिब या दरआ को आज़ाद कराने की कार्यवाही जब सीरियाई सरकार शुरू करेगी तो रूस भरपूर तरीक़े से साथ देगा।
हुम्स के निकट टी-4 सैनिक छावनी पर इस्राईल के हमले में सात ईरानी सैनिकों और इसी संख्या में सीरियाई सैनिकों की शहादत के बाद अब ईरान और इस्राईल के बीच आमने सामने की टक्कर शुरू हो गई है ईरान की सरकार पर इस हमले का बदला लेने के लिए जनता का भारी दबाव भी है।
इराक़ के पूरी तरह अमरीका के हाथ से निकल जाने की संभावना और बढ़ गई है जहां अमरीका ने युद्ध में लगभग 5 ट्रिलियन डालर की रक़म ख़र्च की है। इराक़ी जनता ने पूरी तरह सीरिया के समर्थन की घोषणा की है।

जिसने भी हमले के बाद वाली सुबह को और पूरे दिन हज़ारों सीरियाई नागरिकों को देश भर में अपनी सरकार के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए देखा है वह समझ सकता है कि अमरीका और इस्राईल को कितना बड़ा नुक़सान पहुंच गया है। उसे समझ में आ जाएगा कि राष्ट्रपति असद अपनी जगह पर बाक़ी रहने वाले हैं उन्हें अमरीका और उसके अरब घटक सत्ता से हटा नहीं सकते।

इस बात की भी संभावना है कि ट्रम्प अपनी सेना को सीरिया और इराक़ से निकाल लें और अपने फ़ैसले के लिए इसी हमले को बहाना बनाएं।

ट्रम्प अपनी ताक़त दिखाना और देश की प्रतिष्ठा बहाल करना चाहते थे लेकिन वह एसे व्यक्ति के रूप में सामने आए हैं जिसने अपने ही पैरों पर फ़ायरिंग की है।

एक अन्य अरब देश मिस्र पर पश्चिमी त्रिकोण ने हमला किया था जिसके बाद ब्रिटिश साम्राज्य का पतन शुरू हो गया था। अब यह दूसरा पश्चिमी त्रिकोण मध्यपूर्व से पूरी तरह अमरीकी निष्कासन की शुरुआत साबित हो सकता है जबकि सीरिया साज़िश को नाकाम बनाएगा और अपनी धरती के हर भाग को पुनः अपने नियंत्रण में कर लेगा।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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